देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में वित्तीय निवेश के नाम पर एक बार फिर बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। ठगों ने इस बार ‘क्रिप्टोकरेंसी’ और ‘ऑनलाइन ट्रेडिंग’ को अपना हथियार बनाया और मासूम लोगों को निशाना बनाते हुए करोड़ों रुपए डकार लिए। दून के रायपुर थाना क्षेत्र में एक सुनियोजित नेटवर्क चलाकर करीब 20 से 25 करोड़ रुपए की ठगी को अंजाम दिया गया है। पुलिस ने इस सनसनीखेज मामले में मुख्य सरगना सहित 6 नामजद और कई अन्य अज्ञात सहयोगियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर तफ्तीश शुरू कर दी है।
यह पूरा खेल हाई-प्रोफाइल लाइफस्टाइल, फाइव स्टार होटलों में सेमिनार और सोशल मीडिया के जरिए खेला गया, ताकि लोगों को निवेश स्कीम पूरी तरह से वैध और सुरक्षित लगे। जब पानी सिर से ऊपर चला गया और निवेशकों को अपना पैसा डूबता हुआ नजर आया, तब जाकर इस महाठगी का भंडाफोड़ हुआ।
झांसा: हर महीने 10% मुनाफे का लालच और जाली लाइसेंस फीस
इस बड़े वित्तीय अपराध (Financial Fraud) की स्क्रिप्ट करीब दो साल पहले लिखी जानी शुरू हुई थी। रायपुर थाना क्षेत्र के किद्दूवाला निवासी पीड़ित दुर्गा बहादुर गुरुंग ने इस संबंध में पुलिस को एक लिखित शिकायत सौंपी। शिकायत के अनुसार, लगभग दो वर्ष पूर्व नवीन सिंह नेगी नामक व्यक्ति ने उनसे संपर्क किया था। नवीन ने खुद को वित्तीय विशेषज्ञ बताते हुए ‘लाइन क्रिप्टो’ (Line Crypto) और ‘क्रॉस मार्केट’ (Cross Market) नामक दो कंपनियों का संचालक व प्रतिनिधि बताया।
आरोपियों ने पीड़ित को भरोसा दिलाया कि उनकी कंपनियां पूरी तरह से कानूनी रूप से वैध हैं और वैश्विक स्तर पर क्रिप्टो ट्रेडिंग का काम करती हैं। निवेशकों को लुभाने के लिए आरोपियों ने दावा किया कि यदि वे इन कंपनियों में अपनी गाढ़ी कमाई लगाते हैं, तो उन्हें हर महीने 5 से 10 फीसदी तक का फिक्स्ड रिटर्न यानी मुनाफा दिया जाएगा।
विश्वास जीतने के लिए ठगों ने बकायदा एक सिस्टम तैयार किया था:
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बिजनेस आईडी जेनरेशन: निवेश शुरू करने से पहले प्रत्येक निवेशक की एक विशेष ऑनलाइन ‘बिजनेस आईडी’ बनाई जाती थी।
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लाइसेंस फीस: आईडी एक्टिवेट करने के नाम पर 10,000 रुपए की ‘लाइसेंस फीस’ वसूली जाती थी।
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आसान निकास नीति (Exit Policy): निवेशकों को यह लालच भी दिया गया कि यदि वे 6 महीने बाद अपनी मूल राशि वापस निकालना चाहते हैं, तो बिना किसी कटौती के पूरी रकम निकाल सकते हैं।
होटलों में सेमिनार और व्हाट्सएप ग्रुप्स से बुना गया जाल
देहरादून में हुए इस क्रिप्टो और ऑनलाइन निवेश के नाम पर ठगी के मामले में सबसे खतरनाक बात यह थी कि आरोपियों ने इसके प्रचार-प्रसार के लिए बेहद आधुनिक और कॉर्पोरेट तरीकों का इस्तेमाल किया। पुलिस जांच में सामने आया है कि इस नेटवर्क को बड़ा करने के लिए आरोपियों ने देहरादून और आसपास के इलाकों के नामी होटलों में महंगी मीटिंग्स और फिजिकल सेमिनार आयोजित किए थे।
इन सेमिनारों में बकायदा प्रोजेक्टर और ग्राफ्स के जरिए यह दिखाया जाता था कि कैसे क्रिप्टो मार्केट से रातों-रात अमीर बना जा सकता है। इसके अलावा, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर आक्रामक रूप से इसका प्रचार किया गया। सैकड़ों व्हाट्सएप ग्रुप्स बनाए गए, जिनमें फर्जी स्क्रीनशॉट्स शेयर करके यह दिखाया जाता था कि पुराने निवेशकों को कितना भारी मुनाफा हो रहा है। शुरुआती दौर में लोगों का भरोसा पूरी तरह जीतने के लिए आरोपियों ने कुछ निवेशकों को बकायदा प्लॉट्स के अलॉटमेंट पेपर और पोस्ट-डेटेड चेक (PDC) भी बांटे, जो बाद में महज रद्दी के टुकड़े साबित हुए।
