
उत्तराखंड के विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा की तैयारियां अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। इसी क्रम में बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने की धार्मिक और पारंपरिक प्रक्रिया विधिवत रूप से प्रारंभ हो गई है। सोमवार को ज्योतिर्मठ (जोशीमठ) स्थित नृसिंह मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना के बाद आदि गुरु शंकराचार्य की पवित्र डोली, भगवान विष्णु के वाहन गरुड़ जी की उत्सव मूर्ति और अन्य देव डोलियों को वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पहले पड़ाव पांडुकेश्वर के लिए रवाना किया गया। यह यात्रा धार्मिक आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का अद्भुत संगम मानी जाती है, जिसमें हजारों श्रद्धालु और स्थानीय लोग शामिल होते हैं।
जानकारी के अनुसार, बदरीनाथ धाम के कपाट इस वर्ष 23 अप्रैल को सुबह 6 बजकर 15 मिनट पर श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। इससे पहले पूरी यात्रा प्रक्रिया पारंपरिक रीति-रिवाजों और धार्मिक विधानों के अनुसार पूरी की जा रही है। ज्योतिर्मठ में आयोजित इस विशेष अवसर पर भगवान नृसिंह, गणेश, लक्ष्मी, शंकराचार्य की प्राचीन गद्दी और भगवान विष्णु के वाहन गरुड़ की विधिवत पूजा संपन्न की गई।
पूजा-अर्चना के बाद डिमरी धार्मिक केंद्रीय पंचायत के पदाधिकारियों ने तेल कलश (गाडू घड़ा) लेकर मंदिर में उपस्थिति दर्ज कराई। इस पवित्र तेल कलश को भी विधिवत पूजा के बाद बदरीनाथ धाम के लिए रवाना किया गया। परंपरा के अनुसार, इसी तेल का उपयोग भगवान बदरी विशाल की प्रतिमा के अभिषेक के लिए किया जाता है। इसे चारधाम यात्रा की सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक प्रक्रिया माना जाता है।
कार्यक्रम के दौरान बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) के उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती, रावल अमरनाथ नंबूदरी सहित अनेक धार्मिक पदाधिकारी, स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। इस अवसर पर पूरे क्षेत्र में भक्ति और आस्था का वातावरण देखने को मिला। मंदिर परिसर में वैदिक मंत्रों की गूंज और श्रद्धालुओं के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।
ज्योतिर्मठ से प्रस्थान के बाद देव डोलियां अपने प्रथम पड़ाव योग बदरी पांडुकेश्वर पहुंचेंगी, जहां वे रात्रि विश्राम करेंगी। इसके बाद 22 अप्रैल को उद्धव जी, कुबेर जी और आदि गुरु शंकराचार्य की गद्दी के साथ अन्य देव डोलियां बदरीनाथ धाम के लिए प्रस्थान करेंगी। वहीं गरुड़ जी की उत्सव मूर्ति 21 अप्रैल को ही बदरीनाथ धाम पहुंच जाएगी। यह पूरी यात्रा धार्मिक परंपरा के अनुसार चरणबद्ध तरीके से संपन्न की जा रही है।
बीकेटीसी के मीडिया प्रभारी हरीश गौड़ ने जानकारी देते हुए बताया कि इस वर्ष की यात्रा को सफल और सुरक्षित बनाने के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। उन्होंने बताया कि मंदिर समिति और प्रशासन मिलकर श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा पर विशेष ध्यान दे रहे हैं। साथ ही यात्रा मार्ग पर साफ-सफाई, स्वास्थ्य सेवाएं और यातायात व्यवस्था को भी सुदृढ़ किया गया है।
उन्होंने यह भी बताया कि इस अवसर पर ज्योतिर्मठ के विभिन्न विद्यालयों के छात्रों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया और देव डोलियों के प्रस्थान के दौरान लगभग दो किलोमीटर तक पुष्प वर्षा कर भव्य स्वागत किया। इससे पूरे आयोजन में धार्मिक उत्सव जैसा माहौल बन गया।
स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं में बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने को लेकर विशेष उत्साह देखा जा रहा है। चारधाम यात्रा को उत्तराखंड की आस्था और अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है, जिसमें हर वर्ष लाखों श्रद्धालु देश-विदेश से भाग लेते हैं। बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने के साथ ही इस वर्ष की चारधाम यात्रा पूर्ण रूप से आरंभ हो जाएगी, जिससे पूरे क्षेत्र में धार्मिक गतिविधियों और पर्यटन में तेजी आने की उम्मीद है।
इस प्रकार, आदि गुरु शंकराचार्य की डोली के पांडुकेश्वर के लिए प्रस्थान के साथ ही बदरीनाथ धाम की यात्रा विधिवत रूप से अपने अंतिम चरण में प्रवेश कर चुकी है और 23 अप्रैल को श्रद्धालुओं के लिए कपाट खुलते ही यह पवित्र धाम एक बार फिर आस्था और भक्ति के सागर में डूब जाएगा।


