
देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में नियमों को ताक पर रखकर संचालित हो रहे होमस्टे के खिलाफ जिला प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए 96 होमस्टे के पंजीकरण निरस्त कर दिए हैं। जिलाधिकारी सविन बंसल के निर्देश पर चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत यह कार्रवाई की गई है। प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि जिन होमस्टे का संचालन उत्तराखण्ड गृह आवास (होमस्टे) नियमावली के अनुरूप नहीं पाया जाएगा, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।
जिला प्रशासन ने इस पूरे अभियान को “ऑपरेशन सफाई” का नाम दिया है। पहले चरण में 17 और दूसरे चरण में 79 अवैध होमस्टे का पंजीकरण निरस्त किया गया। इसके साथ ही इन होमस्टे को पर्यटन विभाग की वेबसाइट से हटाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। प्रशासन का कहना है कि कई होमस्टे वास्तव में होटल की तरह संचालित किए जा रहे थे, जहां नियमों का खुला उल्लंघन किया जा रहा था।
दरअसल पिछले कई महीनों से देहरादून शहर में नशे, ओवर स्पीड, हुड़दंग और फायरिंग जैसी घटनाओं में लगातार वृद्धि देखने को मिल रही थी। जांच में यह बात सामने आई कि कई होमस्टे ऐसे लोगों के ठिकाने बन चुके थे, जहां रातभर शराब पार्टियां, तेज आवाज में डीजे और अन्य गैर कानूनी गतिविधियां संचालित हो रही थीं। प्रशासन के अनुसार इन गतिविधियों के कारण आसपास रहने वाले लोगों की सुरक्षा और शांति दोनों प्रभावित हो रही थीं।
जिलाधिकारी सविन बंसल ने कहा कि होमस्टे योजना का मूल उद्देश्य स्थानीय संस्कृति, पारंपरिक खानपान और पर्यटन को बढ़ावा देना है, ताकि स्थानीय लोगों की आय में वृद्धि हो सके। लेकिन कई स्थानों पर इस योजना का दुरुपयोग किया जा रहा था। कुछ प्रभावशाली और संपन्न लोगों ने होमस्टे के नाम पर बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठान खड़े कर दिए थे, जो पूरी तरह होटल की तरह संचालित हो रहे थे।
प्रशासन द्वारा गठित पांच मजिस्ट्रेट टीमों ने सहसपुर और रायपुर विकासखंड के शहरी क्षेत्रों सहित जिले के विभिन्न हिस्सों में कुल 136 निरीक्षण किए। निरीक्षण के दौरान कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। अधिकांश होमस्टे में रसोई व्यवस्था नहीं मिली, जबकि नियमों के अनुसार होमस्टे में घरेलू वातावरण और भोजन व्यवस्था अनिवार्य है। कई जगह अग्निशमन उपकरण या तो मौजूद नहीं थे या उनकी वैधता समाप्त हो चुकी थी।
इसके अलावा कई होमस्टे बारात घर, पार्टी स्थल और कमर्शियल इवेंट्स के लिए इस्तेमाल किए जा रहे थे। कुछ स्थानों पर मालिक स्वयं वहां निवास नहीं कर रहे थे और पूरी संपत्ति किराये या लीज पर देकर होटल की तरह संचालित की जा रही थी। प्रशासन ने पाया कि कई होमस्टे निर्धारित क्षमता से अधिक कमरों का संचालन कर रहे थे, जो नियमों का सीधा उल्लंघन है।
जिला प्रशासन के अनुसार कुछ मामलों में विदेशी नागरिकों के ठहरने की जानकारी संबंधित विभाग को उपलब्ध नहीं कराई गई। विदेशी पर्यटकों के लिए सी-फॉर्म जमा करना अनिवार्य होता है, लेकिन कई संचालकों ने इस नियम का पालन नहीं किया। इससे सुरक्षा एजेंसियों की चिंता भी बढ़ गई थी।
प्रशासन ने यह भी माना कि कुछ होमस्टे केवल कागजों में पंजीकृत थे लेकिन वास्तव में संचालित नहीं हो रहे थे। वहीं कई जगहों पर उपद्रवी प्रवृत्ति के लोग बिना सत्यापन के ठहराए जा रहे थे। ऐसे लोगों द्वारा शहर में नशे की हालत में वाहन दौड़ाना, फायरिंग करना और हुड़दंग मचाने की घटनाएं सामने आ रही थीं।
डीएम सविन बंसल ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि जिले में संचालित प्रत्येक होमस्टे का सत्यापन किया जाए और नियमों का पालन न करने वालों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई हो। उन्होंने कहा कि कानून व्यवस्था से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद होमस्टे संचालकों में हड़कंप मचा हुआ है। कई संचालक अब अपने दस्तावेज और व्यवस्थाएं दुरुस्त करने में जुट गए हैं। पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों का मानना है कि होमस्टे योजना को बचाने के लिए यह कार्रवाई जरूरी थी, क्योंकि कुछ लोगों की वजह से पूरे सिस्टम की छवि खराब हो रही थी।
स्थानीय निवासियों ने भी जिला प्रशासन की कार्रवाई का स्वागत किया है। उनका कहना है कि कई क्षेत्रों में रातभर तेज संगीत, शराब पार्टियों और संदिग्ध गतिविधियों के कारण आम लोगों का जीवन प्रभावित हो रहा था। लोगों ने उम्मीद जताई कि प्रशासन आगे भी इसी तरह सख्ती बनाए रखेगा।
जिला प्रशासन ने साफ कर दिया है कि यह अभियान केवल शुरुआत है। आने वाले दिनों में और भी होमस्टे की जांच की जाएगी। जिन इकाइयों में अग्निशमन सुरक्षा, फूड लाइसेंस, स्वामी निवास, सत्यापन और अन्य आवश्यक मानकों का पालन नहीं मिलेगा, उनके खिलाफ भी कठोर कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन का कहना है कि उत्तराखण्ड जैसे पर्यटन राज्य में होमस्टे योजना स्थानीय लोगों की आजीविका बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। लेकिन यदि इसका उपयोग अवैध व्यवसाय, शराब पार्टियों और कानून व्यवस्था को बिगाड़ने के लिए किया जाएगा तो सरकार और प्रशासन दोनों सख्त कदम उठाने से पीछे नहीं हटेंगे।
देहरादून में हुई इस बड़ी कार्रवाई को प्रदेशभर के लिए एक संदेश माना जा रहा है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में अन्य जिलों में भी होमस्टे की जांच अभियान चलाया जा सकता है। जिला प्रशासन की इस कार्रवाई से साफ है कि अब नियमों की अनदेखी कर होटलनुमा होमस्टे चलाना आसान नहीं होगा।



