
हल्द्वानी (नैनीताल)। उत्तराखंड के हल्द्वानी में घरेलू गैस सिलेंडर वितरण व्यवस्था में सेंधमारी और कालाबाजारी का एक गंभीर मामला प्रकाश में आया है। कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत की पैनी नजर और त्वरित कार्रवाई ने गैस वितरण में चल रहे खेल को बेनकाब कर दिया है। डहरिया क्षेत्र में संदिग्ध परिस्थितियों में गैस सिलेंडरों के वितरण की सूचना पर खुद कमिश्नर ने मोर्चा संभाला, जिसके बाद विभाग और गैस एजेंसियों में हड़कंप मच गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए तीन आउटसोर्स कर्मचारियों के खिलाफ तत्काल प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने के कड़े निर्देश जारी किए गए हैं।
ग्राउंड जीरो पर ‘कमिश्नर’ का छापा: संदेह से खुला राज
सोमवार को कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत को गुप्त सूचना मिली कि डहरिया क्षेत्र में गैस सिलेंडरों के वितरण में भारी अनियमितता बरती जा रही है। जब कमिश्नर मौके पर पहुंचे, तो नजारा चौंकाने वाला था। गैस वितरण वैन के कर्मचारियों ने नियमों को ताक पर रखकर 10 भरे हुए सिलेंडर एक स्थान पर छोड़ दिए थे, लेकिन बदले में उपभोक्ताओं से एक भी खाली सिलेंडर वापस नहीं लिया गया था।
गैस वितरण के स्थापित नियमों के अनुसार, बिना खाली सिलेंडर (Empty) प्राप्त किए भरा हुआ सिलेंडर (Refill) देना पूरी तरह अवैध है। इस संदिग्ध गतिविधि ने हल्द्वानी गैस सिलेंडर कालाबाजारी की आशंका को पुख्ता कर दिया। मौके से वितरण कर्मचारी गायब मिले, जो प्रशासन की सक्रियता देख वहां से खिसक गए थे।
पूछताछ में बेनकाब हुए कर्मचारी: संतोषजनक जवाब नदारद
कुमाऊं कमिश्नर ने तत्काल संबंधित ठेकेदार और वितरण टीम को तलब किया। पूछताछ के दौरान आउटसोर्स कर्मचारी संदीप, प्रेमपाल सिंह ठाकुर और प्रमोद चौहान से जब खाली सिलेंडर न लेने का कारण पूछा गया, तो वे कोई भी तर्कसंगत जवाब नहीं दे पाए। अधिकारियों का मानना है कि यह सीधे तौर पर गैस सिलेंडरों के दुरुपयोग और उन्हें ऊंचे दामों पर होटल या व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को बेचने की साजिश का हिस्सा हो सकता है।
आयुक्त दीपक रावत ने इस मामले को शासन और जनता के साथ धोखाधड़ी करार देते हुए कुमाऊं मंडल विकास निगम (KMVN) के महाप्रबंधक को निर्देशित किया कि उक्त तीनों कर्मचारियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
कालाबाजारी और घटतौली पर ‘जीरो टॉलरेंस’
ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच चल रहे वैश्विक तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा संकट की आहट है। ऐसे संवेदनशील समय में आवश्यक वस्तुओं की जमाखोरी और कालाबाजारी को प्रशासन ने बेहद गंभीरता से लिया है। कुमाऊं कमिश्नर ने स्पष्ट संदेश दिया है:
“गैस जैसी आवश्यक सेवा में किसी भी स्तर पर लापरवाही या भ्रष्टाचार स्वीकार्य नहीं है। जो लोग जनता के हक पर डाका डाल रहे हैं, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा। नियमित औचक निरीक्षण जारी रहेंगे और वितरण प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाएगा।”
उपभोक्ताओं को राहत: आपूर्ति में कोई कमी नहीं
प्रशासन ने जनता के बीच फैल रही अफवाहों पर विराम लगाते हुए स्पष्ट किया है कि प्रदेश में पेट्रोल, डीजल और घरेलू गैस (LPG) का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। आपूर्ति में कोई बाधा नहीं है, लेकिन कुछ शरारती तत्व कृत्रिम अभाव पैदा कर हल्द्वानी गैस सिलेंडर कालाबाजारी को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे हैं। प्रशासन ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे निर्धारित मूल्य से अधिक भुगतान न करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत हेल्पलाइन या नजदीकी प्रशासनिक कार्यालय को दें।
सख्ती का दौर: औचक निरीक्षण के निर्देश
कुमाऊं कमिश्नर के इस एक्शन के बाद पूरे नैनीताल जिले में गैस वितरण व्यवस्था की निगरानी बढ़ा दी गई है। सभी पूर्ति निरीक्षकों (Supply Inspectors) को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में गैस गोदामों और वितरण वाहनों की अचानक चेकिंग करें। गैस सिलेंडरों की घटतौली (कम गैस होना) और अवैध खरीद-फरोख्त करने वालों के खिलाफ अब ‘गैंगस्टर एक्ट’ जैसी सख्त धाराओं के तहत भी विचार किया जा सकता है।
पारदर्शी व्यवस्था की ओर कदम
हल्द्वानी में सामने आया यह मामला केवल एक घटना नहीं, बल्कि भ्रष्ट तंत्र की ओर इशारा करता है जिसे दीपक रावत जैसे अधिकारियों की सक्रियता ही ध्वस्त कर सकती है। कुमाऊं प्रशासन अब वितरण प्रक्रिया को डिजिटल ट्रैक करने और ‘वन-टू-वन’ वेरिफिकेशन पर जोर दे रहा है ताकि भविष्य में हल्द्वानी गैस सिलेंडर कालाबाजारी जैसी घटनाओं पर पूर्ण विराम लग सके।



