
हैदराबाद/देहरादून | भारतीय विमानन क्षेत्र के सबसे प्रतिष्ठित आयोजन “WINGS INDIA 2026” में देवभूमि उत्तराखंड ने एक बड़ी ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम की है। हैदराबाद के बेगमपेट एयरपोर्ट पर आयोजित इस भव्य समारोह में उत्तराखंड को “Best State for Promotion of Aviation & Ecosystem” (एविएशन और इकोसिस्टम को बढ़ावा देने वाला सर्वश्रेष्ठ राज्य) के प्रतिष्ठित राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।
यह पुरस्कार मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के उस विजन की पुष्टि करता है, जिसके तहत उन्होंने दुर्गम हिमालयी राज्य में हवाई कनेक्टिविटी को विकास का मुख्य आधार बनाया है। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ने उत्तराखंड की टीम को यह गौरवशाली सम्मान प्रदान किया।
हैदराबाद में गूंजा उत्तराखंड का नाम
29 से 31 जनवरी 2026 तक चलने वाले इस अंतरराष्ट्रीय एविएशन इवेंट में देशभर के राज्यों और वैश्विक विमानन कंपनियों ने हिस्सा लिया। उत्तराखंड की ओर से सचिव सचिन कुर्वे, अपर सचिव आशीष चौहान और संजय टोलिया ने यह पुरस्कार ग्रहण किया। जूरी ने उत्तराखंड को एविएशन इंफ्रास्ट्रक्चर, हेली-टूरिज्म और नीतिगत सुधारों के मामले में अन्य राज्यों की तुलना में अग्रणी पाया।

चारधाम यात्रा और हेली-कनेक्टिविटी: सफलता का मुख्य आधार
उत्तराखंड की इस जीत के पीछे सबसे बड़ा कारण चारधाम यात्रा को ‘एविएशन तकनीक’ से जोड़ना रहा है। मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने केदारनाथ, बदरीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धामों के लिए न केवल हेली सेवाओं का विस्तार किया, बल्कि इसे पूरी तरह पारदर्शी और यात्री-अनुकूल भी बनाया।
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सुगम दर्शन: हेली सेवाओं के माध्यम से वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगों और सीमित समय वाले श्रद्धालुओं के लिए दर्शन की राह आसान हुई।
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सुरक्षा मानक: यात्रा के दौरान सुरक्षा, आपदा प्रबंधन और आपातकालीन मेडिकल सेवाओं (Air Ambulance) में हवाई संसाधनों के प्रभावी उपयोग को राष्ट्रीय स्तर पर एक ‘बेंचमार्क’ माना गया।
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इंफ्रास्ट्रक्चर विकास: नए हेलीपोर्ट और हेलीपैड का निर्माण कर राज्य ने साबित किया कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद कनेक्टिविटी को बेहतर किया जा सकता है।
उड़ान योजना और सीमांत क्षेत्रों का विकास
उत्तराखंड सरकार ने केंद्र सरकार की ‘उड़ान’ (UDAN) योजना का लाभ उठाकर पिथौरागढ़, चिन्यालीसौड़ और गौचर जैसे सीमांत क्षेत्रों को हवाई नेटवर्क से जोड़ने में तेजी दिखाई है। एयर स्ट्रिप्स के उन्नयन (Upgradation) और हेली-टूरिज्म को बढ़ावा देने की दिशा में राज्य द्वारा किए गए नीतिगत बदलावों ने निवेश के नए रास्ते खोले हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तराखंड की ‘हेली-फर्स्ट’ पॉलिसी ने न केवल पर्यटन को रफ्तार दी है, बल्कि आपदा के समय राहत कार्यों में भी यह तंत्र एक सुरक्षा कवच की तरह उभरा है।
मुख्यमंत्री धामी की प्रतिक्रिया: “टीम वर्क का परिणाम”
इस बड़ी सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसे प्रदेश की जनता और विभागीय टीम की सामूहिक जीत बताया। सीएम धामी ने कहा:
“यह राष्ट्रीय सम्मान उत्तराखंड के लिए पर्यटन, निवेश और रोजगार के नए द्वार खोलेगा। हम उत्तराखंड को देश का सबसे बड़ा ‘एविएशन और हेली-टूरिज्म हब’ बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हमारा लक्ष्य भविष्य में चारधाम यात्रा को और अधिक तकनीक-समर्थ और पर्यावरण-अनुकूल बनाना है।”
पुरस्कार के मायने और भविष्य की राह
विंग्स इंडिया 2026 में मिला यह पुरस्कार उत्तराखंड को ग्लोबल एविएशन मैप पर स्थापित करता है। इसके दूरगामी परिणाम निम्नलिखित क्षेत्रों में देखने को मिलेंगे:
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निवेश में बढ़ोतरी: राष्ट्रीय पहचान मिलने से बड़ी निजी एविएशन कंपनियां उत्तराखंड में अपना बेस बनाने को आकर्षित होंगी।
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रोजगार सृजन: ग्राउंड हैंडलिंग, पायलट ट्रेनिंग और एविएशन मेंटेनेंस जैसे क्षेत्रों में युवाओं के लिए नए अवसर पैदा होंगे।
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आर्थिक मजबूती: हवाई कनेक्टिविटी बढ़ने से पर्यटन राजस्व में सीधी वृद्धि होगी।
विकसित उत्तराखंड की नई उड़ान
सचिवालय से लेकर हैदराबाद के बेगमपेट एयरपोर्ट तक, उत्तराखंड के एविएशन मॉडल की गूँज सुनाई दे रही है। यह सम्मान केवल एक ट्रॉफी नहीं, बल्कि इस बात का प्रमाण है कि यदि नेतृत्व दूरदर्शी हो, तो हिमालय की ऊँचाइयाँ भी विकास की राह में बाधा नहीं बन सकतीं। 2026 में मिली यह उपलब्धि ‘विकसित उत्तराखंड’ के संकल्प को और अधिक शक्ति प्रदान करेगी।



