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उत्तराखंड: पीएम मोदी की सोना नहीं खरीदने की अपील पर भड़के सर्राफा व्यापारी, देहरादून में मोमबत्ती जलाकर किया विरोध प्रदर्शन

देहरादून: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देशवासियों से एक साल तक सोना नहीं खरीदने की अपील के बाद उत्तराखंड समेत पूरे देश के सर्राफा कारोबारियों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। देहरादून में गुरुवार शाम सर्राफा व्यापारियों ने धामावाला क्षेत्र में मोमबत्तियां जलाकर सरकार के फैसले और अपील के खिलाफ सांकेतिक विरोध प्रदर्शन किया। व्यापारियों का कहना है कि इस तरह की अपील से देश के लाखों ज्वैलर्स, कारीगरों और उनके परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है।

सर्राफा व्यापारियों ने आरोप लगाया कि सरकार ने देशहित का हवाला देते हुए सोने की खरीदारी कम करने की बात कही है, लेकिन इस फैसले का सबसे ज्यादा असर उन लोगों पर पड़ेगा जिनकी आजीविका पूरी तरह स्वर्ण कारोबार पर निर्भर है। व्यापारियों के अनुसार, अगर एक साल तक सोने की बिक्री प्रभावित होती है तो छोटे दुकानदारों से लेकर आभूषण बनाने वाले कारीगरों तक सभी की रोजी-रोटी पर खतरा मंडराने लगेगा।

देहरादून सर्राफा मंडल के अध्यक्ष सुनील मैंसोन ने प्रदर्शन के दौरान कहा कि प्रधानमंत्री को इस तरह की अपील करने से पहले सर्राफा उद्योग से जुड़े लोगों की स्थिति पर भी विचार करना चाहिए था। उन्होंने कहा कि भारत में लाखों परिवार सीधे या परोक्ष रूप से इस व्यवसाय से जुड़े हुए हैं। यदि जनता सोना खरीदना बंद कर देगी तो व्यापार ठप हो जाएगा और हजारों लोग बेरोजगार हो जाएंगे।

व्यापारियों ने सरकार द्वारा सोने पर आयात शुल्क बढ़ाए जाने का भी विरोध किया। उनका कहना है कि पहले जहां सोने पर आयात शुल्क 6 प्रतिशत था, वहीं अब इसे बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया है, जिससे कारोबार पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। ज्वैलर्स का कहना है कि महंगा आयात शुल्क बाजार में सोने की कीमतों को और बढ़ाएगा, जिसका असर सीधे ग्राहकों और व्यापारियों दोनों पर पड़ेगा।

सर्राफा मंडल के पदाधिकारियों ने मांग की कि सरकार आयात शुल्क को घटाकर 5 प्रतिशत करे ताकि कारोबार को राहत मिल सके। इसके अलावा पुराने आभूषणों को दोबारा तैयार करने पर लगने वाले लेबर चार्ज पर टैक्स को भी कम करने की मांग उठाई गई। व्यापारियों के मुताबिक वर्तमान टैक्स व्यवस्था के कारण छोटे कारीगरों और निर्माताओं की स्थिति बेहद खराब हो रही है।

सुनील मैंसोन ने कहा कि आभूषण निर्माता सर्राफा कारोबार की रीढ़ माने जाते हैं। यदि बाजार में मांग कम होगी तो सबसे पहले इन्हीं कारीगरों की नौकरी जाएगी। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि स्थिति नहीं सुधरी तो हजारों कारीगर भुखमरी की कगार पर पहुंच सकते हैं। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि स्वर्ण उद्योग को केवल लग्जरी सेक्टर के रूप में न देखा जाए, बल्कि इसे रोजगार देने वाले बड़े उद्योग के रूप में समझा जाए।

व्यापारियों ने यह भी कहा कि सरकार को सोने के आभूषणों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए मजबूत नीति बनानी चाहिए। उनका मानना है कि भारत में जितना सोना आयात होता है, उसका कम से कम 50 प्रतिशत तैयार आभूषणों के रूप में निर्यात किया जा सकता है। लेकिन वर्तमान एक्सपोर्ट पॉलिसी में कई जटिलताएं हैं, जिनके कारण कारोबारियों को परेशानी उठानी पड़ती है।

सर्राफा व्यापारियों ने मांग की कि सरकार उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों और स्टेकहोल्डर्स के साथ बैठक कर नीतियों में सुधार करे। उनका कहना है कि यदि निर्यात बढ़ेगा तो देश की अर्थव्यवस्था को भी फायदा होगा और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। साथ ही आयकर नियमों में भी स्वर्ण कारोबार को अलग श्रेणी में रखकर राहत देने की जरूरत बताई गई।

देहरादून में हुए इस विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में व्यापारी शामिल हुए। सभी ने हाथों में मोमबत्तियां लेकर शांतिपूर्ण तरीके से अपनी नाराजगी जाहिर की। व्यापारियों का कहना है कि वे सरकार के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन ऐसे फैसलों से पहले उद्योग से जुड़े लोगों की राय जरूर ली जानी चाहिए। उनका कहना है कि अगर सरकार जल्द राहत नहीं देती है तो आने वाले समय में पूरे देश में बड़ा आंदोलन किया जा सकता है।

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