अक्टूबर 2025 में अचानक बंद हुई कंपनी, उड़े होश
लाखों-करोड़ों का निवेश समेटने के बाद ठगों ने अपनी योजना के अंतिम चरण को अंजाम दिया। साल 2024 से चल रहा यह पूरा गोरखधंधा पिछले साल अक्टूबर 2025 में अचानक बंद हो गया। कंपनियों की वेबसाइट्स क्रैश हो गईं और ऐप ने काम करना बंद कर दिया। जब निवेशकों को उनके मासिक रिटर्न मिलने बंद हो गए, तो उन्होंने संचालकों से संपर्क साधने की कोशिश की।
शुरुआत में आरोपियों ने तकनीकी खराबी और अंतरराष्ट्रीय मार्केट में मंदी का बहाना बनाकर लोगों को टाला। लेकिन जब पानी सिर से ऊपर निकल गया, तो आरोपियों ने साफ कह दिया कि कंपनियां पूरी तरह बंद हो चुकी हैं और अब किसी को कोई पैसा वापस नहीं मिलेगा। इसके बाद निवेशकों के पैरों तले जमीन खिसक गई। जब कई पीड़ित एक साथ जमा हुए, तब जाकर यह साफ हुआ कि यह किसी एक व्यक्ति के साथ हुआ फ्रॉड नहीं है, बल्कि एक संगठित गिरोह ने मिलकर 20 से 25 करोड़ रुपए की महाठगी को अंजाम दिया है।
इन 6 नामजद आरोपियों के खिलाफ कानून का शिकंजा
मामले की गंभीरता और ठगी की विशाल रकम को देखते हुए रायपुर थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की है। पुलिस ने मुख्य शिकायतकर्ता की तहरीर पर कुल 6 मुख्य आरोपियों को नामजद किया है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, नामजद किए गए मुख्य आरोपी इस प्रकार हैं:
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नवीन सिंह नेगी (मुख्य सूत्रधार)
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दीपेश देवरानी
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जगपाल सिंह सजवाण
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सुरेंद्र प्रसाद कोटवाल
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अनिल कुमार परदेशी
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कमल सिंह रावत
इन सभी नामजद आरोपियों के साथ-साथ पुलिस उन कड़ियों की भी तलाश कर रही है, जिन्होंने इन सेमिनारों को आयोजित करने और व्हाट्सएप ग्रुप्स के जरिए चेन मार्केटिंग (Chain Marketing) की तरह नए निवेशकों को जोड़ने में मदद की थी।
पुलिस का बयान: कड़े कानूनों के तहत दर्ज हुआ मुकदमा
इस पूरे घटनाक्रम पर रायपुर थाना प्रभारी संजीत कुमार ने आधिकारिक बयान जारी कर बताया कि पीड़ित दुर्गा बहादुर गुरुंग की शिकायत को बेहद गंभीरता से लिया गया है। प्राथमिक जांच में ठगी के आरोप सही पाए जाने के बाद पुलिस ने तत्काल प्रभाव से मुकदमा दर्ज कर लिया है।
“6 नामजद आरोपियों- नवीन सिंह नेगी, दीपेश देवरानी, जगपाल सिंह सजवाण, सुरेंद्र प्रसाद कोटवाल, अनिल कुमार परदेशी और कमल सिंह रावत समेत अन्य सहयोगियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में केस दर्ज किया गया है। इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सुसंगत धाराओं के साथ-साथ ‘अनियमित जमा योजनाएं प्रतिषेध अधिनियम’ (BUDS Act) की कड़े प्रावधानों को भी शामिल किया गया है। मामले की जांच के लिए एक विशेष टीम का गठन किया जा रहा है और आरोपियों की संपत्तियों व बैंक खातों को फ्रीज करने की प्रक्रिया भी जल्द शुरू की जाएगी।” — संजीत कुमार, थाना प्रभारी, रायपुर (देहरादून)
उत्तराखंड पुलिस ने इस मामले के सामने आने के बाद एक बार फिर आम जनता से अपील की है कि वे किसी भी ऐसी ऑनलाइन कंपनी, क्रिप्टो टोकन या निवेश स्कीम में पैसा न लगाएं जो रिजर्व बैंक (RBI) या सेबी (SEBI) जैसी सरकारी संस्थाओं से मान्यता प्राप्त न हो। अत्यधिक मुनाफे का लालच हमेशा वित्तीय नुकसान की वजह बनता है।



