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PM मोदी और वेनेज़ुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति के बीच संवाद; संकट के बीच भारत ने बढ़ाया कूटनीतिक हाथ

नई दिल्ली/काराकस। वैश्विक राजनीति में मचे उथल-पुथल के बीच भारत ने एक बार फिर अपनी स्वतंत्र और संतुलित विदेश नीति का परिचय दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को वेनेज़ुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज के साथ टेलीफोन पर उच्च स्तरीय वार्ता की। यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब वेनेज़ुएला अपने सबसे कठिन राजनीतिक संकट से गुजर रहा है और अमेरिका के साथ उसके संबंध ऐतिहासिक निचले स्तर पर हैं।

दोनों नेताओं के बीच हुई इस चर्चा ने स्पष्ट कर दिया है कि भारत, ऊर्जा सुरक्षा और ग्लोबल साउथ (Global South) के हितों को ध्यान में रखते हुए वेनेज़ुएला के साथ अपने द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है।

कूटनीतिक शिष्टाचार या रणनीतिक कदम?

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर इस बातचीत की जानकारी साझा करते हुए लिखा कि भारत और वेनेज़ुएला की साझेदारी को आगामी वर्षों में सभी संभावित क्षेत्रों में विस्तारित किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बातचीत केवल एक औपचारिक संवाद नहीं है, बल्कि दक्षिण अमेरिका में भारत के बढ़ते प्रभाव और ऊर्जा जरूरतों को सुनिश्चित करने की दिशा में एक सोची-समझी रणनीति है।

अमेरिका-वेनेज़ुएला तनाव की पृष्ठभूमि

यह बातचीत उस समय हुई है जब अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें अमेरिका और वेनेज़ुएला के बीच बढ़ते टकराव पर टिकी हैं। ज्ञात हो कि 3 जनवरी, 2026 को अमेरिकी सेना ने काराकस में एक गुप्त सैन्य अभियान चलाकर तत्कालीन राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को हिरासत में ले लिया था। वर्तमान में वे न्यूयॉर्क में कानूनी कार्रवाई का सामना कर रहे हैं।

मादुरो की गिरफ्तारी के बाद वेनेज़ुएला की कमान डेल्सी रोड्रिगेज ने कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में संभाली है। वाशिंगटन और काराकस के बीच इस तनावपूर्ण माहौल में पीएम मोदी का रोड्रिगेज को फोन करना भारतीय कूटनीति की उस स्वायत्तता को दर्शाता है, जहाँ भारत अपने हितों को सर्वोपरि रखता है।

सहयोग के प्रमुख क्षेत्र: ऊर्जा से लेकर डिजिटल तकनीक तक

प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, दोनों देशों ने सहयोग के एक व्यापक ढांचे पर सहमति जताई है। भारत-वेनेज़ुएला संबंध अब केवल तेल और गैस तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि इनका दायरा काफी विस्तृत होगा:

  • ऊर्जा सुरक्षा: वेनेज़ुएला दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार वाले देशों में से एक है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए वेनेज़ुएला को एक प्रमुख स्रोत के रूप में देखता है।

  • व्यापार और निवेश: आर्थिक संबंधों को मजबूत करने के लिए व्यापारिक बाधाओं को दूर करने पर चर्चा हुई।

  • डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI): भारत ने अपनी डिजिटल तकनीक और ‘UPI’ जैसे मॉडल्स को वेनेज़ुएला के साथ साझा करने की इच्छा जताई है।

  • स्वास्थ्य और कृषि: दवाओं की आपूर्ति और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कृषि क्षेत्र में तकनीकी सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी।

‘ग्लोबल साउथ’ की आवाज बनता भारत

बातचीत के दौरान ‘ग्लोबल साउथ’ (विकासशील और अल्पविकसित देशों) की अवधारणा पर विशेष जोर दिया गया। पीएम मोदी ने बार-बार वैश्विक मंचों पर विकासशील देशों की चिंताओं को उठाने की बात कही है। वेनेज़ुएला के साथ संवाद इसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है। दोनों नेताओं ने इस बात को रेखांकित किया कि विकासशील देशों को एक-दूसरे के संसाधनों और विशेषज्ञता का लाभ उठाना चाहिए ताकि वैश्विक अनिश्चितताओं का सामना सामूहिक रूप से किया जा सके।


भू-राजनीतिक मायने: अमेरिका के लिए क्या है संकेत?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भारत ने इस वार्ता के जरिए यह संदेश दिया है कि वह किसी भी देश के साथ अपने संबंधों को तीसरे देश के चश्मे से नहीं देखता। हालांकि भारत के अमेरिका के साथ घनिष्ठ रणनीतिक संबंध हैं, लेकिन वेनेज़ुएला के साथ संवाद जारी रखकर भारत ने अपनी ‘बहु-पक्षीय कूटनीति’ (Multi-alignment) को और पुख्ता किया है।

“भारत की विदेश नीति अब प्रतिक्रियाशील (Reactive) नहीं बल्कि सक्रिय (Proactive) है। वेनेज़ुएला में नेतृत्व परिवर्तन और अस्थिरता के बावजूद, भारत ने अपने भविष्य के हितों को सुरक्षित करने के लिए मौजूदा प्रशासन के साथ संवाद का रास्ता चुना है।” — अंतरराष्ट्रीय संबंधों के जानकार

भविष्य की राह: चुनौतियां और संभावनाएं

भले ही दोनों देश संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की बात कर रहे हों, लेकिन राह आसान नहीं है। वेनेज़ुएला पर लगे अमेरिकी प्रतिबंध और वहां की आंतरिक राजनीतिक स्थिति व्यापारिक लेन-देन में अड़चनें पैदा कर सकती हैं। हालांकि, भारत ने पूर्व में भी ‘रुपया-भुगतान प्रणाली’ या अन्य वैकल्पिक माध्यमों से व्यापार करने की क्षमता दिखाई है।

आने वाले महीनों में दोनों देशों के बीच मंत्रिस्तरीय यात्राओं का दौर शुरू हो सकता है। यदि ऊर्जा और निवेश के क्षेत्र में ठोस समझौते होते हैं, तो यह न केवल भारत की अर्थव्यवस्था के लिए फायदेमंद होगा, बल्कि दक्षिण अमेरिका में भारत की उपस्थिति को भी नई मजबूती प्रदान करेगा।

पीएम मोदी और डेल्सी रोड्रिगेज की यह बातचीत वैश्विक कूटनीति के शतरंज पर भारत की एक सधी हुई चाल है। यह संवाद केवल एक संकटग्रस्त देश को समर्थन मात्र नहीं है, बल्कि भारत-वेनेज़ुएला संबंध के एक नए अध्याय की शुरुआत है, जिसमें स्वायत्तता, आर्थिक हित और वैश्विक भाईचारे का संतुलन दिखाई देता है।

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