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देहरादून: 15 साल बाद भू-माफियाओं के चंगुल से मुक्त हुई विस्थापित दंपति की जमीन, जिला प्रशासन ने दिलाया हक

The Hill India News
Last updated: February 17, 2026 1:53 pm
The Hill India News
Published: February 17, 2026
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देहरादून (ब्यूरो): उत्तराखंड में भू-माफियाओं और अवैध कब्जेदारों के खिलाफ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के ‘जीरो टॉलरेंस’ विजन का असर अब धरातल पर दिखने लगा है। राजधानी देहरादून के पछवादून क्षेत्र में जिला प्रशासन ने एक बड़ी नजीर पेश करते हुए 15 वर्षों से लंबित भूमि विवाद का समाधान कर दिया है। टिहरी बांध परियोजना के अंतर्गत विस्थापित एक निम्न मध्यम वर्गीय पहाड़ी दंपति, जो अपनी ही जमीन के लिए डेढ़ दशक से दर-दर भटक रहा था, उन्हें प्रशासन ने न केवल न्याय दिलाया बल्कि उनकी जमीन पर विधिवत कब्जा भी सुनिश्चित किया।

Contents
अटक फार्म में 15 साल पुराना अवैध निर्माण ध्वस्तजिलाधिकारी के निर्देश पर गठित हुई ‘स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम’जांच में हुआ चौंकाने वाला खुलासाप्रशासन का एक्शन: गन्ने के खेतों के बीच दिलाया मालिकाना हकभावुक हुआ पीड़ित दंपति; मुख्यमंत्री और प्रशासन का जताया आभारजिलाधिकारी का संदेश: भू-माफियाओं के विरुद्ध जारी रहेगी कार्रवाईसुशासन और न्याय की जीत

अटक फार्म में 15 साल पुराना अवैध निर्माण ध्वस्त

पूरा मामला तहसील विकासनगर के अंतर्गत परगना पछवादून के ग्राम अटक फार्म का है। यह क्षेत्र टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड (टिहरी बांध परियोजना) से विस्थापित परिवारों के पुनर्वास हेतु चिन्हित किया गया था। यहाँ शिकायतकर्ता सुमेरचंद और अन्य लाभार्थियों को आवासीय भूखंड संख्या-29 आवंटित किया गया था। लेकिन, बीते 15 वर्षों से इस कीमती भूमि पर भू-माफियाओं और स्थानीय प्रभावशाली लोगों ने कब्जा जमा रखा था। हद तो तब हो गई जब इस आवंटित भूखंड पर अवैध निर्माण और खेती शुरू कर दी गई।

जिलाधिकारी के निर्देश पर गठित हुई ‘स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम’

जब यह प्रकरण देहरादून जिलाधिकारी के संज्ञान में आया, तो उन्होंने जमीन कब्जे के इस ‘जंगलराज’ पर त्वरित प्रहार करने के निर्देश दिए। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने उप जिलाधिकारी (SDM) के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय संयुक्त जांच टीम गठित की। इस टीम में:

  • तहसील विकासनगर के सर्वे लेखपाल और सर्व कानूनगो

  • राजस्व उपनिरीक्षक (पुनर्वास) एवं राजस्व निरीक्षक (पुनर्वास)

  • सहायक अभियंता (पुनर्वास)

जांच टीम ने पुनर्वास स्थल अटक फार्म में स्थलीय निरीक्षण किया। टीम ने टिहरी बांध परियोजना द्वारा स्वीकृत नक्शों और राजस्व अभिलेखों का बारीकी से मिलान किया।

जांच में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

राजस्व अभिलेखों के मिलान के दौरान यह पाया गया कि आवंटित भूखंड संख्या-15, 16, 17, 27, 28 और 29, खसरा संख्या 301, 302 और 303 के हिस्से हैं। ये जमीनें विशेष रूप से टिहरी बांध विस्थापितों के लिए खरीदी गई थीं। जांच में स्पष्ट हुआ कि स्वर्गीय कुंदन लाल जोशी के वारिसान ने इन भूखंडों पर अवैध रूप से कब्जा कर रखा था और वहां गन्ने की खेती की जा रही थी। विस्थापित परिवार को अपनी ही जमीन की चौखट तक पहुँचने से रोका जा रहा था।

प्रशासन का एक्शन: गन्ने के खेतों के बीच दिलाया मालिकाना हक

जांच रिपोर्ट मिलते ही जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया। जिलाधिकारी के आदेश पर पुलिस और राजस्व विभाग की भारी मौजूदगी में अवैध कब्जा हटाने की कार्रवाई शुरू की गई। खसरा संख्या 301, 302 और 303 से अवैध अतिक्रमण को पूरी तरह साफ किया गया। अंततः, 17 फरवरी 2026 को शिकायतकर्ता सुमेरचंद और अन्य लाभार्थियों को उनके आवंटित भूखंड संख्या-29 पर विधिसम्मत कब्जा दिला दिया गया।

भावुक हुआ पीड़ित दंपति; मुख्यमंत्री और प्रशासन का जताया आभार

15 साल के लंबे इंतजार और संघर्ष के बाद जब सुमेरचंद और उनकी पत्नी को अपनी भूमि का वास्तविक अधिकार मिला, तो उनकी आँखें भर आईं। कब्जा प्राप्त करने के बाद दंपति ने जिलाधिकारी कार्यालय पहुँचकर अपना आभार व्यक्त किया। लाभार्थी महिला ने अपने भाई के साथ जिलाधिकारी से मुलाकात की और कहा, “हमें उम्मीद नहीं थी कि इस प्रभावशाली कब्जे से हमें कभी अपनी जमीन वापस मिलेगी, लेकिन मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन की सक्रियता ने हमारी उम्मीदों को नई जिंदगी दी है।”

जिलाधिकारी का संदेश: भू-माफियाओं के विरुद्ध जारी रहेगी कार्रवाई

मामले के सफल निस्तारण के बाद जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि पात्र लाभार्थियों और निर्बल वर्ग के अधिकारों की रक्षा करना प्रशासन की प्राथमिकता है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, “सरकारी या पुनर्वास की भूमि पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। भू-माफियाओं के विरुद्ध जिला प्रशासन की सख्त कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी।”

सुशासन और न्याय की जीत

विकासनगर का यह प्रकरण प्रदेश के अन्य हिस्सों के लिए भी एक संदेश है कि यदि पीड़ित व्यक्ति सही मंच पर अपनी आवाज उठाए, तो प्रशासन न्याय दिलाने में सक्षम है। यह कार्रवाई न केवल सुमेरचंद के परिवार के लिए राहत लेकर आई है, बल्कि उन हजारों विस्थापित परिवारों में भी विश्वास जगाया है जो आज भी पुनर्वास की समस्याओं से जूझ रहे हैं।

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