
राजधानी दिल्ली में नकली नोटों के जरिए बड़ी ठगी करने वाले एक शातिर गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। उत्तर दिल्ली के सराय रोहिल्ला इलाके में ग्लास कारोबारी को 25 लाख रुपये की चपत लगाने वाले आरोपियों को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। यह मामला केवल एक कारोबारी से ठगी का नहीं, बल्कि बाजार में नकली करेंसी फैलाने की एक बड़ी साजिश से जुड़ा माना जा रहा है। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क के मास्टरमाइंड और नकली नोट छापने वाले ठिकानों की तलाश में जुट गई है।
जानकारी के मुताबिक, आरोपियों ने खुद को बड़े व्यापारी के रूप में पेश किया और एक ग्लास कारोबारी से करीब 28 लाख रुपये के माल का ऑर्डर दिया। बातचीत और डीलिंग इतनी पेशेवर तरीके से की गई कि कारोबारी को किसी तरह का शक नहीं हुआ। जब भुगतान का समय आया, तो आरोपियों ने कारोबारी को सीलबंद पैकेट सौंपे। पैकेट देखने में बिल्कुल असली बैंक कैश बंडलों जैसे लग रहे थे।
लेकिन असल खेल पैकेट के अंदर था। ऊपर और नीचे असली नोट लगाए गए थे, जबकि बीच में बड़ी संख्या में नकली नोट रखे गए थे। पहली नजर में यह रकम पूरी तरह असली दिखाई दे रही थी। कारोबारी जब पैसों की जांच करने लगा तो उसे कुछ नोटों पर शक हुआ। ध्यान से देखने पर पता चला कि कई नोट नकली हैं। इसके बाद कारोबारी ने समझदारी दिखाते हुए तुरंत पुलिस को सूचना दी।
दिल्ली पुलिस ने शिकायत मिलते ही तेजी से कार्रवाई की। पुलिस ने कारोबारी के साथ मिलकर जाल बिछाया और आरोपियों को दोबारा मिलने के लिए बुलाया गया। जैसे ही आरोपी तय जगह पर पहुंचे, पुलिस टीम ने उन्हें घेरकर गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी शास्त्री नगर मेट्रो स्टेशन के पास से की गई। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से नकली नोटों की गड्डियां और अन्य संदिग्ध सामान भी बरामद किया है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह गिरोह काफी समय से इसी तरह की वारदातों को अंजाम दे रहा था। आरोपी बड़े व्यापारिक सौदों का झांसा देकर नकद भुगतान करते थे और असली नोटों के बीच नकली नोट फंसाकर करोड़ों की ठगी करने की कोशिश करते थे। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह का मकसद केवल व्यापारियों को चूना लगाना नहीं था, बल्कि बाजार में बड़ी मात्रा में फेक करेंसी फैलाना भी था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली पुलिस की स्पेशल टीम अब इस नेटवर्क के बाकी सदस्यों की तलाश कर रही है। पुलिस को शक है कि इस गिरोह के तार दूसरे राज्यों से भी जुड़े हो सकते हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि नकली नोट कहां छापे जा रहे थे और इसके पीछे कौन लोग शामिल हैं।
बरामद नोटों को फोरेंसिक जांच के लिए लैब भेजा जाएगा। विशेषज्ञ यह जांच करेंगे कि नकली नोटों को तैयार करने के लिए किस तरह की प्रिंटिंग तकनीक, स्याही और कागज का इस्तेमाल किया गया। अगर नोट उच्च गुणवत्ता वाले पाए जाते हैं, तो यह मामला और भी गंभीर हो सकता है क्योंकि ऐसे नोट आम लोगों और छोटे व्यापारियों के लिए पहचानना मुश्किल होता है।
इस घटना ने दिल्ली के व्यापारिक समुदाय में चिंता बढ़ा दी है। कारोबारी संगठनों का कहना है कि अब अपराधी सीधे लूटपाट की बजाय भरोसे का फायदा उठाकर आर्थिक अपराध कर रहे हैं। नकली नोटों का कारोबार न केवल व्यापारियों को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था और वित्तीय व्यवस्था के लिए भी खतरा बनता जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े नकद लेनदेन के दौरान व्यापारियों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए। नोट गिनने की मशीन, यूवी स्कैनर और बैंक वेरिफिकेशन जैसी सुविधाओं का इस्तेमाल जरूरी हो गया है। किसी भी संदिग्ध लेनदेन की जानकारी तुरंत पुलिस या संबंधित एजेंसी को देनी चाहिए।
दिल्ली पुलिस ने व्यापारियों और आम लोगों से अपील की है कि वे नकद भुगतान लेते समय हर नोट की जांच करें। खासकर बड़ी रकम के लेनदेन में जल्दबाजी न करें। पुलिस का कहना है कि आरोपियों के खिलाफ जालसाजी, धोखाधड़ी और नकली नोटों के संचलन से जुड़ी गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। आने वाले दिनों में इस मामले में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि अपराधी अब तकनीक और चालाकी के जरिए लोगों को निशाना बना रहे हैं। ऐसे में सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।



