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केदारनाथ धाम न्यूज़: मंदिर परिसर में मोबाइल और रील्स बनाने पर पूर्ण प्रतिबंध की तैयारी, लगेगा भारी जुर्माना

रुद्रप्रयाग। द्वादश ज्योतिर्लिंगों में अग्रणी भगवान केदारनाथ धाम की आध्यात्मिक गरिमा और मंदिर की मर्यादा को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए प्रशासन ने इस बार कड़े कदम उठाने का निर्णय लिया है। केदारनाथ मंदिर परिसर में मोबाइल फोन के इस्तेमाल, वीडियोग्राफी और सोशल मीडिया के लिए ‘रील्स’ बनाने की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए बदरी-केदार मंदिर समिति (BKTC) और रुद्रप्रयाग जिला प्रशासन ने इस पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की कार्ययोजना तैयार की है।

नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ न केवल कानूनी कार्रवाई की जाएगी, बल्कि भारी जुर्माना वसूलने का प्रावधान भी प्रस्तावित है।

आस्था के केंद्र में ‘रील’ का बढ़ता दखल

पिछले कुछ वर्षों में केदारनाथ धाम में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है। लेकिन इसके साथ ही एक नई चुनौती भी सामने आई है—श्रद्धालुओं द्वारा मंदिर परिसर के भीतर और आसपास मोबाइल फोन से निरंतर फोटो खींचना और वीडियो बनाना। कई बार देखा गया है कि ‘इन्फ्लुएंसर्स’ और युवा श्रद्धालु आस्था से अधिक सोशल मीडिया कंटेंट पर ध्यान देते हैं, जिससे मंदिर की पवित्रता और वहां की शांति भंग होती है।

रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी प्रतीक जैन ने स्पष्ट किया कि मंदिर परिसर में मोबाइल के अनावश्यक प्रयोग से आम श्रद्धालुओं को दर्शन करने में भारी असुविधा होती है। उन्होंने कहा, “हम मंदिर समिति के साथ मिलकर एक विस्तृत गाइडलाइन बना रहे हैं। इस बार यात्रा सीजन के दौरान अनुशासनहीनता को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”

BKTC का कड़ा रुख: ‘दर्शन व्यवस्था में न हो व्यवधान’

बदरी-केदार मंदिर समिति के उपाध्यक्ष विजय कप्रवान ने इस संबंध में आधिकारिक बयान देते हुए कहा कि समिति की उच्च स्तरीय बैठकों में यह निष्कर्ष निकला है कि मोबाइल फोन के कारण दर्शन की कतारें प्रभावित होती हैं। श्रद्धालु घंटों लाइन में लगने के बाद जब गर्भगृह या मुख्य परिसर में पहुंचते हैं, तो वहां फोटो लेने के चक्कर में रुक जाते हैं, जिससे पीछे चल रहे हजारों यात्रियों का समय बर्बाद होता है।

समिति का तर्क है कि केदारनाथ एक जागृत धाम है, जहां लोग शांति और आत्मिक अनुभव के लिए आते हैं। इसे पिकनिक स्पॉट या वीडियो शूटिंग स्थल में तब्दील नहीं होने दिया जा सकता।


प्रस्तावित नियम और नई कार्ययोजना के मुख्य बिंदु

प्रशासन और मंदिर समिति द्वारा तैयार की जा रही कार्ययोजना में निम्नलिखित बिंदुओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है:

  1. चेक-पॉइंट्स की स्थापना: मंदिर में प्रवेश करने से पहले ही श्रद्धालुओं के मोबाइल फोन जमा करने या उन्हें स्विच ऑफ रखने के निर्देश दिए जाएंगे।

  2. डिजिटल सर्विलांस: मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से रील्स बनाने वालों पर नजर रखी जाएगी।

  3. जुर्माना और दंड: यदि कोई श्रद्धालु चोरी-छिपे वीडियोग्राफी करता पाया जाता है, तो उसका उपकरण जब्त किया जा सकता है और उस पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा।

  4. जागरूकता बोर्ड: पूरी यात्रा मार्ग और धाम परिसर में विभिन्न भाषाओं में चेतावनी बोर्ड लगाए जाएंगे।

स्थानीय तीर्थ पुरोहितों और भक्तों का समर्थन

प्रशासन के इस फैसले का स्थानीय तीर्थ पुरोहितों ने भी स्वागत किया है। पुरोहितों का कहना है कि केदारनाथ धाम की अपनी एक प्राचीन परंपरा और मर्यादा है। हाल के दिनों में कई ऐसी घटनाएं सामने आईं जिनमें मंदिर के गर्भगृह के वीडियो वायरल हुए, जिससे करोड़ों हिंदुओं की आस्था को ठेस पहुंची। केदारनाथ धाम मोबाइल बैन का यह निर्णय न केवल सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह धाम की गरिमा को भी सुरक्षित रखेगा।

“मंदिर भगवान की आराधना का स्थल है। वहां जाकर कैमरे के लेंस से नहीं, बल्कि श्रद्धा की नजर से दर्शन होने चाहिए। इस प्रतिबंध से दर्शन व्यवस्था सुगम और शांत होगी।” — एक स्थानीय तीर्थ पुरोहित

यात्रा सीजन 2026: चुनौतियों से निपटने की तैयारी

इस वर्ष भी केदारनाथ यात्रा में लाखों की भीड़ जुटने की उम्मीद है। कपाट खुलने के बाद उमड़ने वाले हुजूम को नियंत्रित करना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती होती है। ऐसे में ‘क्राउड मैनेजमेंट’ के लिए मोबाइल प्रतिबंध एक प्रभावी टूल साबित हो सकता है। जब लोग मोबाइल का उपयोग नहीं करेंगे, तो दर्शन की प्रक्रिया तेज होगी और धक्का-मुक्की की घटनाएं कम होंगी।

रुद्रप्रयाग जिला प्रशासन ने पर्यटकों और श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे इस पवित्र यात्रा के दौरान मर्यादा का पालन करें और डिजिटल उपकरणों के बजाय बाबा केदार के ध्यान और भक्ति में समय व्यतीत करें।

केदारनाथ धाम में मोबाइल और रील्स पर प्रतिबंध लगाने की यह पहल उत्तराखंड पर्यटन और चारधाम यात्रा के प्रबंधन में एक मील का पत्थर साबित हो सकती है। यह कदम संदेश देता है कि आस्था और तकनीक के बीच एक स्पष्ट सीमा रेखा होनी चाहिए, विशेषकर वहां जहां करोड़ों लोगों की श्रद्धा जुड़ी हो। आने वाले हफ्तों में जुर्माने की राशि और अन्य प्रतिबंधों की आधिकारिक घोषणा विस्तृत रूप से की जाएगी।

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