By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
The Hill IndiaThe Hill IndiaThe Hill India
Notification Show More
Font ResizerAa
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Reading: उत्तर प्रदेश: महोबा में सरकारी लापरवाही की हद, 18 महीने पहले मृत आंगनबाड़ी सहायिका को थमा दिया नोटिस, 2 दिन में मांगा जवाब
Share
Font ResizerAa
The Hill IndiaThe Hill India
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Search
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Have an existing account? Sign In
Follow US
The Hill India > Blog > उत्तर प्रदेश > उत्तर प्रदेश: महोबा में सरकारी लापरवाही की हद, 18 महीने पहले मृत आंगनबाड़ी सहायिका को थमा दिया नोटिस, 2 दिन में मांगा जवाब
उत्तर प्रदेशफीचर्ड

उत्तर प्रदेश: महोबा में सरकारी लापरवाही की हद, 18 महीने पहले मृत आंगनबाड़ी सहायिका को थमा दिया नोटिस, 2 दिन में मांगा जवाब

Rajesh Dabral
Last updated: March 31, 2026 5:59 am
Rajesh Dabral
Published: March 31, 2026
Share
SHARE

महोबा (उत्तर प्रदेश): डिजिटल इंडिया और ई-गवर्नेंस के दौर में भी सरकारी तंत्र की लापरवाही किस हद तक जा सकती है, इसका हैरान कर देने वाला मामला उत्तर प्रदेश के महोबा जिले से सामने आया है। यहां बाल विकास विभाग ने एक ऐसी महिला कर्मचारी को नोटिस जारी कर दिया, जिसकी मृत्यु लगभग 18 महीने पहले ही हो चुकी है। इतना ही नहीं, विभाग ने मृत महिला को दो दिन के भीतर जवाब देने का अल्टीमेटम भी दे दिया, जिससे पूरे इलाके में आक्रोश और हैरानी का माहौल है।

यह मामला महोबा के पनवाड़ी विकासखंड के नैपुरा गांव का है, जहां आंगनबाड़ी केंद्र में सहायिका के पद पर कार्यरत पार्वती की बीमारी के चलते 1 नवंबर 2024 को मृत्यु हो गई थी। परिवार का दावा है कि पार्वती के निधन के महज 8 दिन के भीतर ही उन्होंने संबंधित विभाग में मृत्यु प्रमाण पत्र जमा कर दिया था। इसके बावजूद, लगभग डेढ़ साल बाद बाल विकास परियोजना कार्यालय से उनके नाम पर नोटिस जारी कर दिया गया।

जारी किए गए नोटिस में आरोप लगाया गया है कि निरीक्षण के दौरान संबंधित आंगनबाड़ी केंद्र बंद मिला। नोटिस में मृतका से कहा गया है कि वह दो दिन के भीतर हॉट-कुक्ड मील योजना से जुड़े बिल, वाउचर और अन्य रिकॉर्ड के साथ कार्यालय में उपस्थित हों, अन्यथा उनकी सेवा समाप्त कर दी जाएगी। इस नोटिस पर पनवाड़ी की बाल विकास परियोजना अधिकारी यासमीन जहां के हस्ताक्षर बताए जा रहे हैं।

इस पूरे घटनाक्रम ने मृतका के परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। पार्वती के पति किशुनलाल ने एक ओर अपनी पत्नी की तस्वीर और दूसरी ओर मृत्यु प्रमाण पत्र दिखाते हुए प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि उन्होंने समय पर सभी दस्तावेज जमा कर दिए थे, फिर भी विभाग ने न तो रिकॉर्ड अपडेट किया और न ही स्थिति की जांच की।

मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब पार्वती के बेटे महेश ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए तंज कसा। उसने कहा कि अब वह यह नोटिस लेकर “स्वर्ग” जाएगा और अपनी मां से पूछेगा कि वह ड्यूटी पर क्यों नहीं जा रही हैं। बेटे का यह बयान सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बन गया है और लोग सरकारी व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं।

ग्रामीणों और परिजनों के मन में अब यह संदेह भी पैदा हो गया है कि कहीं मृतका के नाम पर पिछले 18 महीनों से किसी और द्वारा मानदेय तो नहीं उठाया जा रहा था। यदि ऐसा है तो यह मामला सिर्फ लापरवाही का नहीं, बल्कि संभावित भ्रष्टाचार का भी हो सकता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि विभाग को इतने लंबे समय तक अपनी कर्मचारी की मृत्यु की जानकारी न होना अपने आप में गंभीर चूक है।

