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Reading: पाकिस्तानी पीएम का सोशल मीडिया ‘पहलवान’ के हवाले? ड्राफ्ट ब्लंडर से खुली पोल, सजा पर भी उठे सवाल
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पाकिस्तानी पीएम का सोशल मीडिया ‘पहलवान’ के हवाले? ड्राफ्ट ब्लंडर से खुली पोल, सजा पर भी उठे सवाल

The Hill India News
Last updated: April 15, 2026 9:55 am
The Hill India News
Published: April 15, 2026
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पाकिस्तान की सियासत एक बार फिर अजीबोगरीब वजह से सुर्खियों में है। इस बार मामला किसी बड़े राजनीतिक फैसले या अंतरराष्ट्रीय विवाद का नहीं, बल्कि खुद प्रधानमंत्री के सोशल मीडिया अकाउंट से जुड़े एक चौंकाने वाले खुलासे का है। शहबाज शरीफ के आधिकारिक X (पूर्व ट्विटर) अकाउंट से हुई एक बड़ी चूक ने न सिर्फ उनकी डिजिटल टीम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि सरकार की पेशेवर क्षमता को लेकर भी आलोचना तेज कर दी है।

Contents
ड्राफ्ट पोस्ट ने खोली पोलकौन है ‘पहलवान’?सजा के नाम पर खानापूर्तिसरकार की कार्यशैली पर उठे सवाल‘पहलवान’ को संरक्षण का आरोपसोशल मीडिया पर जनता की प्रतिक्रिया

ड्राफ्ट पोस्ट ने खोली पोल

हाल ही में प्रधानमंत्री के अकाउंट से एक पोस्ट शेयर हुई, जो देखने में सामान्य नहीं थी। इस पोस्ट में केवल संदेश ही नहीं, बल्कि ड्राफ्ट तैयार करने के दौरान दिए गए अंदरूनी निर्देश भी गलती से पब्लिक हो गए। यह साफ संकेत था कि पोस्ट को बिना जांचे-परखे जल्दबाजी में अपलोड कर दिया गया। देखते ही देखते यह पोस्ट वायरल हो गई और सोशल मीडिया पर मजाक और आलोचना का विषय बन गई।

इस घटना के बाद वरिष्ठ पत्रकार अबसार आलम ने बड़ा दावा करते हुए बताया कि प्रधानमंत्री का सोशल मीडिया अकाउंट किसी प्रोफेशनल डिजिटल टीम या विशेषज्ञ के बजाय एक कम पढ़े-लिखे व्यक्ति द्वारा संभाला जा रहा है, जिसे ‘पहलवान’ कहा जाता है। इस खुलासे ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया।

कौन है ‘पहलवान’?

‘पहलवान’ नाम से पहचाने जाने वाले इस शख्स के बारे में कहा जा रहा है कि वह तकनीकी रूप से प्रशिक्षित नहीं है और सोशल मीडिया मैनेजमेंट जैसी संवेदनशील जिम्मेदारी के लिए पर्याप्त योग्य भी नहीं है। इसके बावजूद वह प्रधानमंत्री के इतने महत्वपूर्ण अकाउंट को संभाल रहा है, यह बात लोगों को हैरान कर रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी देश के प्रधानमंत्री का सोशल मीडिया अकाउंट केवल एक कम्युनिकेशन टूल नहीं होता, बल्कि वह कूटनीतिक संदेशों, नीतिगत संकेतों और अंतरराष्ट्रीय छवि का प्रतिनिधित्व करता है। ऐसे में इस तरह की लापरवाही बेहद गंभीर मानी जाती है।

सजा के नाम पर खानापूर्ति

इस पूरे घटनाक्रम के बाद उम्मीद की जा रही थी कि संबंधित व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। लेकिन अबसार आलम के अनुसार, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ‘पहलवान’ को जो सजा दी, वह बेहद हल्की और औपचारिक प्रतीत होती है। बताया गया कि उन्हें केवल इतना कहा गया कि वह “कुछ दिनों तक सामने न आए।”

इस तरह की कार्रवाई को लेकर सोशल मीडिया पर सरकार की आलोचना हो रही है। लोगों का कहना है कि इतनी बड़ी गलती के बाद भी यदि कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता, तो यह प्रशासनिक लापरवाही और जवाबदेही की कमी को दर्शाता है।

सरकार की कार्यशैली पर उठे सवाल

इस घटना ने पाकिस्तान की मौजूदा प्रशासनिक व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आलोचकों का कहना है कि यह मामला केवल एक सोशल मीडिया गलती नहीं, बल्कि सिस्टम में व्याप्त ‘कामचलाऊ रवैये’ का उदाहरण है।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, डिजिटल युग में इस तरह की चूकें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की छवि को नुकसान पहुंचा सकती हैं। खासकर जब मामला प्रधानमंत्री के आधिकारिक संचार से जुड़ा हो, तो हर शब्द और हर पोस्ट बेहद सावधानी से तैयार किया जाना चाहिए।

‘पहलवान’ को संरक्षण का आरोप

मामले का एक और अहम पहलू यह है कि ‘पहलवान’ को एक प्रभावशाली मंत्री का संरक्षण प्राप्त बताया जा रहा है। यही वजह है कि बार-बार गलतियां होने के बावजूद वह अपनी स्थिति में बना हुआ है। यदि यह दावा सही है, तो यह न केवल योग्यता के बजाय सिफारिश के आधार पर जिम्मेदारियां बांटने की प्रवृत्ति को उजागर करता है, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े करता है।

सोशल मीडिया पर जनता की प्रतिक्रिया

इस पूरे मामले को लेकर सोशल मीडिया पर आम लोगों की प्रतिक्रिया भी काफी तीखी रही है। कई यूजर्स ने इसे “डिजिटल युग में गैर-जिम्मेदारी की पराकाष्ठा” बताया है, तो कुछ ने इसे सरकार की अक्षमता का प्रतीक कहा है।

लोगों का मानना है कि जब देश के प्रधानमंत्री का अकाउंट ही सुरक्षित और पेशेवर तरीके से संचालित नहीं हो रहा, तो अन्य सरकारी तंत्र की स्थिति का अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है।

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