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The Hill India > Blog > उत्तराखंड > उत्तराखंड: गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय में ‘क्रिमिनल लॉज़, सोसाइटी एवं रिस्पॉन्सिबिलिटी’ पर हुआ मंथन, प्रो. डॉ. बी.के.एस. संजय ने व्यवहारिक सुधार को बताया अपराध रोकथाम की कुंजी
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उत्तराखंड: गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय में ‘क्रिमिनल लॉज़, सोसाइटी एवं रिस्पॉन्सिबिलिटी’ पर हुआ मंथन, प्रो. डॉ. बी.के.एस. संजय ने व्यवहारिक सुधार को बताया अपराध रोकथाम की कुंजी

The Hill India News
Last updated: April 13, 2026 9:54 am
The Hill India News
Published: April 13, 2026
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हरिद्वार, 13 अप्रैल 2026। गुरुकुल कांगड़ी सम विश्वविद्यालय, हरिद्वार में आयोजित वार्षिक समापन समारोह इस वर्ष एक महत्वपूर्ण अकादमिक विमर्श के साथ संपन्न हुआ, जिसका विषय था “क्रिमिनल लॉज़, सोसाइटी एवं रिस्पॉन्सिबिलिटी”। इस अवसर पर शिक्षाविदों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों और विशेषज्ञों ने आधुनिक समाज में अपराध, कानून और सामाजिक जिम्मेदारी के बदलते आयामों पर गहन चर्चा की। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहे मुख्य वक्ता प्रो. डॉ. बी.के.एस. संजय, पद्मश्री, अध्यक्ष, एम्स गुवाहाटी, जिन्होंने अपने विचारों से उपस्थित सभी लोगों को सोचने के लिए प्रेरित किया।

अपने संबोधन में प्रो. डॉ. संजय ने अपराध की पारंपरिक अवधारणा को चुनौती देते हुए कहा कि अपराध केवल कानूनी या न्यायिक दृष्टिकोण से समझने का विषय नहीं है, बल्कि यह मूल रूप से मानव व्यवहार, भावनाओं और सामाजिक परिस्थितियों से गहराई से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि किसी भी अपराध की शुरुआत व्यक्ति के मन में उत्पन्न एक विचार से होती है, जो धीरे-धीरे भावना, इरादे और अंततः क्रिया का रूप ले लेता है। इसलिए यदि अपराध को जड़ से समाप्त करना है, तो हमें उसके मूल कारणों—मानसिक और सामाजिक कारकों—पर ध्यान देना होगा।

उन्होंने विशेष रूप से व्यवहारिक जागरूकता, आत्मनियंत्रण और मूल्य-आधारित शिक्षा के महत्व पर जोर दिया। उनके अनुसार, आज की शिक्षा प्रणाली में केवल ज्ञान या तकनीकी दक्षता पर ही ध्यान केंद्रित नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि छात्रों में नैतिक मूल्यों, सहनशीलता और भावनात्मक संतुलन का विकास भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जब तक व्यक्ति अपने व्यवहार और भावनाओं पर नियंत्रण नहीं रखेगा, तब तक कानून के भय से अपराध को पूरी तरह रोका नहीं जा सकता।

प्रो. डॉ. संजय ने अंतर्वैयक्तिक और अंतर्मन संबंधी बुद्धिमत्ता (इंट्रा और इंटरपर्सनल इंटेलिजेंस) के महत्व को भी विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि अधिकांश अपराधी प्रवृत्तियां साथियों के दबाव, नकारात्मक सामाजिक वातावरण और भावनात्मक असंतुलन के कारण विकसित होती हैं। ऐसे में यदि समाज में सकारात्मक वातावरण और सही मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाए, तो अपराध की प्रवृत्तियों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

उन्होंने सड़क सुरक्षा का उदाहरण देते हुए कहा कि यह केवल ट्रैफिक नियमों का पालन करने का विषय नहीं है, बल्कि यह एक सामाजिक और व्यवहारिक जिम्मेदारी भी है। ओवरस्पीडिंग, ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन और रोड रेज जैसी घटनाएं इस बात का संकेत हैं कि समाज में अनुशासन और भावनात्मक नियंत्रण की कमी है। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज लोग सार्वजनिक सड़कों को एक साझा संसाधन के बजाय अपने व्यक्तिगत अधिकार के रूप में देखने लगे हैं, जिससे टकराव और दुर्घटनाओं की घटनाएं बढ़ रही हैं।

इसी संदर्भ में उन्होंने वैश्विक स्तर पर भी इसी प्रकार की मानसिकता की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा कि जैसे सड़कों को साझा संसाधन समझने की आवश्यकता है, वैसे ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समुद्री मार्गों और जल क्षेत्रों को भी सहयोग और पारस्परिक सम्मान के साथ उपयोग किया जाना चाहिए। उन्होंने होर्मूज जलडमरूमध्य का उदाहरण देते हुए कहा कि इसे नियंत्रण के दृष्टिकोण से देखने के बजाय साझा वैश्विक संसाधन के रूप में देखना अधिक उचित है।

प्रो. डॉ. संजय ने दंड व्यवस्था की भूमिका पर भी महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि वर्तमान न्याय प्रणाली मुख्यतः अपराध के परिणामों पर केंद्रित होती है, न कि उसके मूल कारणों पर। उन्होंने स्पष्ट किया कि दंड देना आवश्यक है, लेकिन यह स्थायी समाधान नहीं है। अपराध की वास्तविक रोकथाम के लिए समाज को जागरूक बनाना, नैतिक शिक्षा को बढ़ावा देना और भावनात्मक बुद्धिमत्ता का विकास करना अधिक प्रभावी उपाय हैं।

इसके अलावा, उन्होंने आधुनिक अपराध जांच में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित डिजिटल फॉरेंसिक तकनीकों की बढ़ती भूमिका पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि तकनीक के विकास के साथ-साथ अपराध के तरीके भी बदल रहे हैं, इसलिए जांच एजेंसियों को भी नवीन तकनीकों को अपनाना होगा। एआई और डिजिटल फॉरेंसिक के माध्यम से अपराधों की जांच अधिक सटीक और प्रभावी तरीके से की जा सकती है।

कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया, जिसमें प्रो. डॉ. संजय के विचारों की सराहना करते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने मूल्य-आधारित शिक्षा और सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। इस अकादमिक सत्र ने न केवल अपराध और कानून के पारंपरिक दृष्टिकोण को व्यापक बनाया, बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए शिक्षा और जागरूकता की भूमिका को भी रेखांकित किया।

इस प्रकार, गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय का यह आयोजन केवल एक औपचारिक समापन समारोह नहीं रहा, बल्कि यह एक ऐसा मंच बना, जहां समाज, कानून और मानव व्यवहार के बीच संबंधों को नए दृष्टिकोण से समझने का अवसर मिला।

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