नई दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अपनी स्थापना के 70 वर्ष पूरे कर लिए हैं। इस ऐतिहासिक अवसर पर, एजेंसी के निदेशक राहुल नवीन ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) की उपलब्धियों, चुनौतियों और भविष्य की रणनीतियों का विस्तृत ब्यौरा पेश किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह अवसर केवल जश्न मनाने का नहीं, बल्कि भविष्य के खतरों से निपटने की तैयारी का है।
इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी, राजस्व विभाग के सचिव अरविंद श्रीवास्तव और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस. वी. राजू सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
बदलते अपराधों के साथ एजेंसी का बदलता फोकस
ईडी के निदेशक ने अपने संबोधन में बताया कि बीते वर्षों में आर्थिक अपराधों की प्रकृति में व्यापक बदलाव आया है। पहले जहाँ एजेंसी का मुख्य फोकस बैंक फ्रॉड, कॉर्पोरेट घोटालों और रियल एस्टेट धोखाधड़ी पर केंद्रित था, वहीं अब नई चुनौतियाँ जैसे क्रिप्टो धोखाधड़ी, डिजिटल अरेस्ट, साइबर क्राइम और आतंकवाद की फंडिंग के मामले सामने आ रहे हैं।
इन नई चुनौतियों से निपटने के लिए, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अपनी कार्यशैली को आधुनिक बनाया है। खासतौर पर नारकोटिक्स नेटवर्क की वित्तीय रीढ़ को तोड़ने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। राहुल नवीन ने रेड फोर्ट ब्लास्ट केस का हवाला देते हुए कहा कि आतंकवाद और जासूसी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में एजेंसी पूरी सख्ती के साथ जांच कर रही है।
रिकॉर्ड कार्रवाई और कनविक्शन रेट
वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अभूतपूर्व कार्रवाई की है। प्राप्त आंकड़ों के अनुसार:
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इस वित्त वर्ष में कुल 812 चार्जशीट (जिसमें 155 सप्लीमेंट्री शिकायतें शामिल हैं) दाखिल की गईं, जो पिछले वर्ष के मुकाबले लगभग दोगुनी हैं।
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वर्तमान में एजेंसी का कनविक्शन रेट 94 प्रतिशत है, जो भारत की आपराधिक न्याय प्रणाली में एक बहुत मजबूत रिकॉर्ड माना जाता है।
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अदालतों में 2,400 से अधिक मामले लंबित हैं, जिन पर जल्द ही फैसलों की उम्मीद की जा रही है।
संपत्ति की जब्ती और पीड़ितों को न्याय
ईडी की कार्रवाई का दायरा केवल अपराधियों को सजा दिलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि आम नागरिकों और संस्थाओं के पैसे को वापस दिलाने पर भी है।
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कुल अटैच की गई संपत्ति: 31 मार्च 2026 तक कुल 2,36,017 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति अटैच की जा चुकी है।
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केवल पिछले वित्त वर्ष में 81,422 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई, जो पिछले वर्ष की तुलना में 170 प्रतिशत अधिक है।
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पीड़ितों को राहत: अब तक 63,142 करोड़ रुपये बैंकों, निवेशकों और होमबायर्स जैसे पीड़ितों को लौटाए जा चुके हैं।
इसके उदाहरण के तौर पर, पीएसीएल (PACL) लिमिटेड घोटाले में 15,581 करोड़ रुपये निवेशकों को वापस किए गए, और उदयपुर के एक रियल एस्टेट मामले में 200 से अधिक होमबायर्स को उनका हक दिलाया गया।
भगोड़े आर्थिक अपराधियों पर सख्त शिकंजा
भगोड़े आर्थिक अपराधियों (FEOA) के खिलाफ भी एजेंसी ने अपना शिकंजा कसना जारी रखा है। अब तक 54 लोगों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की जा चुकी है, जिनमें से 21 को भगोड़ा घोषित किया जा चुका है और 2,178 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई है।
इसके साथ ही, एजेंसी का वैश्विक स्तर पर भी दबदबा बढ़ रहा है। भारत वर्तमान में ARIN-AP (एशिया-प्रशांत एसेट रिकवरी नेटवर्क) के स्टीयरिंग ग्रुप की अध्यक्षता कर रहा है। वर्ष 2026 में इसकी वार्षिक आम बैठक (AGM) और 2028 में ‘ग्लोब’ (Globe) प्लेनरी की मेजबानी भी भारत द्वारा की जाएगी।
पारदर्शिता और ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति
केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने अपने संबोधन में कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) को मिली शक्तियों का उपयोग किसी को निशाना बनाने के लिए नहीं, बल्कि देश के आर्थिक तंत्र को भ्रष्टाचार से बचाने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आर्थिक अपराध देश के लिए कैंसर की तरह हैं।
उन्होंने बढ़ते साइबर फ्रॉड और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए होने वाले अपराधों पर भी चिंता व्यक्त की। इस दिशा में पारदर्शिता लाने के लिए ईडी ने एक बड़ा कदम उठाया है: अब समन की सत्यता जांचने के लिए क्यूआर कोड (QR Code) सिस्टम लागू किया गया है, जिससे फर्जी समन के जरिए होने वाली धोखाधड़ी पर पूरी तरह लगाम लगेगी।
अपने 70 वर्षों के सफर में, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने देश की अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखने और आर्थिक अपराधियों के खिलाफ एक नई नज़ीर पेश की है। यह स्पष्ट है कि आने वाले समय में भी एजेंसी डिजिटल और अंतरराष्ट्रीय अपराधों के खिलाफ अपनी आक्रामक नीति को जारी रखेगी।



