धर्मनगरी हरिद्वार अपनी धार्मिक मान्यताओं और आस्था के लिए पूरी दुनिया में जानी जाती है। यहाँ के विभिन्न घाटों पर प्रतिदिन लाखों श्रद्धालु मां गंगा के दर्शन और स्नान के लिए आते हैं। लेकिन हाल ही में एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने लोगों की धार्मिक भावनाओं को आहत किया है। हरिद्वार के प्रसिद्ध सर्वानंद घाट पर एक महिला द्वारा अपने पालतू कुत्ते को गंगा में नहलाने का मामला प्रकाश में आया है। इस घटना के बाद घाट पर मौजूद स्थानीय लोगों और तीर्थ पुरोहितों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।
क्या है पूरा मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, हरिद्वार के सर्वानंद घाट पर यात्रियों का एक दल पहुंचा था। इसी दल में शामिल एक महिला अपने पालतू कुत्ते को लेकर गंगा में उतर गई और उसे नहलाने लगी। इस कृत्य को देखकर घाट पर मौजूद अन्य श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को गहरा धक्का लगा।
जब स्थानीय लोगों और पुजारियों ने महिला को ऐसा करने से रोका और अपनी आपत्ति जताई, तो महिला ने अपनी गलती मानने के बजाय उल्टा स्थानीय लोगों के साथ बहस शुरू कर दी। हालांकि, विवाद बढ़ता देख और स्थानीय लोगों के कड़े विरोध के बाद, महिला के परिजनों ने उसे शांत कराया और वे कुत्ते को लेकर वहां से तुरंत रवाना हो गए, जिससे स्थिति और अधिक बिगड़ने से बच गई।
वीडियो वायरल होने पर सोशल मीडिया में उबाल
यह पूरी घटना किसी ने अपने मोबाइल फोन के कैमरे में कैद कर ली, जो अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) और अन्य माध्यमों पर तेजी से वायरल हो रही है। वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि महिला कैसे गंगाजल में अपने पालतू कुत्ते को नहला रही है।
हालांकि, कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने वीडियो अपलोड करते समय सर्वानंद घाट को श्रद्धानंद घाट लिख दिया है, लेकिन स्थान चाहे जो भी हो, इस कृत्य की हर तरफ आलोचना हो रही है। लोग सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं और मांग कर रहे हैं कि मां गंगा की पवित्रता और निर्मलता को बनाए रखने के लिए ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाने चाहिए।
तीर्थ पुरोहितों की कड़ी प्रतिक्रिया
इस पूरे मामले पर हरिद्वार के जाने-माने तीर्थ पुरोहित उज्जवल पंडित ने कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति में मां गंगा को मोक्षदायिनी और पूजनीय माना गया है। उन्होंने कहा:
“इस तरह की घटनाएं केवल इसलिए होती हैं क्योंकि लोगों के पास अपनी संस्कृति और धार्मिक मान्यताओं का अधूरा ज्ञान होता है। मां गंगा को सभी लोग पूजनीय मानते हैं और यह भावनात्मक रूप से बिल्कुल सही नहीं है। सभी को गंगा की गरिमा और पवित्रता का सम्मान करना चाहिए।”
तीर्थ पुरोहितों का मानना है कि इस तरह के कृत्यों से करोड़ों हिंदुओं की आस्था को ठेस पहुंचती है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।
लगातार उठ रहे हैं गंगा की निर्मलता पर सवाल
यह कोई पहला मामला नहीं है जब मां गंगा की निर्मलता और अविरलता के साथ खिलवाड़ करने जैसी घटना सामने आई हो। इससे पहले भी कई बार पर्यटकों और बाहरी लोगों द्वारा घाटों की मर्यादा को ताक पर रखकर ऐसे कार्य किए गए हैं। ऐसे मामलों में प्रशासन और स्थानीय पुलिस की भूमिका भी अक्सर चर्चा में रहती है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि घाटों पर इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए सख्त निगरानी होनी चाहिए और यदि कोई व्यक्ति इस प्रकार की हरकत करता है, तो उसके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए।
धार्मिक नगरी हरिद्वार में गंगा की पवित्रता को बनाए रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। प्रशासन और पुलिस को भी इन घटनाओं से सबक लेते हुए घाटों पर जागरूकता अभियान चलाने चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।



