
रुद्रप्रयाग। विश्व प्रसिद्ध ग्यारहवें ज्योतिर्लिंग भगवान केदारनाथ के दर्शनों की अभिलाषा रखने वाले शिवभक्तों के लिए यह साल खुशियों की नई सौगात लेकर आने वाला है। साल 2013 की उस भीषण केदारनाथ आपदा के जख्मों को भरते हुए, उत्तराखंड सरकार और लोक निर्माण विभाग ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। 13 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद, बाबा केदार का वह पारंपरिक रामबाड़ा-गरुड़चट्टी पैदल मार्ग अब श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए पूरी तरह तैयार है।
आगामी यात्रा सीजन 2026 से श्रद्धालु उसी पुराने मार्ग से केदारपुरी की ओर कदम बढ़ा पाएंगे, जिसका पौराणिक और आध्यात्मिक महत्व सदियों पुराना है। यह न केवल यात्रा को सुगम बनाएगा, बल्कि आपदा के बाद से वैकल्पिक मार्गों पर बढ़ते दबाव को भी कम करेगा।

2013 की विभीषिका और एक नया सवेरा
जून 2013 में मंदाकिनी की लहरों ने जो तबाही मचाई थी, उसमें केदारनाथ जाने वाला मुख्य मार्ग रामबाड़ा से आगे पूरी तरह जमींदोज हो गया था। रामबाड़ा, जो कभी यात्रा का मुख्य पड़ाव हुआ करता था, पूरी तरह नक्शे से मिट गया था। इसके बाद प्रशासन ने आनन-फानन में गौरीकुंड-लिंचोली-केदारनाथ मार्ग को वैकल्पिक तौर पर तैयार किया था।
हालांकि, श्रद्धालुओं के मन में हमेशा उस पुराने मार्ग की यादें ताज़ा रहीं। अब लोक निर्माण विभाग (PWD) गुप्तकाशी ने दुर्गम पहाड़ियों और विपरीत मौसम की चुनौतियों को मात देते हुए इस मार्ग का चरणबद्ध तरीके से पुनर्निर्माण कार्य लगभग पूर्ण कर लिया है।
इंजीनियरिंग का बेजोड़ नमूना: दो चरणों में हुआ निर्माण
इस पुराने मार्ग को फिर से अस्तित्व में लाना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं था। बदरी-केदार मंदिर समिति (BKTC) के सदस्य विनीत पोस्ती ने बताया कि पुनर्निर्माण कार्य को दो मुख्य हिस्सों में विभाजित किया गया था:
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प्रथम चरण: केदारनाथ धाम से गरुड़चट्टी तक का 3.3 किलोमीटर लंबा हिस्सा सबसे पहले तैयार किया गया।
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द्वितीय चरण: सबसे कठिन चुनौती गरुड़चट्टी से रामबाड़ा के बीच की 5.3 किलोमीटर लंबी दूरी थी, जो आपदा में सर्वाधिक क्षतिग्रस्त हुई थी। अब यह हिस्सा भी बनकर तैयार है।
अधिशासी अभियंता राजविंद सिंह ने पुष्टि की है कि मार्ग का सिविल कार्य पूरा हो चुका है और वर्तमान में यात्रियों की सुरक्षा के लिए रेलिंग लगाने का अंतिम चरण का कार्य युद्धस्तर पर चल रहा है।
अब श्रद्धालुओं के पास होंगे दो विकल्प
2026 की केदारनाथ यात्रा इस मायने में खास होगी कि यात्रियों के पास धाम तक पहुँचने के लिए अब दो अलग-अलग रास्तों के विकल्प होंगे:
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विकल्प 1 (पुनर्निर्मित पारंपरिक मार्ग): गौरीकुंड – रामबाड़ा – गरुड़चट्टी – केदारनाथ।
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विकल्प 2 (वर्तमान मार्ग): गौरीकुंड – रामबाड़ा – लिंचोली – केदारनाथ।
दूरी में आंशिक परिवर्तन: सुरक्षा और भूगर्भीय स्थितियों को देखते हुए नए संरेखण (Alignment) के कारण रामबाड़ा से केदारनाथ की दूरी जो पहले 7 किमी थी, वह अब बढ़कर 8.6 किलोमीटर हो गई है। हालांकि, यह मार्ग पहले की तुलना में अधिक चौड़ा और सुरक्षित बनाया गया है।
सुरक्षा और सुविधाओं का ‘कवच’
प्रशासन का मुख्य फोकस इस बार ‘सुविधा के साथ सुरक्षा’ पर है। विनीत पोस्ती के अनुसार, पुराने मार्ग पर श्रद्धालुओं को निम्नलिखित सुविधाएं मिलेंगी:
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रेन शेल्टर: अचानक होने वाली बर्फबारी या बारिश से बचने के लिए जगह-जगह आधुनिक रेन शेल्टर।
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पेयजल व्यवस्था: पूरे मार्ग पर शुद्ध पेयजल की निरंतर आपूर्ति।
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मजबूत रेलिंग: गहरी खाइयों वाली जगहों पर हाई-ग्रेड स्टील की रेलिंग ताकि आवागमन सुरक्षित रहे।
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विश्राम स्थल: लंबी चढ़ाई के दौरान यात्रियों के बैठने के लिए बेंच और विश्राम स्थल।
पौराणिक और धार्मिक महत्व: पांडवों का पदचिह्न
केदारनाथ धाम का महत्व केवल पर्यटन तक सीमित नहीं है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, महाभारत युद्ध के बाद जब पांडव अपने परिजनों की हत्या के पाप से मुक्ति चाहते थे, तब उन्होंने इसी हिमालयी क्षेत्र में भगवान शिव की खोज की थी।
गरुड़चट्टी का महत्व: पुराने मार्ग पर स्थित गरुड़चट्टी वही स्थान है जहाँ आदि गुरु शंकराचार्य से जुड़ी कई मान्यताएं हैं। इस मार्ग के खुलने से केदारनाथ का वह प्राचीन स्वरूप फिर से जीवंत होगा, जिसे भक्त 2013 से पहले अनुभव करते थे।
महाशिवरात्रि पर खुलेगी कपाटों की ‘किस्मत’
उत्तराखंड की चारधाम यात्रा 2026 का बिगुल बज चुका है। बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि 23 अप्रैल 2026 निर्धारित की जा चुकी है। वहीं, केदारनाथ धाम के कपाट खुलने के शुभ मुहूर्त की घोषणा परंपरा के अनुसार महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर की जाएगी।
फिलहाल केदारपुरी बर्फ की सफेद चादर से ढकी हुई है, लेकिन प्रशासन और बीकेटीसी केदारनाथ यात्रा 2026 को अब तक की सबसे भव्य और सुरक्षित यात्रा बनाने की तैयारियों में जुटे हैं।
13 साल बाद रामबाड़ा-गरुड़चट्टी मार्ग का पुनर्जीवित होना उत्तराखंड के बुनियादी ढांचे और अटूट आस्था की जीत है। यह नया मार्ग न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देगा, बल्कि देश-दुनिया से आने वाले लाखों शिवभक्तों के सफर को यादगार बनाएगा।



