असम विधानसभा चुनाव 2026 की सियासी जंग अब अपने चरम पर पहुंच गई है। मंगलवार को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुवाहाटी में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का चुनावी घोषणापत्र, जिसे पार्टी ‘संकल्प पत्र’ कहती है, आधिकारिक तौर पर जारी किया। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. हिमंता बिस्वा सरमा, प्रदेश अध्यक्ष दिलीप सैकिया और पार्टी के कई दिग्गज नेता मंच पर मौजूद रहे।
यह संकल्प पत्र केवल वादों का पुलिंदा नहीं, बल्कि भाजपा के दावों के अनुसार ‘विकसित असम‘ और ‘असमिया गौरव’ की रक्षा का एक विस्तृत रोडमैप है। इसमें विकास, बुनियादी ढांचे, युवाओं के लिए रोजगार और राज्य की मूल संस्कृति के संरक्षण को प्राथमिकता दी गई है।
’60 साल बनाम 10 साल’: सीतारमण का कांग्रेस पर तीखा प्रहार
संकल्प पत्र जारी करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राज्य की पूर्ववर्ती सरकारों पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि भाजपा की डबल इंजन सरकार ने असम में वह बदलाव कर दिखाया है, जो कांग्रेस 60 वर्षों के शासन में भी नहीं कर पाई थी।
सीतारमण ने कहा, “कांग्रेस की नीतियों की वजह से असम ने तीन दशकों से अधिक का समय AFSPA के काले साए में बिताया। नॉर्थ-ईस्ट के विकास को लेकर दिल्ली में कभी इच्छाशक्ति नहीं दिखी। लेकिन बीते एक दशक में असम ने स्थिरता और शांति का मार्ग चुना है। आज असम का युवा हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौट रहा है और राज्य की प्रगति में योगदान दे रहा है।“
संकल्प पत्र के मुख्य बिंदु: भूमि, विरासत और पहचान
भाजपा के इस असम भाजपा संकल्प पत्र 2026 में ‘नए असम’ के निर्माण के लिए कई बड़े वादे किए गए हैं। पार्टी ने स्पष्ट किया है कि उसकी प्राथमिकता ‘भूमि, विरासत और गरिमा’ की रक्षा करना है।
1. मूल निवासियों की सुरक्षा और अधिकार: संकल्प पत्र में असम के मूल निवासियों के अधिकारों की रक्षा के लिए सख्त भूमि कानूनों और सांस्कृतिक संरक्षण का वादा किया गया है। भाजपा ने कहा है कि वह अतिक्रमण मुक्त असम के अभियान को और तेज करेगी ताकि स्वदेशी समुदायों के हितों पर आंच न आए।
2. युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार: युवाओं को लुभाने के लिए भाजपा ने सरकारी नौकरियों के साथ-साथ स्टार्टअप और स्वरोजगार के लिए बड़े आर्थिक पैकेज का प्रावधान किया है। आईटी और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में असम को हब बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
3. स्वास्थ्य और शिक्षा का आधुनिक ढांचा: पार्टी ने राज्य के हर जिले में उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं और मेडिकल कॉलेज खोलने का संकल्प दोहराया है। शिक्षा के क्षेत्र में असमिया भाषा और स्थानीय बोलियों को प्राथमिकता देने के साथ-साथ डिजिटल साक्षरता पर भी जोर दिया गया है।
एक दशक का परिवर्तन और स्थिरता की राजनीति
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने इस अवसर पर कहा कि भाजपा ने पिछले कुछ वर्षों में असम से अलगाववाद को समाप्त कर विकास की राजनीति को स्थापित किया है। उन्होंने दावा किया कि “संकल्प पत्र” केवल चुनावी घोषणा नहीं है, बल्कि यह असम के लोगों के प्रति भाजपा की प्रतिबद्धता है। पार्टी का मानना है कि सड़क, पुल और रेल कनेक्टिविटी में जो सुधार हुआ है, वह राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ साबित हो रहा है।
चुनावी गणित और मुख्य मुकाबला
असम की 126 विधानसभा सीटों के लिए सियासी बिसात बिछ चुकी है। राज्य में इस बार मुख्य मुकाबला सत्तारूढ़ भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन और कांग्रेस के बीच माना जा रहा है।
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मतदान की तारीख: 9 अप्रैल (एक चरण में)
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परिणाम की तारीख: 4 मई
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा का यह संकल्प पत्र विशेष रूप से ग्रामीण मतदाताओं और युवाओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। जहाँ एक ओर कांग्रेस ‘गारंटी कार्ड’ के जरिए वापसी की राह तलाश रही है, वहीं भाजपा अपने ‘रिपोर्ट कार्ड’ और भविष्य के ‘संकल्प’ के जरिए सत्ता बरकरार रखने की जुगत में है।
क्या ‘संकल्प’ दिलाएगा सत्ता?
असम में भाजपा की रणनीति स्पष्ट है—विकास का चेहरा और पहचान की सुरक्षा। निर्मला सीतारमण द्वारा जारी किया गया यह दस्तावेज़ यह संकेत देता है कि भाजपा राष्ट्रीय सुरक्षा और क्षेत्रीय विकास के एजेंडे को एक साथ लेकर चल रही है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि 4 मई को असम की जनता इस ‘संकल्प’ पर कितनी मुहर लगाती है।



