देहरादून (उत्तराखंड)। देवभूमि की शांत वादियों में अपराध की धमक अब डराने लगी है। बुधवार को उत्तराखंड की राजधानी देहरादून का सबसे व्यस्ततम इलाका ‘तिब्बती मार्केट’ गोलियों की तड़तड़ाहट से थर्रा उठा। शहर के बीचों-बीच एक गैस एजेंसी संचालक की सरेआम हत्या ने न केवल पुलिस के इकबाल को चुनौती दी है, बल्कि राज्य की पुष्कर सिंह धामी सरकार को भी विपक्ष के तीखे हमलों के केंद्र में ला खड़ा किया है।
वारदात: व्यस्त बाजार में मौत का तांडव
मिली जानकारी के अनुसार, 40 वर्षीय गैस एजेंसी संचालक अर्जुन शर्मा बुधवार को अपने नियमित कार्य में व्यस्त थे। इसी दौरान तिब्बती मार्केट के निकट अज्ञात हमलावरों ने उन्हें निशाना बनाते हुए ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। सरेराह हुई इस फायरिंग से बाजार में भगदड़ मच गई। हमलावर वारदात को अंजाम देकर बड़ी आसानी से फरार होने में कामयाब रहे। अर्जुन शर्मा को तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। दिनदहाड़े हुई इस हत्या ने राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है।
गणेश गोदियाल का कड़ा प्रहार: ‘पुलिस बनी मंत्रियों की निजी सेवक’
इस जघन्य हत्याकांड के बाद कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस प्रदेश मुख्यालय में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता गणेश गोदियाल ने सरकार को आड़े हाथों लिया। गोदियाल ने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि राज्य में कानून का शासन समाप्त हो चुका है और ‘जंगलराज’ की स्थिति पैदा हो गई है।
गोदियाल के संबोधन के मुख्य बिंदु:
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पुलिस की भूमिका पर सवाल: गोदियाल ने कहा कि राज्य की पुलिस अब आम नागरिकों की सुरक्षा के बजाय सत्ताधारी दल के राजनीतिक हितों को साधने और मंत्रियों की व्यक्तिगत सेवा में लगी हुई है।
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मुख्यमंत्री की उदासीनता: उन्होंने आरोप लगाया कि जब कांग्रेस ने उधम सिंह नगर, हरिद्वार और देहरादून में बिगड़ते हालातों की चेतावनी दी थी, तब मुख्यमंत्री को सकारात्मक कदम उठाने चाहिए थे, लेकिन उन्होंने विपक्ष की बातों को नजरअंदाज कर दिया।
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भटकाने वाली राजनीति: गोदियाल ने तंज कसते हुए कहा कि सरकार बुनियादी मुद्दों और सुरक्षा पर ध्यान देने के बजाय डेमोग्राफिक चेंज, लव जिहाद और लैंड जिहाद जैसे भावनात्मक मुद्दों में जनता को उलझाए रखना चाहती है।
अफसरशाही पर निशाना: ‘नाकारे अधिकारियों का पद पर बने रहना बेमानी’
गणेश गोदियाल ने केवल राजनेताओं को ही नहीं, बल्कि पुलिस के आला अधिकारियों को भी कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि पुलिस की निष्ठा जनता के प्रति होनी चाहिए, न कि किसी नेता की कुर्सी के प्रति।
“पुलिस के उच्च पदों पर बैठे अधिकारियों के नाकारेपन और उनकी उदासीनता की कीमत आज राज्य की जनता अपनी जान देकर चुका रही है। जो अधिकारी अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी निभाने में विफल रहे हैं, उन्हें अपने पदों पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है,” गोदियाल ने दो टूक शब्दों में कहा।
कानून व्यवस्था: विपक्ष बनाम सरकार
उत्तराखंड में पिछले कुछ महीनों में अपराध के ग्राफ में तेजी देखी गई है। हरिद्वार से लेकर उधम सिंह नगर तक और अब राजधानी के पॉश इलाकों में होती सरेआम हत्याओं ने सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर बड़े सवालिया निशान लगा दिए हैं। कांग्रेस का आरोप है कि पुलिस का खुफिया तंत्र पूरी तरह फेल हो चुका है और अपराधियों के मन से कानून का खौफ खत्म हो गया है।
गोदियाल ने जनता को आगाह करते हुए कहा कि यदि सरकार अब भी गहरी नींद से नहीं जागती है, तो जनता को अपनी सुरक्षा और हक के लिए खुद जागरूक होना पड़ेगा।
आंदोलन की चेतावनी
देहरादून में हुए इस हत्याकांड के बाद कांग्रेस अब इसे बड़ा मुद्दा बनाने की तैयारी में है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर राजभवन कूच और जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन किए जा सकते हैं। अर्जुन शर्मा की हत्या ने स्थानीय व्यापारियों में भी रोष पैदा कर दिया है, जो अब सड़कों पर उतरकर न्याय की गुहार लगा रहे हैं।
सुरक्षा और विश्वास का संकट
राजधानी के व्यस्ततम बाजार में एक व्यापारी की हत्या केवल एक आपराधिक घटना नहीं है, बल्कि यह प्रशासन के प्रति जनता के विश्वास की हत्या भी है। क्या उत्तराखंड की पुलिस केवल रसूखदारों की सुरक्षा तक सीमित हो गई है? क्या आम आदमी अब अपने घर से बाहर निकलने में भी डरेगा? अर्जुन शर्मा हत्याकांड ने इन सवालों को हवा दे दी है। अब देखना यह होगा कि धामी सरकार इन बढ़ते अपराधों पर लगाम कसने के लिए क्या ठोस कदम उठाती है।



