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The Hill India > Blog > देश > लोकतंत्र के महापर्व में बड़े सुधार की तैयारी: 25 साल बाद दिल्ली में जुटेगा निर्वाचन अधिकारियों का महाकुंभ
देशफीचर्ड

लोकतंत्र के महापर्व में बड़े सुधार की तैयारी: 25 साल बाद दिल्ली में जुटेगा निर्वाचन अधिकारियों का महाकुंभ

The Hill India News
Last updated: February 7, 2026 12:04 pm
The Hill India News
Published: February 7, 2026
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नई दिल्ली/देहरादून: भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़, पारदर्शी और तकनीक-अनुकूल बनाने की दिशा में केंद्रीय चुनाव आयोग (ECI) एक ऐतिहासिक कदम उठाने जा रहा है। आगामी 24 फरवरी को देश की राजधानी दिल्ली स्थित भव्य ‘भारत मंडपम’ में एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की जाएगी। इस बैठक की सबसे खास बात यह है कि करीब ढाई दशक (25 साल) के लंबे अंतराल के बाद देश के सभी राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) और राज्य निर्वाचन आयुक्त (SEC) एक ही मेज पर बैठकर चुनावी भविष्य की रूपरेखा तैयार करेंगे।

Contents
एक मंच पर दिखेंगे राज्यों और केंद्र के चुनाव प्रहरी‘कॉमन वोटर रोल’: एक देश, एक मतदाता सूची का विजनEVM शेयरिंग: पंचायत से लेकर संसद तक एक ही मशीन‘ECI-NET’ डिजिटल प्लेटफॉर्म और तकनीकी नवाचारउत्तराखंड की भूमिका और तैयारीबेहतर चुनावी भविष्य की ओर कदम

एक मंच पर दिखेंगे राज्यों और केंद्र के चुनाव प्रहरी

पिछली बार इस तरह की संयुक्त बैठक वर्ष 1999 में आयोजित की गई थी। अब 2026 में, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की अध्यक्षता में होने जा रही यह बैठक चुनावी सुधारों के लिहाज से मील का पत्थर साबित हो सकती है। इस बैठक के लिए आधिकारिक निमंत्रण पत्र 6 फरवरी को ही सभी राज्यों, जिनमें उत्तराखंड भी शामिल है, को प्राप्त हो चुका है। उत्तराखंड राज्य निर्वाचन आयोग और मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने इस महाबैठक के लिए अपनी ओर से कानूनी और तकनीकी रिपोर्ट तैयार करना शुरू कर दिया है।


‘कॉमन वोटर रोल’: एक देश, एक मतदाता सूची का विजन

इस महाबैठक का सबसे महत्वपूर्ण एजेंडा Common Voter Roll (कॉमन वोटर रोल) है। वर्तमान व्यवस्था में लोकसभा और विधानसभा चुनावों के लिए केंद्रीय चुनाव आयोग मतदाता सूची तैयार करता है, जबकि निकाय और पंचायत चुनावों के लिए राज्य निर्वाचन आयोग अपनी अलग सूची बनाता है। इससे न केवल संसाधनों का दोहराव होता है, बल्कि मतदाताओं के बीच भी असमंजस की स्थिति रहती है।

  • क्या होगा फायदा? यदि कॉमन वोटर रोल पर सहमति बनती है, तो भविष्य में लोकसभा, विधानसभा, नगर निकाय और त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों के लिए केवल एक ही मतदाता सूची का उपयोग होगा।

  • सटीकता और बचत: इससे सरकारी खजाने पर आर्थिक बोझ कम होगा और मतदाता सूची में होने वाली त्रुटियों की संभावना न्यूनतम हो जाएगी।


EVM शेयरिंग: पंचायत से लेकर संसद तक एक ही मशीन

बैठक का दूसरा बड़ा बिंदु ईवीएम शेयरिंग (EVM Sharing) है। अब तक देश में आम चुनाव और विधानसभा चुनावों में केंद्रीय चुनाव आयोग की अत्याधुनिक ईवीएम मशीनों का उपयोग होता है। लेकिन कई राज्यों में पंचायत और निकाय चुनाव आज भी मतपत्रों (Ballot Paper) या पुरानी तकनीक वाली मशीनों से होते हैं।

केंद्रीय चुनाव आयोग चाहता है कि राज्यों के पास मौजूद ईवीएम के बुनियादी ढांचे को इस तरह एकीकृत किया जाए कि उनका उपयोग निकाय और पंचायत चुनावों में भी प्रभावी ढंग से किया जा सके। इससे न केवल चुनावी प्रक्रिया तेज होगी, बल्कि मतगणना में भी पारदर्शिता और शुद्धता आएगी।


‘ECI-NET’ डिजिटल प्लेटफॉर्म और तकनीकी नवाचार

हाल ही में केंद्रीय चुनाव आयोग द्वारा लॉन्च किया गया ECI-NET डिजिटल प्लेटफॉर्म इस बैठक के केंद्र में रहेगा। इस प्लेटफॉर्म के जरिए पूरे देश के निर्वाचन आंकड़ों को डिजिटल रूप से जोड़ा गया है।

विशेषज्ञों का मत है: “ECI-NET के माध्यम से राज्यों के चुनाव आयोगों को भी एक ही सुरक्षित नेटवर्क पर लाना लक्ष्य है। इससे डेटा का आदान-प्रदान आसान होगा और ‘डुप्लीकेट वोटर्स’ की पहचान करना संभव हो सकेगा।”

बैठक के दौरान तकनीकी विशेषज्ञ राज्य निर्वाचन आयुक्तों को इस प्लेटफॉर्म के प्रभावी उपयोग के बारे में ट्रेनिंग देंगे और राज्यों की भौगोलिक चुनौतियों के अनुसार उनके सुझाव भी मांगेंगे।


उत्तराखंड की भूमिका और तैयारी

उत्तराखंड राज्य निर्वाचन आयोग और मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय को पत्र मिलने के बाद राज्य स्तर पर हलचल तेज हो गई है। उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य के लिए ‘कॉमन वोटर रोल’ और ‘ईवीएम शेयरिंग’ काफी फायदेमंद साबित हो सकते हैं, क्योंकि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में अलग-अलग चुनावी सूचियां तैयार करना एक बड़ी चुनौती होती है। 24 फरवरी को होने वाली चर्चा में उत्तराखंड के प्रतिनिधि राज्य की विशिष्ट परिस्थितियों और तकनीकी बाधाओं को आयोग के समक्ष रख सकते हैं।


बेहतर चुनावी भविष्य की ओर कदम

24 फरवरी की यह बैठक केवल अधिकारियों का जमावड़ा नहीं है, बल्कि यह भारतीय चुनाव प्रणाली को डिजिटल इंडिया के विजन से जोड़ने की एक गंभीर कोशिश है। यदि कॉमन वोटर रोल और ईवीएम शेयरिंग जैसे प्रस्तावों पर आम सहमति बनती है, तो यह देश की चुनावी राजनीति में पिछले तीन दशकों का सबसे बड़ा सुधार होगा। इससे न केवल चुनावों के आयोजन में लगने वाले समय और धन की बचत होगी, बल्कि आम नागरिक के लिए वोट डालने की प्रक्रिया और भी सरल हो जाएगी।

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