परिजनों ने अब इस मामले की शिकायत जिलाधिकारी से करने का निर्णय लिया है और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यह केवल एक परिवार की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का मामला नहीं है, बल्कि पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करता है।

इस घटना ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या सरकारी रिकॉर्ड और फाइलों में अपडेट की प्रक्रिया इतनी कमजोर है कि एक मृत व्यक्ति को भी जीवित मानकर कार्रवाई की जा सकती है। डिजिटल युग में जहां डेटा प्रबंधन और पारदर्शिता की बात की जाती है, वहां इस तरह की घटनाएं सिस्टम की खामियों को उजागर करती हैं।

अब देखना यह होगा कि इस गंभीर लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होती है और क्या भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कोई ठोस कदम उठाए जाते हैं या नहीं। फिलहाल, यह मामला प्रशासनिक लापरवाही और संवेदनहीनता का एक बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है।

You Might Also Like

बच्चों की टॉफी पर भी 21% टैक्स लगाते थे कांग्रेस वाले, GST सुधार पर PM मोदी का विपक्ष पर वार
देवभूमि से वैश्विक धमाका: 21 साल के युवक ने बदली मेडिकल साइंस की तस्वीर, खड़ा किया 500 करोड़ का ‘हेल्थ-टेक’ साम्राज्य
UKSSSC Exam Calendar 2026: उत्तराखंड में नौकरियों की बहार, अधीनस्थ चयन आयोग ने जारी किया सालभर का भर्ती शेड्यूल
सुप्रीम कोर्ट की पहली महिला जज फातिमा बीवी को पद्मश्री सम्मान, पढ़ें प्रेरक कहानी
यूपी में देर रात चला तबादला एक्सप्रेस: 14 आईपीएस अधिकारियों के दायित्वों में बड़ा फेरबदल
TAGGED:Government NegligenceMahobaUttar Pradesh
Share This Article
Facebook Email Print
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Follow US

Find US on Social Medias
FacebookLike
XFollow
YoutubeSubscribe
TelegramFollow
Popular News
फीचर्डमौसम

Weather Update: दिल्ली-NCR में मानसून की धमाकेदार एंट्री, यूपी-बिहार से लेकर राजस्थान तक अगले 6 दिन झमाझम बारिश का रेड अलर्ट

The Hill India News
The Hill India News
July 1, 2026
उत्तराखंड शिक्षा विभाग में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: माध्यमिक और प्रारंभिक शिक्षा को मिले नए निदेशक, रामनगर बोर्ड के सचिव भी बदले
अफगानिस्तान का पाकिस्तान के अंदर घुसकर बड़ा हमला, ISIS के ठिकानों पर की एयरस्ट्राइक
उत्तराखण्ड के लिए ऐतिहासिक दिन: धामी-गडकरी बैठक में ₹7,000 करोड़ की सड़क परियोजनाओं को मिली महा-स्वीकृति, सीमांत क्षेत्रों और पर्यटन को मिलेगी नई उड़ान
उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड समाप्त: 1 जुलाई से लागू हुआ ‘अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण’, मानकों पर खरे उतरने वाले मदरसों को ही मिलेगी मान्यता
अंकिता भंडारी हत्याकांड: दोषियों को हाईकोर्ट से तगड़ा झटका, जमानत याचिका पर राहत देने से साफ़ इनकार
निजी स्कूलों की मनमानी फीस वसूली पर नैनीताल जिला प्रशासन का बड़ा प्रहार; डीएम का सख्त आदेश- अतिरिक्त शुल्क लौटाएं या एडजस्ट करें, उल्लंघन पर 5 लाख तक जुर्माना
अंगदान मानव सेवा का सर्वोच्च व पुनीत कार्य, जनभागीदारी से इसे राष्ट्रव्यापी जनआंदोलन बनाना आवश्यक: केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा
फीफा वर्ल्ड कप 2026: डेम्बेले की खौफनाक हैट्रिक से फ्रांस ने नॉर्वे को उड़ाया, सेनेगल ने इराक को 5-0 से रौंदकर जिंदा रखीं उम्मीदें
अलीगढ़ में AIMIM नेता का खौफनाक एलान, BJP नेता नाजिया इलाही की जुबान काटने वाले को 1 लाख का इनाम
© The Hill India. All Rights Reserved | Developed By: Tech Yard Labs
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?