
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने राज्य की राजनीति की तस्वीर पूरी तरह बदल दी है। करीब 15 वर्षों तक सत्ता में रही तृणमूल कांग्रेस (TMC) को इस बार करारी हार का सामना करना पड़ा है, जबकि भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए बहुमत से कहीं आगे निकलकर सरकार बनाने का रास्ता साफ कर लिया है। सबसे ज्यादा चर्चा राजारहाट न्यू टाउन विधानसभा सीट की हो रही है, जहां आखिरी राउंड तक मुकाबला बेहद कांटे का रहा और अंत में बीजेपी ने सिर्फ 309 वोटों से जीत दर्ज कर ली।
राजारहाट न्यू टाउन सीट पर मतगणना लगभग 30 घंटे तक चली। शुरुआती राउंड से लेकर 17वें राउंड तक टीएमसी उम्मीदवार तापस चटर्जी बढ़त बनाए हुए थे। 17वें राउंड के बाद तापस चटर्जी करीब 323 वोटों से आगे चल रहे थे और ऐसा लग रहा था कि यह सीट टीएमसी के खाते में जाएगी। लेकिन 18वें और अंतिम राउंड में पूरा खेल बदल गया। बीजेपी प्रत्याशी पीयूष कनोडिया ने अंतिम राउंड में शानदार बढ़त हासिल करते हुए लगभग 600 अतिरिक्त वोट जुटाए और अंततः 309 वोटों से चुनाव जीत लिया।
चुनाव आयोग के अनुसार, बीजेपी उम्मीदवार पीयूष कनोडिया को कुल 1,06,564 वोट मिले, जबकि टीएमसी उम्मीदवार तापस चटर्जी को 1,06,255 वोट प्राप्त हुए। इस बेहद करीबी मुकाबले ने बंगाल चुनाव की रोमांचक तस्वीर को और ज्यादा दिलचस्प बना दिया है। बीजेपी समर्थकों ने इस जीत को “आखिरी राउंड का चमत्कार” बताया, जबकि टीएमसी कार्यकर्ताओं ने मतगणना प्रक्रिया पर सवाल भी उठाए हैं।
पूरे पश्चिम बंगाल की बात करें तो बीजेपी ने इस चुनाव में जबरदस्त प्रदर्शन किया है। 294 सीटों वाली विधानसभा में 293 सीटों के परिणाम घोषित हो चुके हैं और बीजेपी ने 207 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया है। वहीं, पिछले चुनाव में 215 सीटें जीतने वाली तृणमूल कांग्रेस इस बार सिर्फ 80 सीटों पर सिमट गई। कांग्रेस को 2 सीटें मिली हैं, जबकि सीपीएम और इंडियन सेकुलर फ्रंट को 1-1 सीट पर जीत हासिल हुई है। आम जनता उन्नयन पार्टी के नेता हुमायूं कबीर ने भी दो सीटों पर जीत दर्ज कर राजनीतिक हलकों में चर्चा बटोरी है।
एक सीट फालता विधानसभा क्षेत्र की है, जहां चुनाव आयोग ने दोबारा मतदान कराने का फैसला किया है। वहां 23 मई को वोटिंग होगी। हालांकि इस सीट का परिणाम सरकार के गठन पर कोई असर नहीं डालेगा क्योंकि बीजेपी पहले ही बहुमत के आंकड़े से काफी आगे निकल चुकी है।
इस चुनाव का सबसे बड़ा झटका मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को लगा है। भवानीपुर सीट, जिसे टीएमसी का मजबूत गढ़ माना जाता था, वहां बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को लगभग 15 हजार वोटों से हरा दिया। शुभेंदु अधिकारी को 73,917 वोट मिले, जबकि ममता बनर्जी को 58,812 वोटों से संतोष करना पड़ा। यह हार सिर्फ एक सीट की हार नहीं मानी जा रही, बल्कि बंगाल की राजनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत मानी जा रही है।
बीजेपी की जीत के बाद अब मुख्यमंत्री पद को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। पार्टी ने 8 मई को विधायक दल की बैठक बुलाई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को बंगाल का पर्यवेक्षक बनाया गया है, जबकि ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी को सह-पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया है। माना जा रहा है कि 9 मई को नई सरकार का शपथ ग्रहण हो सकता है।
मुख्यमंत्री पद की दौड़ में कई बड़े नाम सामने आ रहे हैं। इनमें नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी, विधायक अग्निमित्रा पॉल, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष और अभिनेत्री से नेता बनीं रूपाली गांगुली के नाम चर्चा में हैं। हालांकि अंतिम फैसला बीजेपी आलाकमान द्वारा विधायक दल की बैठक के बाद लिया जाएगा।
बंगाल चुनाव 2026 ने यह साफ कर दिया है कि राज्य की राजनीति अब एक नए दौर में प्रवेश कर चुकी है। राजारहाट न्यू टाउन जैसी सीटों पर आखिरी राउंड तक चले रोमांचक मुकाबले ने चुनाव को ऐतिहासिक बना दिया है। बीजेपी जहां इसे “परिवर्तन की जीत” बता रही है, वहीं टीएमसी के लिए यह परिणाम आत्ममंथन का बड़ा कारण बन गया है।



