
दक्षिण भारत की राजनीति में इस समय सबसे ज्यादा चर्चा के. सी. वेणुगोपाल को लेकर हो रही है। केरल विधानसभा चुनाव में कांग्रेस नीत यूडीएफ गठबंधन की बड़ी जीत के बाद अब राज्य के अगले मुख्यमंत्री के नाम को लेकर लगभग तस्वीर साफ होती दिखाई दे रही है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल मुख्यमंत्री पद की दौड़ में सबसे आगे निकल चुके हैं, जबकि विपक्ष के नेता रहे वी.डी. सतीशन धीरे-धीरे इस रेस में पिछड़ते नजर आ रहे हैं।
चुनाव परिणाम आने के बाद से ही कांग्रेस के भीतर मुख्यमंत्री पद को लेकर लगातार बैठकों और मंथन का दौर चल रहा था। शुरुआत में वीडी सतीशन, केसी वेणुगोपाल और रमेश चेन्निथला का नाम प्रमुख दावेदारों में शामिल था। हालांकि बीते कुछ दिनों में पार्टी के अंदरूनी समीकरण तेजी से बदले और मुकाबला केवल सतीशन तथा वेणुगोपाल के बीच सिमट गया। अब सूत्रों का दावा है कि विधायक दल की पहली बैठक में अधिकांश विधायकों ने केसी वेणुगोपाल के नाम पर सहमति जताई थी। यही कारण है कि आलाकमान भी उनके पक्ष में झुकता दिखाई दे रहा है।
बताया जा रहा है कि कांग्रेस नेतृत्व ने अंतिम फैसला विधायक दल पर छोड़ दिया है, ताकि मुख्यमंत्री के चयन को लोकतांत्रिक तरीके से पेश किया जा सके। जल्द ही विधायक दल की एक और बैठक बुलाई जा सकती है, जिसमें औपचारिक रूप से केसी वेणुगोपाल के नाम पर मुहर लग सकती है। अगर ऐसा होता है तो यह केरल कांग्रेस की राजनीति में बड़ा बदलाव माना जाएगा।
केसी वेणुगोपाल फिलहाल लोकसभा सांसद हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री बनने की स्थिति में उन्हें छह महीने के भीतर केरल विधानसभा का सदस्य बनना होगा। इसके लिए किसी मौजूदा विधायक को अपनी सीट खाली करनी पड़ सकती है। साथ ही वेणुगोपाल के इस्तीफे के बाद अलपुझा लोकसभा सीट पर उपचुनाव भी कराना पड़ सकता है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस इस पूरे घटनाक्रम को बेहद सावधानी से संभालना चाहती है, क्योंकि लोकसभा उपचुनाव का असर राज्य की राजनीति पर भी पड़ सकता है।
मुख्यमंत्री पद की चर्चा के साथ-साथ कांग्रेस संगठन में भी बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। केसी वेणुगोपाल इस समय पार्टी के संगठन महासचिव की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। यदि उन्हें केरल की कमान सौंपी जाती है तो संगठन महासचिव का पद खाली हो जाएगा। ऐसे में अजय माकन का नाम नए संगठन महासचिव के तौर पर चर्चा में आ रहा है। पार्टी के भीतर माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में कांग्रेस संगठन में व्यापक फेरबदल देखने को मिल सकता है।
पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के नतीजों के बाद कांग्रेस के लिए केरल की जीत बेहद अहम मानी जा रही है। तमिलनाडु में कांग्रेस ने इस बार द्रमुक से अलग होकर विजय की पार्टी टीवीके के साथ गठबंधन किया था, लेकिन वहां उम्मीद के मुताबिक सफलता नहीं मिली। वहीं पश्चिम बंगाल और असम में भी पार्टी को निराशाजनक प्रदर्शन का सामना करना पड़ा। ऐसे में केरल में सरकार बनाना कांग्रेस के लिए राजनीतिक तौर पर बड़ी राहत माना जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, वीडी सतीशन समर्थकों द्वारा किए गए विरोध प्रदर्शनों से कांग्रेस आलाकमान खुश नहीं है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि मुख्यमंत्री चयन को लेकर सार्वजनिक विरोध से गलत संदेश गया है। खासतौर पर Rahul Gandhi समेत शीर्ष नेतृत्व इस घटनाक्रम से नाराज बताया जा रहा है। हालांकि सतीशन समर्थकों का कहना है कि केवल विधायकों की राय ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि जनता की पसंद और राज्य में उनकी लोकप्रियता को भी महत्व दिया जाना चाहिए।
अब सबकी नजर कांग्रेस विधायक दल की अगली बैठक पर टिकी हुई है। माना जा रहा है कि अगले कुछ दिनों में केरल को नया मुख्यमंत्री मिल जाएगा। अगर केसी वेणुगोपाल के नाम पर अंतिम मुहर लगती है तो यह न केवल राज्य बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी कांग्रेस के लिए एक बड़े रणनीतिक बदलाव का संकेत होगा।



