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जबलपुर बरगी बांध क्रूज हादसा: 9 मौतों के बाद उठे सुरक्षा इंतजामों और यात्रियों की संख्या पर बड़े सवाल

The Hill India News
Last updated: May 1, 2026 4:50 am
The Hill India News
Published: May 1, 2026
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मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले में स्थित बरगी बांध में गुरुवार शाम हुआ दर्दनाक क्रूज हादसा पूरे प्रदेश को झकझोर गया है। इस हादसे में अब तक 9 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कई यात्री अब भी लापता बताए जा रहे हैं। हादसे के बाद राहत और बचाव कार्य लगातार जारी है, लेकिन जैसे-जैसे समय बीत रहा है, वैसे-वैसे कई गंभीर सवाल भी सामने आने लगे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर क्रूज पर कुल कितने लोग सवार थे? प्रशासनिक आंकड़ों और प्रत्यक्षदर्शियों के दावों में अंतर होने से स्थिति और भी उलझ गई है।

प्रशासन के मुताबिक हादसे के समय क्रूज पर 29 यात्री और 2 क्रू मेंबर मौजूद थे। हालांकि, स्थानीय लोगों और कुछ बचे हुए यात्रियों का कहना है कि वास्तविक संख्या इससे कहीं ज्यादा हो सकती है। बताया जा रहा है कि कई छोटे बच्चे भी क्रूज पर मौजूद थे, लेकिन चूंकि 5 साल तक के बच्चों का टिकट नहीं लगता, इसलिए उनका कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं रखा गया। इसके अलावा कुछ यात्रियों को बिना टिकट या फ्री में बैठाए जाने की आशंका भी जताई जा रही है। ऐसे में यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या क्रूज संचालन में सुरक्षा नियमों का सही तरीके से पालन किया जा रहा था या नहीं।

हादसा गुरुवार शाम करीब 5:15 बजे हुआ, जब पर्यटक नर्मदा नदी में क्रूज से भ्रमण कर रहे थे। बताया जा रहा है कि करीब 5:30 बजे खमरिया टापू के पास अचानक मौसम खराब हो गया। तेज आंधी, तूफान और ऊंची लहरों के कारण क्रूज अनियंत्रित हो गया और कुछ ही मिनटों में पलट गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार यात्रियों को संभलने या लाइफ जैकेट पहनने तक का मौका नहीं मिला। कई लोग सीधे गहरे पानी में जा गिरे और देखते ही देखते अफरा-तफरी मच गई।

जबलपुर एसपी संपत उपाध्याय ने बताया कि गुरुवार सुबह से ही इलाके में तेज हवाएं चल रही थीं और मौसम विभाग की चेतावनी भी मौजूद थी। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि खराब मौसम के बावजूद क्रूज संचालन की अनुमति क्यों दी गई। क्या संबंधित अधिकारियों ने मौसम की गंभीरता को नजरअंदाज किया? यदि मौसम खराब था तो पर्यटकों को नदी में ले जाने का फैसला किस आधार पर लिया गया? इन सवालों के जवाब अब जांच के बाद ही सामने आ पाएंगे।

हादसे के तुरंत बाद एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और पुलिस प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंच गईं। रातभर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया और अब तक 28 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। हालांकि कई लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। शुक्रवार सुबह तीन और शव बरामद किए गए, जिनकी पहचान अभी नहीं हो पाई है। मृतकों में अधिकांश महिलाएं शामिल हैं, जिससे परिवारों में मातम पसरा हुआ है।

लापता लोगों में कई छोटे बच्चे भी शामिल हैं। जिन लोगों की तलाश जारी है उनमें तमिल (5), विराज (6), मयूरम (9), पूनम थापा (7), आरएच सैय्यद, रेशमा सैय्यद, समीम जफर और ज्योति श्रीवास शामिल हैं। बच्चों के लापता होने की खबर ने हादसे को और भी दर्दनाक बना दिया है। राहत दल लगातार गोताखोरों की मदद से तलाश अभियान चला रहे हैं, लेकिन पानी का तेज बहाव और मौसम बचाव कार्य में बाधा बन रहा है।

अब तक जिन मृतकों की पहचान हो चुकी है उनमें नीतू सोनी (43), सोभाग्यम अलागन (42), मधुर मैसी (62) और काकुलाझी (38) शामिल हैं। इसके अलावा चार अन्य शवों की पहचान अभी बाकी है। प्रशासन मृतकों के परिजनों से संपर्क कर शवों की शिनाख्त कराने में जुटा हुआ है।

इस हादसे ने बरगी बांध में चल रही पर्यटन गतिविधियों और सुरक्षा मानकों पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारी के मुताबिक यहां वर्ष 2006 से क्रूज संचालन किया जा रहा है। यहां एक हाउस बोट और एक मिनी क्रूज संचालित होते हैं। एक क्रूज की क्षमता करीब 60 यात्रियों की बताई जाती है, लेकिन हादसे के समय वास्तविक संख्या को लेकर भ्रम बना हुआ है। यदि बिना टिकट यात्रियों को बैठाया गया था, तो यह सीधे तौर पर सुरक्षा नियमों का उल्लंघन माना जाएगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी जल पर्यटन सेवा में यात्रियों की सटीक गिनती और सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता बेहद जरूरी होती है। यदि बच्चों का रिकॉर्ड नहीं रखा गया या यात्रियों को बिना उचित सुरक्षा जांच के बैठाया गया, तो यह बड़ी लापरवाही मानी जाएगी। इसके अलावा यह भी जांच का विषय है कि क्या सभी यात्रियों को लाइफ जैकेट दी गई थीं और क्या क्रू मेंबर आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए प्रशिक्षित थे।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। साथ ही संबंधित अधिकारियों को तत्काल जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। राज्य सरकार ने यह भी कहा है कि हादसे के कारणों की गहराई से जांच की जाएगी और यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई गई तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल पूरे प्रदेश की नजरें बरगी बांध पर चल रहे रेस्क्यू ऑपरेशन पर टिकी हुई हैं। लोग यही दुआ कर रहे हैं कि लापता यात्रियों का जल्द पता चल सके। लेकिन इस हादसे ने एक बार फिर यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि क्या पर्यटन और कमाई के नाम पर सुरक्षा नियमों से समझौता किया जा रहा है। यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में ऐसे हादसे फिर देखने को मिल सकते हैं।

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