भारत-पाकिस्तान सीमा से महज 50 किलोमीटर दूर राजस्थान के बाड़मेर जिले में पुलिस ने एक बड़े नशा तस्करी नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए घर की छत पर संचालित की जा रही अवैध एमडी (मेफेड्रोन) ड्रग्स फैक्ट्री का खुलासा किया है। सेड़वा थाना क्षेत्र के गौड़ा गांव में की गई इस कार्रवाई ने सुरक्षा एजेंसियों को भी चौंका दिया है। पुलिस ने मौके से करीब एक करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की एमडी ड्रग्स, भारी मात्रा में केमिकल, नकदी, मशीनें और ड्रग्स तैयार करने में इस्तेमाल होने वाले उपकरण बरामद किए हैं। इस मामले में मुख्य आरोपी फरार हो गया है, जबकि उसकी पत्नी को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस को आशंका है कि इस फैक्ट्री के तार किसी बड़े अंतरराज्यीय या अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स नेटवर्क से जुड़े हो सकते हैं।
जानकारी के अनुसार, सेड़वा थाना पुलिस को मुखबिर के माध्यम से सूचना मिली थी कि गौड़ा गांव स्थित एक मकान में अवैध रूप से सिंथेटिक ड्रग्स तैयार की जा रही है। सूचना को गंभीरता से लेते हुए थानाधिकारी प्रभुराम के नेतृत्व में पुलिस की विशेष टीम ने तुरंत छापेमारी की। जब पुलिस ने मकान की तलाशी शुरू की तो घर की छत और पीछे बने कमरे में एमडी ड्रग्स बनाने का पूरा सेटअप देखकर अधिकारी भी हैरान रह गए। वहां ड्रग्स तैयार करने के लिए रासायनिक पदार्थ, मशीनें, उपकरण और तैयार माल मौजूद था।
पुलिस ने मौके से करीब 920 ग्राम एमडी ड्रग्स, 40 किलोग्राम रासायनिक केमिकल और पाउडर, 24 लाख रुपये से अधिक की नकदी तथा ड्रग्स निर्माण में प्रयुक्त मशीनें और अन्य उपकरण जब्त किए हैं। प्रारंभिक जांच के अनुसार बरामद सामग्री की बाजार कीमत एक करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है। फॉरेंसिक विशेषज्ञों की टीम को भी मौके पर बुलाया गया, जिसने नमूने एकत्र कर वैज्ञानिक जांच शुरू कर दी है ताकि ड्रग्स की गुणवत्ता और निर्माण प्रक्रिया का पता लगाया जा सके।
पुलिस के अनुसार, कार्रवाई की भनक लगते ही मुख्य आरोपी मुकेश कुमार मौके से फरार हो गया। हालांकि पुलिस ने घर में मौजूद उसकी पत्नी अंजू को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पूछताछ के दौरान मिले तथ्यों के आधार पर उसे एनडीपीएस एक्ट के तहत गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस अब उससे यह जानने का प्रयास कर रही है कि इस अवैध कारोबार में और कौन-कौन लोग शामिल हैं, केमिकल की सप्लाई कहां से होती थी और तैयार ड्रग्स किन राज्यों या शहरों में भेजी जाती थी।
जांच एजेंसियों का मानना है कि इतनी बड़ी मात्रा में केमिकल और उपकरणों की मौजूदगी इस बात का संकेत है कि यहां लंबे समय से संगठित तरीके से ड्रग्स का उत्पादन किया जा रहा था। सीमा क्षेत्र में इस तरह की फैक्ट्री का मिलना सुरक्षा एजेंसियों के लिए भी गंभीर चिंता का विषय है, क्योंकि भारत-पाकिस्तान सीमा के निकट होने के कारण तस्करी के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता। पुलिस अब मोबाइल रिकॉर्ड, बैंक लेनदेन, डिजिटल साक्ष्य और अन्य दस्तावेजों की भी जांच कर रही है ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके।
थानाधिकारी प्रभुराम ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है और मुख्य आरोपी मुकेश कुमार की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दी जा रही है। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोग राजस्थान के अलावा पड़ोसी राज्यों में सक्रिय हैं या नहीं। अधिकारियों का कहना है कि मामले की गहन जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस ड्रग्स सिंडिकेट से जुड़े कई और बड़े खुलासे हो सकते हैं। सीमा क्षेत्र में नशे के कारोबार पर रोक लगाने के लिए पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां संयुक्त रूप से अभियान चला रही हैं, ताकि युवाओं को नशे के जाल से बचाया जा सके और इस अवैध कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
