नई दिल्ली: देश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर ले जाने और ‘विकसित भारत 2047’ के संकल्प को साकार करने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। बजट 2026-27 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने देश के विभिन्न हिस्सों को जोड़ने के लिए सात नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर (High-Speed Rail Corridor) के निर्माण की घोषणा की है। लगभग 16 लाख करोड़ रुपये के अनुमानित निवेश वाले इस प्रोजेक्ट से भारत के 40 से 50 प्रमुख शहर एक एकीकृत सुपरफास्ट नेटवर्क के दायरे में आ जाएंगे।
अर्थव्यवस्था का गेमचेंजर: 350 किमी/घंटा की रफ्तार से दौड़ेंगी ट्रेनें
रेल मंत्रालय के अनुसार, इन कॉरिडोर पर ट्रेनों की रफ्तार 250 से 350 किमी प्रति घंटे के बीच होगी। इसके लिए सरकार स्वदेशी ‘वंदे भारत’ हाई-स्पीड प्लेटफॉर्म और जापान की विश्व प्रसिद्ध बुलेट ट्रेन टेक्नोलॉजी का हाइब्रिड मॉडल इस्तेमाल करेगी। यह नेटवर्क न केवल महानगरों की दूरी कम करेगा, बल्कि टियर-2 और टियर-3 शहरों को भी विकास की मुख्यधारा से जोड़ेगा।
इन 7 प्रमुख कॉरिडोर से बदलेगा भूगोल
सरकार ने उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक कनेक्टिविटी का एक जाल बुनने की योजना बनाई है। 4,000 किलोमीटर से अधिक लंबे इन गलियारों का विवरण इस प्रकार है:
1. दिल्ली-वाराणसी हाई-स्पीड कॉरिडोर: धार्मिक पर्यटन को पंख
यह कॉरिडोर दिल्ली (सराय काले खां) से शुरू होकर नोएडा, जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट, मथुरा, आगरा, लखनऊ और अयोध्या (लिंक रोड) होते हुए वाराणसी पहुंचेगा।
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समय की बचत: दिल्ली से वाराणसी का सफर अब मात्र 3 घंटे 50 मिनट का रह जाएगा।
2. मुंबई-पुणे-हैदराबाद कॉरिडोर: समय की भारी बचत
इस कॉरिडोर के चालू होने के बाद मुंबई और पुणे के बीच की दूरी महज 48 मिनट में सिमट जाएगी। यह महाराष्ट्र, कर्नाटक और तेलंगाना के व्यापारिक रिश्तों को और मजबूती देगा।
3. दक्षिण भारत का ‘डायमंड ट्रायंगल’ (हैदराबाद-बेंगलुरु-चेन्नई)
आईटी और मैन्युफैक्चरिंग हब को जोड़ने के लिए यह एक हाइब्रिड कॉरिडोर होगा। इसमें हैदराबाद-बेंगलुरु, बेंगलुरु-चेन्नई और हैदराबाद-चेन्नई के बीच बुलेट ट्रेनें चलेंगी, जो दक्षिण भारत के पांच राज्यों के लिए ‘बूस्टर डोज’ साबित होंगी।
4. वाराणसी-सिलीगुड़ी कॉरिडोर: पूर्वोत्तर का नया द्वार
यह कॉरिडोर यूपी, बिहार और पश्चिम बंगाल को जोड़ते हुए पूर्वोत्तर भारत (Northeast) के प्रवेश द्वार सिलीगुड़ी तक सबसे तेज रास्ता मुहैया कराएगा।
इन्फ्रास्ट्रक्चर और निवेश: 16 लाख करोड़ का मास्टरप्लान
वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि इन परियोजनाओं पर काम एक साथ शुरू करने की तैयारी है, ताकि 2035 से 2040 के बीच अधिकांश खंड चालू हो सकें। नेशनल हाई-स्पीड रेल कॉरपोरेशन (NHSRCL) ने पहले ही सात में से छह कॉरिडोर की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) रेल मंत्रालय को सौंप दी है।
बजट हाइलाइट्स:
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रेलवे के लिए 2.78 लाख करोड़ रुपये का रिकॉर्ड बजटीय आवंटन।
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पूंजीगत खर्च के लिए 2.93 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान।
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भूमि अधिग्रहण और डिजाइन के लिए विशेष फंड।
पर्यटन, आईटी हब और ट्रांसपोर्ट का संगम
यह हाई-स्पीड नेटवर्क केवल पटरियों का बिछना नहीं है, बल्कि नए आर्थिक केंद्रों का जन्म है।
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धार्मिक पर्यटन: अयोध्या, मथुरा, वाराणसी, प्रयागराज और तिरुपति जैसे तीर्थस्थलों पर दर्शनार्थियों की संख्या में भारी वृद्धि होगी।
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आईटी हब: नोएडा, पुणे, बेंगलुरु, चेन्नई और हैदराबाद के बीच पेशेवरों की आवाजाही आसान होगी।
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ट्रांसपोर्ट हब: जेवर एयरपोर्ट और नवी मुंबई एयरपोर्ट को इन स्टेशनों से सीधे जोड़ा जाएगा।
[Image: Map showing the 7 proposed high-speed rail routes across India]
पर्यावरण और रोजगार पर प्रभाव
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का कहना है कि हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर से हवाई यात्रा और सड़क परिवहन पर दबाव कम होगा, जिससे कार्बन फुटप्रिंट में भारी कटौती होगी। स्टेशनों के आसपास नए ‘सैटेलाइट टाउनशिप’ विकसित होंगे, जिनसे निर्माण और सेवा क्षेत्र में लाखों नए रोजगार पैदा होने का अनुमान है।
“2047 के विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में ये कॉरिडोर क्रांतिकारी कदम होंगे। यह न केवल लॉजिस्टिक्स लागत घटाएंगे बल्कि व्यापार करने की सुगमता को भी विश्व स्तर पर ले जाएंगे।” — अश्विनी वैष्णव, रेल मंत्री
बुलेट रफ्तार से बढ़ता भारत
मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर के 15 अगस्त 2027 तक पूरा होने की उम्मीद के बीच, इन 7 नए कॉरिडोर की घोषणा ने भारत को वैश्विक रेलवे मानचित्र पर शीर्ष देशों की कतार में खड़ा कर दिया है। 2025 से 2040 का कालखंड भारतीय रेल के कायाकल्प का स्वर्णिम युग साबित होने वाला है।



