फीचर्डविदेश

ट्रंप की चेतावनी दरकिनार: बीजिंग में ब्रिटिश पीएम कीर स्टार्मर की हुंकार, कहा- ‘चीन को नजरअंदाज करना बुद्धिमानी नहीं’

बीजिंग/लंदन। वैश्विक राजनीति के बदलते समीकरणों के बीच ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की चीन यात्रा ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में नई बहस छेड़ दी है। पिछले आठ वर्षों में किसी ब्रिटिश प्रधानमंत्री की यह पहली चीन यात्रा है। एक ओर जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ब्रिटेन को चीन के साथ बढ़ती नजदीकियों को लेकर ‘खतरनाक’ परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है, वहीं स्टार्मर ने दो-टूक कहा है कि दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था से आंखें मूंद लेना ब्रिटेन के लिए समझदारी भरा फैसला नहीं होगा।

शुक्रवार को बीजिंग में व्यापार प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए स्टार्मर ने स्पष्ट किया कि “ब्रिटेन के पास चीन को देने के लिए बहुत कुछ है” और दोनों देशों के बीच आर्थिक प्रगति के द्वार खोलने का यह सही समय है।

पश्चिमी देशों का बदलता रुख: अमेरिका से दूरी, चीन से नजदीकी?

स्टार्मर का यह दौरा महज एक द्विपक्षीय यात्रा नहीं है, बल्कि यह उस व्यापक वैश्विक बदलाव का हिस्सा है जिसमें कई पश्चिमी देश अमेरिका की कठोर नीतियों से असहज महसूस कर रहे हैं। गौरतलब है कि हाल के हफ्तों में फ्रांस, कनाडा और फिनलैंड के शीर्ष नेता भी बीजिंग की दहलीज पर दस्तक दे चुके हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि डोनाल्ड ट्रंप के संरक्षणवादी (Protectionist) रुख और टैरिफ की धमकियों ने यूरोपीय देशों को अपने आर्थिक हितों की रक्षा के लिए बीजिंग की ओर रुख करने पर मजबूर कर दिया है। कीर स्टार्मर की यह यात्रा इसी ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

ट्रंप की चेतावनी और स्टार्मर का पलटवार

गुरुवार को डोनाल्ड ट्रंप ने एक सख्त बयान जारी कर कहा था कि ब्रिटेन के लिए चीन के साथ संबंध रखना “अत्यधिक खतरनाक” साबित हो सकता है। हालांकि, प्रधानमंत्री स्टार्मर ने इस टिप्पणी को सहजता से खारिज कर दिया। उन्होंने एक साक्षात्कार में कहा कि अमेरिका और ब्रिटेन बेहद करीबी सहयोगी हैं और इस दौरे से पहले ट्रंप की टीम को भरोसे में लिया गया था।

स्टार्मर ने तंज कसते हुए यह भी याद दिलाया कि स्वयं डोनाल्ड ट्रंप के भी आने वाले महीनों में चीन दौरे की उम्मीद है। उन्होंने कहा, “चीन वैश्विक मंच पर एक वास्तविकता है। हम अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए व्यावहारिक रुख अपना रहे हैं।”

शी जिनपिंग और ली कियांग के साथ ‘सकारात्मक’ वार्ता

बीजिंग में प्रवास के दौरान कीर स्टार्मर ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री ली कियांग के साथ गहन चर्चा की। इस मुलाकात के दौरान दोनों पक्षों ने घनिष्ठ आर्थिक संबंधों और व्यापारिक बाधाओं को दूर करने की आवश्यकता पर बल दिया।

बैंक ऑफ चाइना में आयोजित ‘यूके-चीन व्यापार मंच’ में स्टार्मर ने कहा कि बैठकों का स्तर उम्मीद के मुताबिक रहा है और वास्तविक प्रगति की नींव रख दी गई है। उन्होंने व्यापार प्रतिनिधियों को आश्वस्त किया कि ब्रिटेन निवेश और तकनीक के क्षेत्र में चीन के साथ सहयोग बढ़ाने के लिए तैयार है।

चीन का रुख: ‘पारस्परिक लाभ’ पर जोर

ट्रंप की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए बीजिंग के विदेश मंत्रालय ने सधा हुआ रुख अपनाया है। मंत्रालय ने कहा कि चीन सभी देशों के साथ पारस्परिक लाभ और हितों के आधार पर सहयोग मजबूत करने के लिए तैयार है। चीन इस दौरे को ब्रिटेन के साथ बिगड़े हुए संबंधों को ‘रीसेट’ करने के अवसर के रूप में देख रहा है, जो हांगकांग और सुरक्षा मुद्दों के कारण पिछले कुछ वर्षों से ठंडे बस्ते में थे।


रणनीतिक विश्लेषण: आखिर ब्रिटेन के लिए क्यों जरूरी है चीन?

ब्रिटेन-चीन संबंध के इस नए अध्याय के पीछे कई ठोस आर्थिक कारण हैं:

  1. आर्थिक मंदी से उबरने की कोशिश: ब्रेक्सिट के बाद ब्रिटेन अपनी अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए नए बाजारों की तलाश में है। चीन जैसे विशाल बाजार को छोड़ना आत्मघाती हो सकता है।

  2. सप्लाई चेन: वैश्विक सप्लाई चेन में चीन की भूमिका को नकारा नहीं जा सकता। ब्रिटिश उद्योगों को कच्चे माल और विनिर्माण के लिए चीन की आवश्यकता है।

  3. जलवायु परिवर्तन: हरित ऊर्जा और जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए चीन की तकनीक और सहयोग ब्रिटेन के लिए अनिवार्य है।

  4. संतुलन की कूटनीति: स्टार्मर यह दिखाना चाहते हैं कि ब्रिटेन की विदेश नीति केवल वाशिंगटन के निर्देशों पर नहीं चलती।

क्या वाशिंगटन और लंदन के रिश्तों में आएगी दरार?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि स्टार्मर की यह ‘चीन नीति’ ट्रंप प्रशासन के साथ तनाव पैदा कर सकती है। ट्रंप ‘अमेरिका फर्स्ट’ की नीति के तहत चीन को अपना सबसे बड़ा प्रतिद्वंद्वी मानते हैं। ऐसे में ब्रिटेन का चीन के साथ रेड कार्पेट बिछाना भविष्य में AUKUS जैसे रक्षा समझौतों और खुफिया जानकारी साझा करने (Five Eyes) की व्यवस्था पर असर डाल सकता है।

“ब्रिटेन एक दोधारी तलवार पर चल रहा है। उसे एक तरफ अपनी सुरक्षा और अमेरिका के साथ पारंपरिक दोस्ती बचानी है, तो दूसरी तरफ अपने व्यापारिक हितों के लिए चीन को साधना है।” — एक वरिष्ठ कूटनीतिक विश्लेषक

कीर स्टार्मर की बीजिंग यात्रा ने यह साफ कर दिया है कि 2026 की भू-राजनीति अब ‘ब्लैक एंड व्हाइट’ नहीं रही। आर्थिक मजबूरियां कूटनीतिक निष्ठाओं पर भारी पड़ रही हैं। स्टार्मर ने “ब्रिटेन के पास देने के लिए बहुत कुछ है” कहकर एक नया नैरेटिव सेट कर दिया है। अब देखना यह होगा कि ब्रिटेन इस आर्थिक लाभ और अमेरिकी नाराजगी के बीच कैसे संतुलन बिठाता है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button