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सुखवंत सिंह आत्महत्या मामला: नैनीताल हाईकोर्ट से आरोपियों को मिली बड़ी राहत, गिरफ्तारी पर लगी रोक

नैनीताल/हल्द्वानी: उत्तराखंड के बहुचर्चित सुखवंत सिंह आत्महत्या मामला में नैनीताल हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है। काशीपुर के किसान सुखवंत सिंह द्वारा आत्महत्या किए जाने के मामले में नामजद आरोपियों की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी पर फिलहाल रोक लगा दी है। साथ ही, अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी पक्षों को जांच में पूर्ण सहयोग करने के निर्देश दिए हैं।

हाईकोर्ट की सुनवाई और कोर्ट का रुख

अवकाशकालीन न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की एकलपीठ के समक्ष आज इस मामले से संबंधित तीन से अधिक याचिकाओं पर सुनवाई हुई। याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट से उनके खिलाफ दर्ज मुकदमे को निरस्त करने और गिरफ्तारी पर रोक लगाने की गुहार लगाई थी।

मामले की दलीलें सुनने के बाद, न्यायमूर्ति साह की पीठ ने पूर्व में इसी मामले के अन्य आरोपी ‘कुलविंदर सिंह बनाम उत्तराखंड राज्य’ में दिए गए आदेश का हवाला देते हुए वर्तमान याचिकाकर्ताओं को भी राहत प्रदान की। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब तक मामले की अगली सुनवाई नहीं हो जाती, तब तक जगवीर सिंह, मोहित कुमार चौहान और एक अन्य आरोपी की गिरफ्तारी नहीं की जाएगी। हालांकि, कोर्ट ने यह शर्त भी रखी है कि इन सभी को पुलिस और गठित SIT जांच में पूरा सहयोग करना होगा।

जमीनी विवाद और ठगी का पेचीदा मामला

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पक्ष रखते हुए सरकारी अधिवक्ता ने कहा कि यह मामला सीधे तौर पर एक बड़े जमीनी विवाद से जुड़ा हुआ है। सरकार ने इस केस को अत्यंत गंभीरता से लिया है। वर्तमान में मामले की जांच जारी है और पुलिस साक्ष्यों को जुटाने में लगी है।

दूसरी ओर, याचिकाकर्ताओं के वकीलों का तर्क था कि उन्हें इस मामले में दुर्भावनापूर्ण तरीके से फंसाया गया है। उनका कहना है कि यह दो पक्षों के बीच जमीन का आपसी विवाद है और आत्महत्या के लिए उकसाने जैसा कोई ठोस आधार उनके खिलाफ नहीं है। उन्होंने दलील दी कि जब मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी पर पहले ही रोक लग चुकी है, तो उन्हें भी समान राहत मिलनी चाहिए।


क्या है पूरा सुखवंत सिंह आत्महत्या मामला?

बता दें कि 10 और 11 जनवरी की दरमियानी रात को हल्द्वानी के काठगोदाम क्षेत्र स्थित एक होटल में काशीपुर निवासी किसान सुखवंत सिंह ने जहर खाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली थी। इस घटना ने पूरे उत्तराखंड को झकझोर कर रख दिया था क्योंकि आत्महत्या से ठीक पहले सुखवंत सिंह ने सोशल मीडिया पर ‘लाइव’ आकर अपनी पीड़ा व्यक्त की थी।

सोशल मीडिया लाइव और गंभीर आरोप

अपने आखिरी वीडियो में सुखवंत सिंह ने पुलिस प्रशासन और स्थानीय भू-माफियाओं पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने भावुक होते हुए बताया था कि:

  1. उनके साथ जमीन के सौदे में लगभग चार करोड़ रुपये की धोखाधड़ी हुई है।

  2. जब उन्होंने पुलिस से शिकायत की, तो उनकी सुनने के बजाय उन्हें ही डराया और धमकाया गया।

  3. आरोपियों के रसूख के कारण वह मानसिक और आर्थिक रूप से टूट चुके थे।

किसान की मौत के बाद उत्तराखंड पुलिस ने मृतक के भाई की तहरीर पर आईटीआई थाने (काशीपुर) में कुल 26 लोगों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज किया था।


DGP कर रहे हैं मॉनिटरिंग, SIT को सौंपी गई जांच

सुखवंत सिंह आत्महत्या मामला अब एक हाई-प्रोफाइल केस बन चुका है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए उत्तराखंड के पुलिस महानिदेशक (DGP) खुद इसकी मॉनिटरिंग कर रहे हैं। शासन ने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। हालांकि, याचिकाकर्ताओं की तरफ से कोर्ट में यह बात भी उठाई गई कि एसआईटी को जांच सौंपे जाने के बावजूद जमीनी स्तर पर अभी सक्रिय कार्यवाही शुरू होने की प्रतीक्षा है।

इन 26 लोगों पर दर्ज है मुकदमा

पुलिस ने इस मामले में एक लंबी फेहरिस्त तैयार की है। नामजद आरोपियों में अमरजीत सिंह, दिव्या, रविंद्र कौर, लवप्रीत कौर, कुलविंदर सिंह उर्फ जस्सी, हरदीप कौर, आशीष चौहान, गिरवर सिंह, महीपाल सिंह, शिवेंद्र सिंह, विमल, देवेंद्र, राजेंद्र, गुरप्रेम सिंह, जगपाल सिंह, जगवीर राय, मनप्रीत कलसी, अमित, मोहित, सुखवंत सिंह पन्नू, वीरपाल सिंह पन्नू, बलवन्त सिंह बक्सौरा, बिजेन्द्र, पूजा और जहीर शामिल हैं।

अगली सुनवाई

नैनीताल हाईकोर्ट ने अब इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 15 अप्रैल, 2026 की तिथि निर्धारित की है। कोर्ट ने सरकार को सभी याचिकाओं पर अपना विस्तृत जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। तब तक आरोपियों को गिरफ्तारी से अंतरिम राहत मिली रहेगी, लेकिन उन पर जांच में बाधा न डालने का दबाव रहेगा।

यह देखना दिलचस्प होगा कि 15 अप्रैल को होने वाली सुनवाई में SIT अपनी क्या रिपोर्ट पेश करती है और क्या पीड़ित परिवार को वह न्याय मिल पाएगा जिसकी मांग पूरा उत्तराखंड कर रहा है।

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