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उत्तर प्रदेश: फर्रुखाबाद से क्यों नहीं जुड़ सका गंगा एक्सप्रेसवे? सांसद ने बताई तकनीकी वजह, लिंक एक्सप्रेसवे से जुड़ेगी उम्मीद

The Hill India News
Last updated: May 1, 2026 6:34 am
The Hill India News
Published: May 1, 2026
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फर्रुखाबाद: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 29 अप्रैल को 594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किए जाने के बाद उत्तर प्रदेश के कई जिलों में विकास और कनेक्टिविटी को लेकर नई उम्मीदें जगी हैं। मेरठ से प्रयागराज तक जाने वाला यह महत्वाकांक्षी एक्सप्रेसवे प्रदेश के 12 जिलों से होकर गुजरता है और कई अन्य जिलों को भी अप्रत्यक्ष रूप से जोड़ता है। लेकिन फर्रुखाबाद के लोगों में इस बात को लेकर नाराजगी और चर्चा तेज हो गई कि इतना बड़ा एक्सप्रेसवे जिले से होकर क्यों नहीं गुजरा। खासतौर पर तब, जब यह एक्सप्रेसवे फर्रुखाबाद से केवल 25 से 26 किलोमीटर की दूरी से गुजर रहा है।

सोशल मीडिया पर इसे लेकर कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कुछ लोगों ने इसे जिले की उपेक्षा बताया तो कुछ ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर सवाल उठाए। बढ़ती चर्चाओं और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच फर्रुखाबाद के बीजेपी सांसद मुकेश सिंह राजपूत सामने आए और उन्होंने मीडिया से बातचीत में पूरे मामले पर सफाई दी।

सांसद मुकेश राजपूत ने कहा कि गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन हरदोई जिले के मल्लावां क्षेत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया गया और इस ऐतिहासिक परियोजना में फर्रुखाबाद की भी भागीदारी रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ “अराजक तत्व” और विपक्षी दलों के कार्यकर्ता सोशल मीडिया पर भ्रम फैलाने का काम कर रहे हैं। सांसद ने कहा कि भाजपा कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो उचित नहीं है।

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में साफ कहा था कि डबल इंजन सरकार प्रदेश में लिंक एक्सप्रेसवे नेटवर्क को और मजबूत करेगी। इसी योजना के तहत एक नया लिंक एक्सप्रेसवे प्रस्तावित है, जो गंगा एक्सप्रेसवे और बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे को आपस में जोड़ेगा। यह लिंक एक्सप्रेसवे फर्रुखाबाद होकर गुजरने की संभावना है। सांसद के मुताबिक इस परियोजना की लंबाई लगभग 94 किलोमीटर होगी और इसकी अनुमानित लागत करीब 7600 करोड़ रुपये तय की गई है।

मुकेश राजपूत ने यह भी कहा कि गंगा एक्सप्रेसवे को सीधे फर्रुखाबाद से जोड़ने में तकनीकी समस्याएं सामने आई थीं। उन्होंने एनजीटी (राष्ट्रीय हरित अधिकरण) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि यह कोई सामान्य हाईवे परियोजना नहीं थी, बल्कि पर्यावरणीय और तकनीकी मानकों को ध्यान में रखते हुए इसका निर्माण किया गया है। कई क्षेत्रों में भूमि, पर्यावरणीय स्वीकृति और तकनीकी चुनौतियों के कारण एक्सप्रेसवे का रूट बदला गया, जिसकी वजह से फर्रुखाबाद सीधे तौर पर इससे नहीं जुड़ सका।

हालांकि उन्होंने भरोसा दिलाया कि प्रस्तावित लिंक एक्सप्रेसवे बनने के बाद फर्रुखाबाद की कनेक्टिविटी काफी मजबूत हो जाएगी और जिले को गंगा एक्सप्रेसवे का सीधा लाभ मिलने लगेगा। उन्होंने कहा कि अभी भी फर्रुखाबाद से गंगा एक्सप्रेसवे की दूरी ज्यादा नहीं है और आने वाले समय में सड़क नेटवर्क के विस्तार से लोगों को बेहतर सुविधा मिलेगी।

इस मुद्दे पर राजनीति भी तेज हो गई है। सांसद मुकेश राजपूत ने समाजवादी पार्टी पर हमला बोलते हुए कहा कि वर्ष 2012 से 2017 के बीच प्रदेश में सपा सरकार थी, लेकिन उस दौरान भी फर्रुखाबाद को लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे से नहीं जोड़ा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपने गृह क्षेत्र सैफई को प्राथमिकता दी और फर्रुखाबाद की अनदेखी की।

सांसद ने यह भी कहा कि भाजपा सरकार ने जिले में सड़क और आधारभूत संरचना को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण कार्य किए हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि रजीपुर-उधनपुर और नवाबगंज-हथियापुर जैसे मार्ग, जिन्हें पिछली सरकार में संकरा कर दिया गया था, उन्हें भाजपा सरकार ने 7 मीटर से 10 मीटर तक चौड़ा करने का काम किया है।

गंगा एक्सप्रेसवे को देश की सबसे बड़ी एक्सप्रेसवे परियोजनाओं में से एक माना जा रहा है। इसके पूरा होने से पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश के बीच यात्रा समय में भारी कमी आएगी। साथ ही औद्योगिक विकास, निवेश, पर्यटन और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। ऐसे में फर्रुखाबाद के लोग भी उम्मीद कर रहे हैं कि आने वाले समय में लिंक एक्सप्रेसवे के जरिए उनका जिला इस बड़े नेटवर्क का हिस्सा बनेगा।

फिलहाल, गंगा एक्सप्रेसवे से सीधे न जुड़ पाने को लेकर जिले में बहस जारी है, लेकिन सरकार और जनप्रतिनिधि इसे तकनीकी कारणों से जुड़ा मामला बता रहे हैं। अब लोगों की नजर प्रस्तावित लिंक एक्सप्रेसवे परियोजना पर टिकी हुई है, जिससे फर्रुखाबाद को भविष्य में बेहतर कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है।

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