फीचर्डविदेश

‘भारत के पास भंडार, पाकिस्तान बेबस…’ होर्मुज संकट पर पाक मंत्री ने माना भारत की ताकत

ईरान-इजरायल तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते संकट ने पूरी दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा को चिंता में डाल दिया है. कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और सप्लाई बाधित होने की आशंका के बीच पाकिस्तान की कमजोर आर्थिक और ऊर्जा तैयारियां एक बार फिर उजागर हो गई हैं. खास बात यह रही कि पाकिस्तान के पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक ने खुद सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि भारत की तुलना में पाकिस्तान इस संकट का सामना करने में बेहद कमजोर स्थिति में है.

एक टीवी टॉक शो में बातचीत के दौरान अली परवेज मलिक ने माना कि पाकिस्तान के पास पर्याप्त रणनीतिक तेल भंडार नहीं हैं. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान फिलहाल केवल कमर्शियल रिजर्व के भरोसे चल रहा है, जो लंबे समय तक देश की जरूरतें पूरी नहीं कर सकते. मंत्री के मुताबिक पाकिस्तान के पास केवल 5 से 7 दिनों का कच्चा तेल भंडार मौजूद है, जबकि रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पाद भी सिर्फ 20 से 21 दिनों तक ही चल सकते हैं.

पाक मंत्री ने भारत की तैयारियों की खुलकर तारीफ करते हुए कहा कि भारत के पास 60 से 70 दिनों तक का रणनीतिक तेल भंडार है, जिसे जरूरत पड़ने पर तुरंत जारी किया जा सकता है. उन्होंने यह भी माना कि भारत की मजबूत विदेशी मुद्रा स्थिति उसे वैश्विक संकटों के दौरान अधिक सुरक्षित बनाती है. मलिक ने कहा कि भारत किसी IMF कार्यक्रम का हिस्सा नहीं है, इसलिए उसके पास आर्थिक फैसले लेने की ज्यादा स्वतंत्रता है.

दरअसल, होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक माना जाता है. वैश्विक तेल सप्लाई का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है. यदि यहां किसी तरह का सैन्य तनाव या बाधा पैदा होती है तो इसका असर सीधे अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों पर पड़ता है. हाल के दिनों में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण तेल बाजार में अस्थिरता बढ़ी है और कई देशों ने अपने ऊर्जा भंडार को लेकर चिंता जताई है.

पाकिस्तान की स्थिति इसलिए भी ज्यादा खराब मानी जा रही है क्योंकि उसकी अर्थव्यवस्था पहले से ही भारी कर्ज, महंगाई और विदेशी मुद्रा संकट से जूझ रही है. देश IMF की शर्तों के तहत आर्थिक नीतियां लागू करने को मजबूर है. ऐसे में सरकार के पास पेट्रोल और डीजल पर टैक्स कम करने या बड़े स्तर पर राहत देने की सीमित क्षमता है.

अली परवेज मलिक ने यह भी बताया कि बढ़ती तेल कीमतों के कारण पाकिस्तान सरकार को IMF से बातचीत करनी पड़ी. सरकार ने कुछ समय के लिए डीजल पर लेवी शून्य करने का फैसला किया, लेकिन पेट्रोल पर बोझ बढ़ा दिया गया. पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमतें आम लोगों की पहुंच से बाहर होती जा रही हैं. हालांकि सरकार ने हाल में पेट्रोल की कीमत घटाकर 378 रुपये प्रति लीटर करने का दावा किया, लेकिन इसके पीछे भी टैक्स और लेवी का बड़ा खेल बताया जा रहा है.

दूसरी तरफ भारत ने पिछले कुछ वर्षों में ऊर्जा सुरक्षा को लेकर व्यापक रणनीति अपनाई है. भारत ने रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व तैयार करने के साथ-साथ रूस, अमेरिका, मध्य पूर्व और अन्य देशों से तेल आयात के विकल्प बढ़ाए हैं. इसके अलावा मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार और स्थिर आर्थिक नीतियों ने भारत को वैश्विक तेल संकट के प्रभाव से काफी हद तक बचाए रखा है.

विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी देश के लिए केवल तेल आयात करना पर्याप्त नहीं होता, बल्कि लंबे समय तक संकट झेलने की तैयारी भी जरूरी होती है. भारत ने इसी दिशा में काम किया, जबकि पाकिस्तान राजनीतिक अस्थिरता और आर्थिक कमजोरियों के कारण पीछे रह गया.

पाकिस्तान के पेट्रोलियम मंत्री का बयान अब वहां की सरकार के लिए भी असहज स्थिति पैदा कर रहा है, क्योंकि विपक्ष इसे सरकार की विफल ऊर्जा नीति का प्रमाण बता रहा है. वहीं भारत के संदर्भ में यह बयान इस बात को मजबूत करता है कि दीर्घकालिक योजना, रणनीतिक भंडारण और मजबूत अर्थव्यवस्था किसी भी वैश्विक संकट के दौरान देश को स्थिर बनाए रखने में कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button