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‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’: स्वरोजगार को धार देने के लिए CM धामी का मिशन मोड, अधिकारियों को दिए कड़े निर्देश

देहरादून उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य में बेरोजगारी को जड़ से मिटाने और युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के संकल्प को दोहराया है। गुरुवार को सचिवालय में आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने कृषि, पशुपालन, पर्यटन और उद्योग जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों से जुड़ी रोजगारपरक योजनाओं का लेखा-जोखा लिया। बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु ‘कौशल विकास’ और ‘स्वरोजगार के अवसरों का सरलीकरण’ रहा।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार की मंशा केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उनका शत-प्रतिशत लाभ पात्र व्यक्ति तक पहुंचाना है। उन्होंने अधिकारियों को दो टूक कहा— “पात्र लोगों को योजनाओं का समय पर और पूर्ण लाभ मिले, यह सुनिश्चित करना विभागों की प्राथमिक जिम्मेदारी है।”

स्वरोजगार योजनाओं में शानदार प्रगति: आंकड़ों की जुबानी

समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना (MSY) की प्रगति पर संतोष व्यक्त किया गया। आंकड़ों के अनुसार, मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना और इसके उन्नत संस्करण 2.0 के अंतर्गत पिछले चार वर्षों में निर्धारित 32 हजार के लक्ष्य को पार करते हुए 33,620 लाभार्थियों को लाभान्वित किया गया है। इन लाभार्थियों को कुल 202.72 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की गई है। सरकार ने आगामी वर्ष के लिए 9 हजार नए लाभार्थियों का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है।

मिलेट पॉलिसी और जी.आई. टैग: उत्तराखंडी उत्पादों का वैश्विक उभार

राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए मुख्यमंत्री ने ‘स्टेट मिलेट पॉलिसी’ की बारीकी से समीक्षा की।

  • विस्तार: 134 करोड़ रुपये की इस पॉलिसी के तहत मंडुवा, झंगोरा, और रामदाना जैसी फसलों को बढ़ावा दिया जा रहा है।

  • प्रगति: अब तक 5 हजार से अधिक गांवों के लगभग डेढ़ लाख किसान इससे जुड़ चुके हैं।

  • खरीद: राज्य भर में 216 क्रय केंद्र खोले गए हैं, जहां इस साल लक्ष्य से अधिक 5,386 मीट्रिक टन मिलेट की खरीद की जा चुकी है।

इसके अतिरिक्त, उत्तराखंड के 29 स्थानीय उत्पादों को जी.आई. टैग (GI Tag) मिलना राज्य के लिए गौरव की बात है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि अगले चरण में 25 अन्य उत्पादों को चिन्हित किया जाए ताकि ‘लोकल फॉर ग्लोबल’ के सपने को साकार किया जा सके।

हनी मिशन और कीवी उत्पादन पर विशेष फोकस

मुख्यमंत्री ने बागवानी के क्षेत्र में राज्य की विशिष्ट भौगोलिक परिस्थितियों का लाभ उठाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में ‘हनी मिशन’ के जरिए शहद उत्पादन की अपार संभावनाएं हैं।

  1. ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन: मुख्यमंत्री ने शहद के ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन की प्रक्रिया को तेज करने के निर्देश दिए ताकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेहतर दाम मिल सकें।

  2. कीवी और सेब: सेब की ‘अतिसघन बागवानी’ (High-Density Plantation) योजना और कीवी उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए किसानों को समय पर देयकों का भुगतान सुनिश्चित करने को कहा गया है।

  3. अध्ययन दल: सीएम ने निर्देश दिए कि जिन राज्यों में मौन पालन (Apiculture) में बेहतर कार्य हो रहा है, वहां अधिकारियों और विशेषज्ञों की टीम भेजकर सर्वश्रेष्ठ प्रथाओं (Best Practices) को उत्तराखंड में लागू किया जाए।

पर्यटन: होम-स्टे और स्वरोजगार की नई राह

देवभूमि की पर्यटन क्षमता को आर्थिक शक्ति में बदलने के लिए संचालित योजनाओं की भी समीक्षा की गई।

  • दीन दयाल उपाध्याय होम-स्टे योजना: पिछले चार वर्षों में राज्य में 780 नए होम-स्टे स्थापित किए गए हैं, जिसके लिए 188.58 करोड़ रुपये का वित्त पोषण किया गया है।

  • वीर चंद्र सिंह गढ़वाली योजना: इस योजना ने एक हजार से अधिक युवाओं को पर्यटन उद्यमी बनाया है, जिसमें 105 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता दी गई है।

  • मत्स्य पालन: प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के माध्यम से राज्य में 17,450 लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिला है।

उन्नति पोर्टल और पारदर्शिता पर जोर

प्रशासनिक कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए मुख्यमंत्री ने एक महत्वपूर्ण निर्देश दिया कि सभी उच्च स्तरीय बैठकों के कार्यवृत्त (Minutes of Meeting) अनिवार्य रूप से ‘उन्नति पोर्टल’ पर अपलोड किए जाएं। इससे योजनाओं की मॉनिटरिंग और उनके ‘आउटकम’ का सटीक मूल्यांकन किया जा सकेगा।

विकसित उत्तराखंड की ओर कदम

बैठक के समापन पर मुख्यमंत्री ने ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान को और प्रभावी बनाने का आह्वान किया। इस बैठक में कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज, गणेश जोशी और प्रमुख सचिव डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

कुल मिलाकर, धामी सरकार का फोकस अब केवल बजट आवंटन पर नहीं, बल्कि आवंटित बजट के ‘ग्राउंड इंपैक्ट’ पर है। यदि विभाग इन निर्देशों का सही ढंग से पालन करते हैं, तो उत्तराखंड आने वाले वर्षों में स्वरोजगार के क्षेत्र में हिमालयी राज्यों के लिए एक मॉडल बनकर उभरेगा।

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