
फिल्म इंडस्ट्री में ग्लैमर और चमक-दमक के पीछे कई ऐसे कड़वे सच भी छिपे होते हैं, जिनके बारे में कलाकार अक्सर खुलकर बात नहीं कर पाते। अब बॉलीवुड अभिनेता दिव्येंदु भट्टाचार्य ने इंडस्ट्री में मौजूद रंगभेद यानी स्किन कलर के आधार पर होने वाले भेदभाव को लेकर बड़ा खुलासा किया है। आमिर खान की फिल्म मंगल पांडे: द राइजिंग में नजर आ चुके दिव्येंदु ने बताया कि उन्हें सिर्फ उनके सांवले रंग की वजह से एक विज्ञापन से बाहर कर दिया गया था।
हाल ही में दिए गए एक इंटरव्यू में दिव्येंदु भट्टाचार्य ने बॉलीवुड में मौजूद रेसिज्म पर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि यह समस्या नई नहीं है, बल्कि इंडस्ट्री में काफी गहराई तक जड़ें जमा चुकी है। अभिनेता ने एक ताजा घटना का जिक्र करते हुए बताया कि एक ऐड फिल्म के लिए उन्हें कास्ट किया गया था और कई दिनों तक बातचीत चलती रही। शूटिंग शुरू होने से ठीक पहले उन्हें अचानक फोन कर बताया गया कि अब उनकी जरूरत नहीं है।
दिव्येंदु ने बताया कि उन्होंने खुद प्रोडक्शन टीम से संपर्क कर शूटिंग के बारे में पूछा था। इसके बाद उन्हें जो जवाब मिला, उसने उन्हें हैरान कर दिया। अभिनेता के मुताबिक, फोन पर साफ शब्दों में कहा गया कि उन्हें इसलिए रिप्लेस किया गया क्योंकि “आप काले हो और काला एक्टर नहीं चाहिए।”
हालांकि दिव्येंदु ने कहा कि व्यक्तिगत तौर पर वह इस टिप्पणी से ज्यादा प्रभावित नहीं हुए क्योंकि वह अपनी पहचान और अपने रंग को लेकर पूरी तरह सहज हैं। लेकिन उन्होंने इस घटना को समाज और इंडस्ट्री की सोच का गंभीर उदाहरण बताया। उनके मुताबिक, यह सिर्फ एक व्यक्ति का अनुभव नहीं है बल्कि एक बड़ी सामाजिक समस्या का हिस्सा है, जो बचपन से लोगों की सोच में बैठा दी जाती है।
अभिनेता ने कहा कि भारत में बच्चों को शुरुआती शिक्षा के दौरान सामाजिक नैतिकता, समानता और संवेदनशीलता जैसी चीजें सही तरीके से नहीं सिखाई जातीं। यही वजह है कि बड़े होने के बाद भी लोग रंग, जाति और बाहरी दिखावे के आधार पर दूसरों को आंकते हैं। उन्होंने जापान और कोरिया जैसे देशों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां बच्चों को छोटी उम्र से ही अनुशासन, सम्मान और सहानुभूति की शिक्षा दी जाती है, जिससे समाज में भेदभाव कम देखने को मिलता है।
दिव्येंदु भट्टाचार्य ने यह भी कहा कि भारत में अक्सर अच्छी परवरिश और सही संस्कार की जिम्मेदारी सिर्फ परिवारों पर छोड़ दी जाती है। अगर घर का माहौल अच्छा हो तो बच्चा संवेदनशील बन सकता है, लेकिन पूरे समाज और शिक्षा व्यवस्था की भी इसमें बड़ी भूमिका होती है। उन्होंने माना कि जब तक सोच नहीं बदलेगी, तब तक रंगभेद जैसी समस्याएं खत्म होना मुश्किल है।
बॉलीवुड और मनोरंजन इंडस्ट्री में रंगभेद का मुद्दा पहले भी कई बार उठ चुका है। कई कलाकारों ने इस बात को स्वीकार किया है कि स्क्रीन पर “फेयर लुक” को ज्यादा महत्व दिया जाता है। लंबे समय तक विज्ञापनों और फिल्मों में गोरे रंग को सुंदरता का पैमाना मानकर पेश किया जाता रहा है। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में इस सोच को लेकर बहस तेज हुई है और कई सितारे इसके खिलाफ आवाज उठा चुके हैं।
दिव्येंदु भट्टाचार्य अपने दमदार अभिनय के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने फिल्मों के साथ-साथ वेब सीरीज की दुनिया में भी अपनी अलग पहचान बनाई है। वह जामताड़ा, अनदेखी और मामला लीगल है जैसे लोकप्रिय शोज में नजर आ चुके हैं। उनकी एक्टिंग को दर्शकों और क्रिटिक्स दोनों ने काफी सराहा है।
हाल ही में दिव्येंदु को अनदेखी सीजन 4 में देखा गया, जो 1 मई को रिलीज हुई थी। इस सीरीज में हर्ष छाया, सूर्या शर्मा, अंकुर राठी और गौतम रोडे भी अहम भूमिकाओं में हैं। इससे पहले वह नेटफ्लिक्स की चर्चित सीरीज मामला लीगल है 2 में दिखाई दिए थे, जिसमें रवि किशन समेत कई कलाकारों ने काम किया था।
दिव्येंदु का यह बयान सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बन गया है। कई लोग उनके समर्थन में सामने आए हैं और इंडस्ट्री में रंगभेद की मानसिकता पर सवाल उठा रहे हैं। यह मामला एक बार फिर इस बहस को तेज कर रहा है कि क्या आज भी बॉलीवुड में प्रतिभा से ज्यादा रंग-रूप को महत्व दिया जाता है। अभिनेता की बातों ने यह साफ कर दिया है कि आधुनिक और प्रगतिशील दिखने वाली फिल्म इंडस्ट्री के भीतर अब भी कई पुरानी सोच मौजूद हैं, जिन्हें बदलने की जरूरत है।



