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पंजाब के मंत्री संजीव अरोड़ा पर ED का शिकंजा, कई राज्यों में छापेमारी से मचा हड़कंप

पंजाब की राजनीति और कारोबारी जगत में उस समय हलचल मच गई जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पंजाब सरकार के मंत्री और विधायक संजीव अरोड़ा से जुड़े कई ठिकानों पर बड़े स्तर पर छापेमारी शुरू की। यह कार्रवाई कथित मनी लॉन्ड्रिंग, हवाला कारोबार, अवैध सट्टेबाजी और विदेशी फंडिंग से जुड़े मामलों को लेकर की जा रही है। सूत्रों के अनुसार ED की टीमें पंजाब, दिल्ली, हरियाणा और गुजरात में एक साथ कई स्थानों पर पहुंचीं और दस्तावेजों के साथ डिजिटल रिकॉर्ड खंगालने में जुट गईं।

बताया जा रहा है कि यह पूरा मामला विदेशी पैसों की संदिग्ध एंट्री, हवाला चैनल के जरिए रकम के ट्रांसफर और रियल एस्टेट निवेश के माध्यम से धन को वैध दिखाने से जुड़ा हुआ है। जांच एजेंसियों का मानना है कि कई कंपनियों और निवेश संस्थाओं के जरिए अवैध पैसों को सफेद बनाने की कोशिश की गई। इसी कड़ी में ED ने संजीव अरोड़ा के करीबियों और उनसे जुड़े कारोबारियों पर भी शिकंजा कसना शुरू कर दिया है।

जानकारी के मुताबिक, पिछले महीने भी ED ने फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (FEMA) के तहत कुछ ठिकानों पर कार्रवाई की थी। उस दौरान विदेशी लेनदेन और निवेश से जुड़े कई संदिग्ध दस्तावेज सामने आए थे। अब उसी जांच को आगे बढ़ाते हुए एजेंसी मनी लॉन्ड्रिंग एंगल की गहराई से पड़ताल कर रही है। माना जा रहा है कि विदेशी निवेश के नाम पर बड़ी मात्रा में पैसा भारत लाया गया और उसे अलग-अलग कारोबारी प्रोजेक्ट्स में लगाया गया।

ED की कार्रवाई सिर्फ संजीव अरोड़ा तक सीमित नहीं रही। एजेंसी ने उनके करीबी सहयोगियों हेमंत सूद और चंद्रशेखर अग्रवाल के ठिकानों पर भी छापेमारी की। हेमंत सूद पर आरोप है कि उनकी कंपनियां फाइनेंशियल इन्वेस्टमेंट और स्टॉक ब्रोकिंग के नाम पर संदिग्ध लेनदेन में शामिल थीं। उनका कारोबार लुधियाना, गुरुग्राम और गुजरात के GIFT सिटी तक फैला हुआ बताया जा रहा है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि कहीं इन कंपनियों का इस्तेमाल हवाला के जरिए आए पैसों को वैध निवेश दिखाने के लिए तो नहीं किया गया।

वहीं कारोबारी चंद्रशेखर अग्रवाल का नाम कथित क्रिकेट सट्टेबाजी और हवाला नेटवर्क से जोड़ा जा रहा है। सूत्रों का दावा है कि उन्होंने ऑनलाइन बेटिंग नेटवर्क के जरिए करोड़ों रुपये का अवैध कारोबार खड़ा किया। जांच में “Khiladi Book” नाम के ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का भी जिक्र सामने आया है, जिसके जरिए कथित तौर पर देशभर में लोगों को सट्टेबाजी में जोड़ा गया और बाद में पैसा विदेश भेजा गया। ED अब इस प्लेटफॉर्म से जुड़े बैंक खातों, डिजिटल ट्रांजैक्शन और विदेशी कनेक्शन की जांच कर रही है।

जांच एजेंसियों की नजर संजीव अरोड़ा की कंपनी Hampton Sky Realty Ltd पर भी है, जिसे पहले Ritesh Properties and Industries Ltd के नाम से जाना जाता था। यह कंपनी रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में सक्रिय रही है। ED को शक है कि कंपनी ने जमीनों के लैंड यूज़ में बदलाव और प्रोजेक्ट्स की कीमतों को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने जैसे तरीकों का इस्तेमाल किया। एजेंसी को यह भी संदेह है कि शेयर बाजार में कंपनी की वैल्यू बढ़ाने के लिए फर्जी बिक्री और निवेश दिखाए गए। इनसाइडर ट्रेडिंग के एंगल से भी मामले की जांच की जा रही है।

कंपनी के मौजूदा मैनेजिंग डायरेक्टर काव्य अरोड़ा, जो संजीव अरोड़ा के बेटे बताए जा रहे हैं, उनकी भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है। ED यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कंपनी के फैसलों और निवेश प्रक्रियाओं में उनकी क्या भूमिका रही और क्या उन्हें संदिग्ध लेनदेन की जानकारी थी।

सूत्रों के मुताबिक, जांच में UAE से भारत भेजे गए कथित काले धन के लिंक भी सामने आए हैं। एजेंसी को शक है कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) और हवाला चैनलों के जरिए पैसा भारत लाकर रियल एस्टेट कारोबार में लगाया गया। कुछ शेल कंपनियों और एंट्री ऑपरेटर्स के माध्यम से रकम को वैध दिखाने की कोशिश की गई। फर्जी GST कंपनियों, नकली एक्सपोर्ट बिलिंग और बनावटी खरीद-बिक्री के जरिए लेनदेन को छिपाने की भी आशंका जताई जा रही है।

इस पूरे मामले में राजनीतिक संरक्षण के एंगल की भी जांच हो रही है। ED यह पता लगाने में जुटी है कि क्या अवैध सट्टेबाजी और हवाला नेटवर्क को किसी प्रकार की राजनीतिक सुरक्षा दी जा रही थी। सूत्रों के अनुसार कुछ ऑपरेटर्स को बचाने के बदले आर्थिक लाभ लेने की आशंका भी जांच के घेरे में है। एजेंसी अब उन लोगों की पहचान करने में लगी है जो कथित तौर पर इस नेटवर्क को चलाने या संरक्षण देने में शामिल थे।

फिलहाल ED की कार्रवाई लगातार जारी है और कई इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, बैंक रिकॉर्ड, संपत्ति से जुड़े दस्तावेज और वित्तीय लेनदेन की फाइलें कब्जे में ली गई हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। राजनीतिक गलियारों में भी इस कार्रवाई को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं, क्योंकि मामला केवल वित्तीय अनियमितताओं तक सीमित नहीं बल्कि हवाला, विदेशी निवेश और ऑनलाइन सट्टेबाजी जैसे गंभीर आरोपों से जुड़ा हुआ है।

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