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हरिद्वार अपहरण कांड खुलासा: तंत्र-मंत्र के लिए अगवा हुआ 3 साल का मासूम 20 घंटे में सकुशल बरामद; तांत्रिकों के चंगुल से पुलिस ने ऐसे बचाई जिंदगी

रुड़की: उत्तराखंड के हरिद्वार जिले से एक ऐसी रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना सामने आई है, जिसने आधुनिक समाज में अंधविश्वास की भयावह जड़ों को एक बार फिर उजागर कर दिया है। जिले के झबरेड़ा थाना क्षेत्र के अंतर्गत एक शादी समारोह से महज तीन साल के एक मासूम बच्चे का अपहरण कर लिया गया। सनसनीखेज बात यह है कि इस मासूम का अपहरण किसी फिरौती के लिए नहीं, बल्कि तंत्र-मंत्र, जादू-टोने और अमानवीय तांत्रिक क्रियाओं को अंजाम देने के इरादे से किया गया था।

हालांकि, इस बेहद संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए हरिद्वार पुलिस ने महज 20 घंटे के भीतर न सिर्फ इस पूरे ‘हरिद्वार पुलिस अपहरण कांड खुलासा’ को अंजाम दिया, बल्कि मासूम बच्चे को मौत के मुंह से खींचकर सकुशल बरामद भी कर लिया। पुलिस की इस मुस्तैदी ने देवभूमि में एक बड़े और वीभत्स अपराध को घटित होने से रोक लिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने एक अपहरणकर्ता को दबोच लिया है, जबकि उसके दो अन्य साथियों की तलाश में सरगर्मी से दबिश दी जा रही है।


शादी की खुशियां अचानक मातम में बदलीं: 14 मई की वो खौफनाक दास्तान

घटनाक्रम के मुताबिक, यह पूरा मामला झबरेड़ा थाना क्षेत्र के भगतोवाली गांव का है। 14 मई, गुरुवार के दिन गांव में एक विवाह समारोह चल रहा था, जहां पूरा परिवार और रिश्तेदार जश्न के माहौल में डूबे हुए थे। इसी भीड़भाड़ और उल्लास के बीच, गांव के ही एक निवासी का तीन साल का मासूम बच्चा अचानक खेलते-खेलते गायब हो गया। शुरुआत में परिजनों ने सोचा कि बच्चा आसपास ही कहीं खेल रहा होगा, लेकिन जब काफी खोजबीन के बाद भी उसका कोई सुराग नहीं मिला, तो परिवार में कोहराम मच गया।

अनहोनी की आशंका से घबराए पिता ने तत्काल झबरेड़ा थाने पहुंचकर पुलिस को एक शिकायती पत्र सौंपा। झबरेड़ा थाना प्रभारी निरीक्षक विजय सिंह ने मामले के हर पहलू और बच्चे की कोमल उम्र को देखते हुए बिना एक पल गंवाए तुरंत अपहरण की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया। इसकी सूचना तत्काल पुलिस के उच्चाधिकारियों को दी गई, जिसके बाद महकमे में हड़कंप मच गया।


एसएसपी का कड़ा रुख और 30 जांबाजों का ‘मिशन रेस्क्यू’

मासूम के अपहरण और उसके पीछे किसी बड़ी साजिश की भनक लगते ही वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) हरिद्वार, नवनीत सिंह ने इस मामले को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता पर लिया। उन्होंने बच्चे की सुरक्षित और जल्द से जल्द बरामदगी के लिए एक विशेष रणनीति तैयार की। एसएसपी ने तुरंत पुलिस की कई टीमों का गठन किया और पूरे ऑपरेशन के पर्यवेक्षण (सुपरविजन) की कमान पुलिस अधीक्षक (एसपी) देहात शेखर चंद्र सुयाल को सौंप दी। इसके साथ ही, तकनीकी मदद और सर्विलांस के लिए सीआईयू (क्राइम इंटेलिजेंस यूनिट) प्रभारी रुड़की को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर मोर्चे पर लगा दिया गया।

“हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती समय की थी। चूंकि मामला तांत्रिक प्रवृत्ति के अपराधियों से जुड़ा था, इसलिए हमें डर था कि वे बच्चे को कोई शारीरिक नुकसान न पहुंचा दें। हमारे पास गलती करने की कोई गुंजाइश नहीं थी।” — शेखर चंद्र सुयाल, एसपी देहात

पुलिस टीम में शामिल करीब 25 से 30 जवानों ने बिना सोए लगातार कॉलिंग डेटा रिकॉर्ड्स (CDR), मोबाइल लोकेशन और मुखबिर तंत्र को सक्रिय किया। इस दौरान पुलिस की अलग-अलग टीमों ने इलाके के लगभग सैकड़ों सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को खंगाला और संदिग्धों के रूट को ट्रैक करना शुरू किया।


