उत्तराखंडफीचर्ड

उत्तराखंड में थम नहीं रहा सड़कों पर ‘खूनी खेल’, चमोली में गहरी खाई में गिरी कार; 26 वर्षीय युवक की दर्दनाक मौत

चमोली (उत्तराखंड): देवभूमि उत्तराखंड की सर्पीली और दुर्गम सड़कें एक बार फिर किसी के परिवार के चिराग को निगल गईं। चमोली जिले के नंदप्रयाग–नंदानगर मोटर मार्ग पर रविवार देर शाम एक हृदयविदारक सड़क हादसा सामने आया है। यहां सेरा गांव के पास एक अल्टो कार अनियंत्रित होकर सैकड़ों फीट गहरी खाई में जा गिरी। इस भीषण दुर्घटना में कार चालक की मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद से मृतक के परिवार में कोहराम मचा हुआ है और पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है।

बाजार से घर लौटते समय हुआ हादसा

प्राप्त जानकारी के अनुसार, मृतक की पहचान सुरेंद्र सिंह (26 वर्ष), पुत्र हिम्मत सिंह, निवासी ग्राम सेरा, नंदानगर के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि सुरेंद्र सिंह रविवार को नंदानगर बाजार गए थे। देर शाम जब वह अपनी कार (वाहन संख्या UK11 TA 3251) से वापस अपने गांव सेरा लौट रहे थे, तभी सेरा गांव के समीप मोड़ पर अचानक वाहन से नियंत्रण खो गया।

अंधेरा होने के कारण वाहन सीधे गहरी खाई की ओर लुढ़क गया। चीख-पुकार सुनकर स्थानीय ग्रामीण मौके की ओर दौड़े, लेकिन खाई इतनी गहरी थी कि रात के सन्नाटे में रेस्क्यू करना चुनौतीपूर्ण साबित हुआ।

पुलिस और ग्रामीणों का संयुक्त रेस्क्यू ऑपरेशन

हादसे की सूचना स्थानीय निवासी मनीष कुमार ने तत्काल नंदानगर थाने को दी। सूचना मिलते ही थाना प्रभारी के नेतृत्व में पुलिस की एक विशेष टीम घटनास्थल पर पहुंची। अंधेरे और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद पुलिस प्रशासन और स्थानीय ग्रामीणों ने मिलकर रेस्क्यू अभियान शुरू किया।

कड़ी मशक्कत के बाद पुलिस टीम खाई में क्षतिग्रस्त वाहन तक पहुँचने में सफल रही। सुरेंद्र सिंह वाहन के भीतर ही फंसे हुए थे। उन्हें बाहर निकालकर तत्काल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) नंदानगर ले जाया गया। हालांकि, नियति को कुछ और ही मंजूर था; अस्पताल पहुँचते ही डॉक्टरों ने सुरेंद्र को मृत घोषित कर दिया।

पुलिस की कार्रवाई और जांच

पुलिस ने बताया कि दुर्घटना इतनी भीषण थी कि कार के परखच्चे उड़ गए। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पंचनामा भर लिया है और पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया जाएगा। प्रारंभिक जांच में दुर्घटना का कारण अनियंत्रित होना बताया जा रहा है, हालांकि पुलिस अन्य तकनीकी पहलुओं की भी जांच कर रही है कि क्या वाहन में कोई खराबी थी या सड़क की स्थिति इसके लिए जिम्मेदार है।


उत्तराखंड: ‘मौत का हाईवे’ बनते जा रहे पहाड़ी रास्ते

उत्तराखंड में पिछले कुछ दिनों से सड़क हादसों का ग्राफ तेजी से बढ़ा है। इस चमोली सड़क हादसा के अलावा राज्य में अन्य जगहों पर भी मौत का तांडव देखने को मिला:

  1. मसूरी/कैंपटी फॉल: बीते शनिवार को कैंपटी फॉल क्षेत्र में एक कार अनियंत्रित होकर खाई में गिर गई थी, जिसमें एक युवक की जान चली गई।

  2. हरिद्वार-लक्सर मार्ग: रविवार दोपहर को कटारपुर गांव के पास कार और ई-रिक्शा की भिड़ंत में तीन लोगों की मौत हो गई और चार लोग गंभीर रूप से घायल हैं।

पहाड़ी क्षेत्रों में दुर्घटनाओं के प्रमुख कारण

विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों के अनुसार, पहाड़ों पर बढ़ते सड़क हादसों के पीछे कई कारण प्रमुख हैं:

  • तीखे मोड़ और सुरक्षा दीवार का अभाव: कई जगहों पर सड़कों के किनारे पैरापिट (सुरक्षा दीवार) न होने के कारण वाहन सीधे खाई में चले जाते हैं।

  • ओवरस्पीडिंग और थकान: बाजार से लौटते समय या लंबी दूरी तय करते समय चालकों को होने वाली थकान अक्सर घातक साबित होती है।

  • अंधेरा और कोहरा: सर्दियों के मौसम में शाम के समय कम दृश्यता (Visibility) भी दुर्घटनाओं का एक बड़ा कारण बनती है।

शोक में डूबा सेरा गांव

26 वर्षीय सुरेंद्र सिंह की मौत ने पूरे सेरा गांव को झकझोर कर रख दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि सुरेंद्र एक मिलनसार और मेहनती युवक था। इस हादसे ने एक बार फिर पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क सुरक्षा मानकों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि ऐसे डेंजर जोन (खतरनाक मोड़ों) पर क्रैश बैरियर लगाए जाएं ताकि भविष्य में ऐसी अनहोनी को रोका जा सके।

चमोली का यह नंदानगर दुर्घटना मामला एक चेतावनी है कि पहाड़ी रास्तों पर जरा सी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है। प्रशासन को सड़क सुरक्षा ऑडिट करने की आवश्यकता है, ताकि देवभूमि की सड़कों पर सफ़र सुरक्षित हो सके।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button