
देहरादून: उत्तराखंड कैडर के वरिष्ठ नौकरशाहों का केंद्र सरकार में प्रभाव लगातार बढ़ता जा रहा है। प्रतिनियुक्ति (Deputation) के माध्यम से राज्य के अनुभवी अधिकारियों को दिल्ली और अन्य महत्वपूर्ण केंद्रों पर बड़ी जिम्मेदारियां सौंपने का सिलसिला जारी है। ताजा घटनाक्रम में, केंद्र सरकार ने उत्तराखंड कैडर के 2003 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी सचिन कुर्वे को चेन्नई पोर्ट अथॉरिटी का नया चेयरपर्सन नियुक्त किया है। इसके साथ ही, पहले से केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर तैनात आईएएस सेंथिल पांडियन को भी पेयजल विभाग में संयुक्त सचिव जैसी महत्वपूर्ण भूमिका दी गई है।
सचिन कुर्वे: चेन्नई पोर्ट अथॉरिटी की कमान अब उत्तराखंड के हाथ
अपॉइंटमेंट्स कमिटी ऑफ द कैबिनेट (ACC) द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, सचिन कुर्वे को चेन्नई पोर्ट अथॉरिटी में जॉइंट सेक्रेटरी स्तर के चेयरपर्सन पद पर तैनात किया गया है। यह नियुक्ति पांच वर्ष की अवधि के लिए की गई है। केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DOPT) ने स्पष्ट किया है कि उनकी यह तैनाती पदभार ग्रहण करने की तिथि से प्रभावी होगी।
सचिन कुर्वे को पे लेवल-14 के तहत यह जिम्मेदारी मिली है, जहाँ वे तमिलनाडु कैडर के आईएएस अधिकारी सुनील पालीवाल का स्थान लेंगे। चेन्नई पोर्ट अथॉरिटी भारत के सबसे पुराने और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण समुद्री बंदरगाहों में से एक है। ऐसे में सचिन कुर्वे की वहां नियुक्ति न केवल उनके व्यक्तिगत करियर के लिए, बल्कि उत्तराखंड कैडर की प्रशासनिक साख के लिए भी बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
उत्तराखंड शासन में रिक्त होंगे महत्वपूर्ण पद
वर्तमान में सचिन कुर्वे उत्तराखंड सरकार में स्वास्थ्य विभाग और नागरिक उड्डयन जैसे अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण विभागों की कमान संभाल रहे थे। चारधाम यात्रा के पीक सीजन के दौरान उनके प्रतिनियुक्ति पर जाने के आदेश से शासन में हलचल तेज हो गई है। अब सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती जल्द से जल्द नए स्वास्थ्य और उड्डयन सचिव की तैनाती करना है, ताकि चारधाम यात्रा और राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं पर कोई विपरीत प्रभाव न पड़े।
सेंथिल पांडियन को पेयजल विभाग की जिम्मेदारी
इसी कड़ी में उत्तराखंड कैडर के एक और तेजतर्रार अधिकारी सेंथिल पांडियन का नाम भी सुर्खियों में है। केंद्र सरकार में उनकी प्रतिनियुक्ति अवधि को दो वर्ष का विस्तार देते हुए अब उन्हें भारत सरकार के पेयजल विभाग में संयुक्त सचिव नियुक्त किया गया है। पांडियन को जटिल परियोजनाओं के कुशल प्रबंधन के लिए जाना जाता है, और केंद्र में उनकी नई भूमिका जल जीवन मिशन जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं के क्रियान्वयन में अहम साबित हो सकती है।
प्रशासनिक फेरबदल की आहट: सविन बंसल और वंदना भी कतार में
इन नियुक्तियों के बाद उत्तराखंड के प्रशासनिक गलियारों में व्यापक फेरबदल की चर्चाएं जोरों पर हैं। उत्तराखंड आईएएस प्रतिनियुक्ति का यह दौर यहीं थमता नजर नहीं आ रहा है। शासन से प्राप्त जानकारी के अनुसार, राज्य सरकार ने कुछ अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को भी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) दे दिया है।
इनमें देहरादून के मौजूदा जिलाधिकारी सविन बंसल और आईएएस अधिकारी वंदना का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है। यदि इन अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति प्रक्रिया पूरी होती है, तो आने वाले हफ्तों में उत्तराखंड में बड़े स्तर पर जिलाधिकारियों और सचिवों के कार्यक्षेत्र में बदलाव देखने को मिल सकता है।
विशेषज्ञों की राय: अनुभव का लाभ या नेतृत्व की कमी?
प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तराखंड कैडर के अधिकारियों का केंद्र में जाना राज्य के लिए गर्व की बात है, क्योंकि इससे भविष्य में केंद्र और राज्य के बीच समन्वय बेहतर होता है। हालांकि, एक साथ कई वरिष्ठ अधिकारियों के जाने से राज्य के भीतर ‘लीडरशिप वैक्यूम’ पैदा होने का खतरा भी रहता है। खासकर जब राज्य में चारधाम यात्रा और मानसून से जुड़ी तैयारियां चल रही हों।
केंद्र सरकार द्वारा सचिन कुर्वे और सेंथिल पांडियन को दी गई नई जिम्मेदारियां यह दर्शाती हैं कि उत्तराखंड के अधिकारियों की कार्यक्षमता और अनुभव पर दिल्ली का भरोसा बढ़ा है। अब सबकी नजरें मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और मुख्य सचिव पर टिकी हैं कि वे स्वास्थ्य, उड्डयन और जिला प्रशासन के इन रिक्त होने वाले पदों पर किन नए चेहरों को मौका देते हैं। आने वाले कुछ दिन उत्तराखंड की नौकरशाही के लिए बड़े बदलावों वाले साबित होंगे।



