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नेपाल कस्टम संकट: भारत से आयातित सामान पर MRP का पेच, बॉर्डर पर ट्रकों की कतारें और सरकार का ‘प्लान-B’

The Hill India News
Last updated: May 7, 2026 3:08 am
The Hill India News
Published: May 7, 2026
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काठमांडू/बीरगंज: भारत और नेपाल के बीच सदियों पुराने व्यापारिक संबंधों में इन दिनों एक नई प्रशासनिक चुनौती ने तनाव पैदा कर दिया है। नेपाल सरकार द्वारा हाल ही में आयातित सामानों पर अनिवार्य अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) लेबलिंग और 100 नेपाली रुपए से अधिक के सामान पर सीमा शुल्क (Custom Duty) लगाने के फैसले ने जमीनी स्तर पर एक बड़ा संकट खड़ा कर दिया है।

Contents
संकटमोचक बना सरकार का ‘नया प्लान’: स्व-घोषणा का फॉर्मूलाक्यों लगा ट्रकों का अंबार? तकनीकी और प्रशासनिक उलझनेंआयातकों को देनी होगी विस्तृत जानकारीआर्थिक संतुलन की चुनौती

28 अप्रैल से लागू हुए इस नियम के तहत, भारत से आने वाले हर उस सामान पर कस्टम ड्यूटी वसूलने का प्रावधान है जिसकी कीमत 100 नेपाली रुपए से अधिक है। लेकिन पेच यह फंसा कि कस्टम क्लीयरेंस के लिए हर सामान पर पहले से MRP अंकित होना अनिवार्य कर दिया गया। इस सख्त रुख के कारण भारत-नेपाल के प्रमुख बॉर्डर पॉइंट्स पर हजारों ट्रक पिछले कई दिनों से खड़े हैं, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक आवाजाही लगभग ठप पड़ गई है।


संकटमोचक बना सरकार का ‘नया प्लान’: स्व-घोषणा का फॉर्मूला

सीमा पर फंसे सैकड़ों मालवाहक ट्रकों और व्यापारियों के बढ़ते दबाव के बीच नेपाल के कस्टम विभाग ने अब एक ‘मिडिल पाथ’ यानी बीच का रास्ता निकाला है। नेपाली मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, विभाग ने अब “स्व-घोषणा और प्रतिबद्धता” (Self-Declaration and Commitment) के आधार पर सामान को कस्टम से छोड़ने का फैसला किया है।

इस नई व्यवस्था के तहत, आयातक व्यापारियों को एक विशेष प्रतिबद्धता पत्र भरकर देना होगा, जिसमें तीन मुख्य शर्तें शामिल हैं:

  1. औद्योगिक और मशीनरी सामान को छूट: यदि आयात किया जाने वाला सामान औद्योगिक कच्चा माल, जल्दी खराब होने वाली वस्तुएं (Perishables) या भारी मशीनरी है, तो बिना लेबल के भी उसकी घोषित कीमत के आधार पर क्लीयरेंस मिल सकेगी।

  2. बाजार में जाने से पहले लेबलिंग: व्यापारियों को यह लिखित गारंटी देनी होगी कि कस्टम से सामान बाहर ले जाने के बाद, उसे बाजार में वितरण या बिक्री के लिए भेजने से पहले उस पर उचित MRP लेबल लगा दिया जाएगा।

  3. कानूनी कार्रवाई की चेतावनी: यदि कोई व्यापारी बिना लेबल के बाजार में सामान बेचते हुए पाया जाता है, तो उसे नेपाल के मौजूदा कानूनों और निर्देशों के अनुसार सख्त कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।


क्यों लगा ट्रकों का अंबार? तकनीकी और प्रशासनिक उलझनें

नेपाल सरकार ने 15 अप्रैल से ही बिना MRP वाले सामान के आयात पर सख्ती बरतनी शुरू कर दी थी। सरकार का तर्क है कि इससे राजस्व में पारदर्शिता आएगी और बाजार में सामान की कीमतों पर नियंत्रण रहेगा। हालांकि, व्यापारियों का कहना है कि अचानक लागू किए गए इस नियम के लिए वे तैयार नहीं थे। भारत से आने वाले कई छोटे और मध्यम स्तर के सामानों पर मैन्युफैक्चरिंग के समय नेपाली रुपए में MRP अंकित नहीं होती, जिससे कस्टम अधिकारी उन्हें क्लीयरेंस देने से इनकार कर रहे थे।

इससे पहले 16 अप्रैल को भी विभाग ने कुछ लचीलापन दिखाने की कोशिश की थी, लेकिन प्रधानमंत्री कार्यालय की असहमति के कारण मामला और अधिक पेचीदा हो गया था। अब बालेन सरकार के इस नए निर्देश के बाद बीरगंज, भैरहवा और काकड़भिट्टा जैसे प्रमुख व्यापारिक केंद्रों पर फंसे ट्रकों के निकलने की उम्मीद जगी है।


आयातकों को देनी होगी विस्तृत जानकारी

नई स्व-घोषणा व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए, आयातकों को अपने पत्र में सामान का नाम, ब्रांड, मॉडल, मात्रा, इनवॉइस (Invoice) की वास्तविक कीमत और खुद द्वारा घोषित MRP की पूरी जानकारी देनी होगी। इससे सरकार के पास डेटा रहेगा कि किस व्यापारी ने कितना सामान और किस कीमत पर बाजार में उतारा है।


आर्थिक संतुलन की चुनौती

नेपाल सरकार का यह कदम राजस्व बढ़ाने की दिशा में एक साहसिक प्रयास हो सकता है, लेकिन जमीनी हकीकत को नजरअंदाज करना अर्थव्यवस्था के लिए घातक साबित हो सकता है। भारत नेपाल का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, और ऐसी किसी भी सख्ती से पहले एक सुचारू ‘ट्रांजिशन पीरियड’ दिया जाना आवश्यक था। ‘स्व-घोषणा’ का नया नियम फिलहाल के लिए एक मरहम जैसा है, लेकिन दीर्घकालिक समाधान के लिए दोनों देशों के व्यापारिक संगठनों और कस्टम विभागों के बीच तकनीकी समन्वय की सख्त जरूरत है।

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