नई दिल्ली। देश के दिग्गज उद्योगपति अनिल अंबानी के बेटे जय अनमोल अंबानी की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (RHFL) से जुड़े 228 करोड़ रुपये के कथित बैंक धोखाधड़ी मामले में शनिवार को लगातार दूसरे दिन जय अनमोल अंबानी से पूछताछ की। दिल्ली स्थित सीबीआई मुख्यालय में हुई इस पूछताछ के दौरान जांच एजेंसी ने मामले के विभिन्न पहलुओं और ऋण वितरण की प्रक्रियाओं को लेकर कड़े सवाल दागे।
दिल्ली मुख्यालय में 6 घंटे तक चली सवालों की बौछार
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, जय अनमोल अंबानी शनिवार सुबह करीब 11 बजे दिल्ली स्थित सीबीआई मुख्यालय पहुंचे। यहां जांच अधिकारियों की एक विशेष टीम ने उनसे करीब छह घंटे तक सघन पूछताछ की, जो शाम 4 बजे तक चली। इससे पहले शुक्रवार को भी उनसे घंटों सवाल-जवाब किए गए थे।
सीबीआई के सूत्रों का कहना है कि जय अनमोल से मुख्य रूप से उन वित्तीय फैसलों और प्रक्रियाओं के बारे में पूछा गया, जिनके जरिए बैंक से लिए गए कर्ज का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल हुआ। इस दौरान उनके बयानों को दर्ज किया गया है और जरूरत पड़ने पर उन्हें फिर से तलब किया जा सकता है।
क्या है पूरा मामला? (The RHFL Case Breakdown)
यह पूरा मामला रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (RHFL) द्वारा बैंक ऋण के पुनर्भुगतान में चूक और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ा है। सीबीआई ने यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (पूर्व में आंध्रा बैंक) की एक शिकायत के आधार पर दिसंबर 2025 में प्राथमिकी (FIR) दर्ज की थी।
मामले के मुख्य बिंदु:
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धोखाधड़ी की राशि: यूनियन बैंक को करीब 228.06 करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष वित्तीय नुकसान पहुंचाने का आरोप है।
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कुल ऋण बोझ: जांच में सामने आया है कि कंपनी ने यूनियन बैंक सहित कुल 18 बैंकों और वित्तीय संस्थानों से लगभग 5,572.35 करोड़ रुपये का ऋण लिया था।
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NPA का खेल: कंपनी ने कर्ज की किश्तें चुकाना बंद कर दिया, जिसके बाद साल 2019 में इस खाते को गैर-निष्पादित संपत्ति (NPA) घोषित कर दिया गया।
बैंक का आरोप है कि कंपनी ने ऋण लेते समय वित्तीय संस्थानों को गुमराह किया और आपराधिक साजिश के तहत धन का दुरुपयोग किया, जिससे सरकारी बैंकों को भारी चपत लगी।
आरोपियों की फेहरिस्त में बड़े नाम
सीबीआई द्वारा दर्ज की गई एफआईआर में केवल जय अनमोल अंबानी ही नहीं, बल्कि कंपनी के कई तत्कालीन वरिष्ठ अधिकारी भी नामजद हैं।
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जय अनमोल अंबानी: रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड के तत्कालीन पदाधिकारी और अनिल अंबानी के पुत्र।
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रवींद्र सुधालकर: कंपनी के पूर्व सीईओ और पूर्व पूर्णकालिक निदेशक।
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अन्य: कुछ अज्ञात सरकारी अधिकारी और निजी व्यक्ति भी जांच के दायरे में हैं।
जांच एजेंसी का आरोप है कि इन अधिकारियों ने आपराधिक कदाचार (Criminal Misconduct) के जरिए बैंक के साथ धोखाधड़ी की और नियमों को ताक पर रखकर ऋण राशि को डायवर्ट किया।
छापेमारी और अब तक की कार्रवाई
सीबीआई इस मामले में पिछले साल से ही आक्रामक रुख अपनाए हुए है। 6 दिसंबर 2025 को औपचारिक रूप से केस दर्ज करने के बाद, जांच एजेंसी ने 9 दिसंबर 2025 को एक साथ कई ठिकानों पर छापेमारी की थी।
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मुंबई में रेड: विशेष सीबीआई अदालत से वारंट मिलने के बाद, जय अनमोल अंबानी के आवास और रिलायंस होम फाइनेंस के दो कॉर्पोरेट कार्यालयों की तलाशी ली गई।
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दस्तावेज जब्त: छापेमारी के दौरान सीबीआई ने कई डिजिटल उपकरण और महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए थे, जिनका विश्लेषण वर्तमान पूछताछ का आधार बना है।
कॉरपोरेट जगत में हलचल
अनिल अंबानी समूह की कंपनियों के वित्तीय संकट और अब उनके बेटे से सीबीआई की इस पूछताछ ने कॉरपोरेट जगत में नई चर्चा छेड़ दी है। हालांकि, इस पूरे मामले पर रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड या अंबानी परिवार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या सफाई जारी नहीं की गई है।
कानूनी पेंच और भविष्य की राह
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सीबीआई को पूछताछ और दस्तावेजों के विश्लेषण में ‘मनी ट्रेल’ (पैसे के लेन-देन के पुख्ता सबूत) मिलते हैं, तो आने वाले दिनों में गिरफ्तारी जैसी कड़ी कार्रवाई भी हो सकती है। फिलहाल, जांच एजेंसी यह सुनिश्चित करने में जुटी है कि क्या बैंकों से लिया गया पैसा किसी अन्य शेल कंपनी या व्यक्तिगत निवेश में इस्तेमाल किया गया था।
जय अनमोल अंबानी से लगातार दो दिनों की पूछताछ यह संकेत देती है कि जांच एजेंसी इस हाई-प्रोफाइल बैंक धोखाधड़ी मामले की तह तक जाने के लिए तैयार है। 228 करोड़ रुपये का यह मामला बैंकिंग सेक्टर की पारदर्शिता और बड़े कॉरपोरेट घरानों की जवाबदेही पर एक बार फिर सवालिया निशान लगा रहा है।