मुखबिर की सटीक सूचना और उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर से पहला सुराग

टेक्निकल सर्विलांस और जमीनी इनपुट के आधार पर पुलिस को पहला ठोस सुराग 15 मई, शुक्रवार के दिन मिला। मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने जाल बिछाकर एक संदिग्ध को हिरासत में लिया। पकड़े गए आरोपी की पहचान गरजा उर्फ गजे (पुत्र मक्कू सिंह), निवासी ग्राम सकरपुर, जिला मुजफ्फरनगर (उत्तर प्रदेश) के रूप में हुई।

शुरुआत में आरोपी पुलिस को गुमराह करने की कोशिश करता रहा, लेकिन जब सीआईयू और स्थानीय पुलिस ने कड़ाई से पूछताछ की, तो उसने टूटकर अपना गुनाह कबूल कर लिया। आरोपी गरजा ने स्वीकार किया कि उसने अपने दो अन्य साथियों के साथ मिलकर बच्चे को अगवा किया था। उसने यह भी कबूला कि वे लोग तंत्र-मंत्र और जादू-टोने की क्रियाएं करते हैं और इसी सिलसिले में इस बच्चे का इस्तेमाल किया जाना था। उसने अपने फरार साथियों के ठिकाने और बच्चे की संभावित लोकेशन के बारे में भी पुलिस को अहम जानकारी दी।


पुरकाजी रोड पर फिल्मी स्टाइल में हुआ पीछा, बच्चा छोड़कर भागा आरोपी

गिरफ्तार आरोपी से मिले सुराग के बाद पुलिस टीम बिना समय गंवाए उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर स्थित सकरपुर गांव से पुरकाजी रोड की तरफ बढ़ी। पुलिस जब एलबीएस (LBS) ईंट भट्टे के पास पहुंची, तो वहां का नजारा देखकर अधिकारियों की सांसें थम गईं। भट्टे के पास एक संदिग्ध व्यक्ति उसी तीन साल के मासूम बच्चे को गोद में लिए खड़ा दिखाई दिया।

जैसे ही उस व्यक्ति की नजर पुलिस की गाड़ियों और जवानों पर पड़ी, वह समझ गया कि वह चारों तरफ से घिर चुका है। खुद को फंसता देख और पुलिस के खौफ के कारण वह शातिर अपराधी बच्चे को वहीं जमीन पर छोड़कर झाड़ियों और घने जंगलों की आड़ लेकर मौके से फरार हो गया। पुलिस ने तुरंत आगे बढ़कर बच्चे को अपनी सुरक्षा में लिया। जब बच्चे का चेहरा मिलाया गया, तो यह पुख्ता हो गया कि यह वही मासूम है जिसका झबरेड़ा से अपहरण किया गया था।


जंगलों की खाक छानी, सैकड़ों सीसीटीवी खंगाले: पुलिस को जनता का सलाम

एसपी देहात शेखर चंद्र सुयाल ने मीडिया को इस पूरे ऑपरेशन की जानकारी देते हुए बताया कि यह ऑपरेशन बेहद पेचीदा और थका देने वाला था। उन्होंने बताया कि तांत्रिक किस्म के इन अपराधियों के चंगुल से बच्चे को छुड़ाने के लिए पुलिस के 30 जवानों ने पूरी जान लगा दी थी। बच्चे को ढूंढने के लिए पुलिस ने न सिर्फ सैकड़ों सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले, बल्कि रुड़की और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों के कई किलोमीटर लंबे घने जंगलों को भी छान मारा।

जैसे ही पुलिस टीम बच्चे को सकुशल लेकर झबरेड़ा पहुंची, पूरे क्षेत्र के लोगों की आंखों में खुशी के आंसू आ गए। परिजनों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा और उन्होंने उत्तराखंड पुलिस का कोटि-कोटि धन्यवाद किया। स्थानीय जनता ने पुलिस टीम की इस अविश्वसनीय मुस्तैदी और संवेदनशीलता की जमकर सराहना की और पूरी टीम का आभार जताया।


चुनौती अभी बाकी: फरार तांत्रिकों की तलाश में पुलिस की ताबड़तोड़ दबिश

भले ही मासूम बच्चा आज अपने माता-पिता की गोद में सुरक्षित है, लेकिन पुलिस इस मामले को यहीं रोकने के मूड में नहीं है। एसपी देहात के अनुसार, इस घिनौने कृत्य में शामिल मुख्य तांत्रिक और उसका एक अन्य सहयोगी अभी भी कानून की गिरफ्त से बाहर हैं। पुलिस की तीन विशेष टीमें उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दे रही हैं। पुलिस का दावा है कि जल्द ही फरार आरोपियों को भी सलाखों के पीछे भेज दिया जाएगा और इस अंधविश्वास के रैकेट का पूरी तरह भंडाफोड़ किया जाएगा।

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