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77वां गणतंत्र दिवस: कर्तव्य पथ पर ‘नारी शक्ति’ का महा-गर्जन; जब बेटियों की कदमताल से थर्राया आसमान और गौरवान्वित हुआ हिंदुस्तान

नई दिल्ली | देश आज अपना 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है, लेकिन इस बार का उत्सव पिछले कई दशकों से अलग और खास है। दिल्ली के ऐतिहासिक कर्तव्य पथ पर जब देश की सैन्य शक्ति का प्रदर्शन शुरू हुआ, तो पूरी दुनिया की नजरें उन ‘शक्तियों’ पर टिकी थीं, जो कल तक घरों की दहलीज संभालती थीं, लेकिन आज सरहदों की हिफाजत और आसमान को चीरने का जज्बा रखती हैं। इस गणतंत्र दिवस की परेड केवल हथियारों का प्रदर्शन नहीं, बल्कि भारतीय रक्षा बलों में तेजी से बढ़ती ‘नारी शक्ति’ का विजय घोष है।

राष्ट्रपति के साथ ध्वजारोहण: अक्षिता धनखड़ का ऐतिहासिक गौरव

इस बार की परेड का सबसे भावुक और गौरवशाली क्षण वह था, जब हरियाणा के झज्जर जिले के एक छोटे से गांव कासनी की बेटी फ्लाइट लेफ्टिनेंट अक्षिता धनखड़ राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ राष्ट्रीय ध्वज फहराने के दौरान मौजूद रहीं।

अक्षिता की यात्रा किसी फिल्म की पटकथा से कम नहीं है। जनवरी 2023 में फ्लाइंग ऑफिसर के रूप में कमीशन पाने वाली अक्षिता ने अपनी कड़ी मेहनत और असाधारण प्रतिभा के बल पर महज तीन साल के भीतर फ्लाइट लेफ्टिनेंट का पद हासिल किया। दिल्ली विश्वविद्यालय के गुरु तेग बहादुर खालसा कॉलेज से पढ़ाई और एनसीसी कैडेट सार्जेंट मेजर के रूप में मिला प्रशिक्षण आज उन्हें देश की प्रथम नागरिक के बगल में खड़ा होने का गौरव दिला रहा है। उनके पिता और उनका ‘फौजियों वाला गांव’ आज इस बेटी की कामयाबी पर गर्व के आंसू बहा रहा है।


नौशेरा की ‘शेरनी’: सिमरन बाला ने संभाली पुरुषों के दल की कमान

गणतंत्र दिवस 2026 की परेड ने एक और रूढ़ि को तोड़ दिया है। जम्मू-कश्मीर के सीमावर्ती क्षेत्र नौशेरा की रहने वाली सहायक कमांडेंट सिमरन बाला ने इस बार सीआरपीएफ (CRPF) के उस दल का नेतृत्व किया, जिसमें 140 से अधिक पुरुष कर्मी शामिल थे।

26 वर्षीय सिमरन बाला की अगुवाई में जब सीआरपीएफ का दस्ता कर्तव्य पथ पर निकला, तो उनकी दहाड़ ने यह संदेश साफ कर दिया कि कमान संभालने की क्षमता जेंडर की मोहताज नहीं है। एक अशांत क्षेत्र से निकलकर देश के सबसे बड़े अर्धसैनिक बल में एक पुरुष टुकड़ी का नेतृत्व करना सिमरन की दृढ़ इच्छाशक्ति को दर्शाता है।


वायुसेना की कमान में ‘निकिता चौधरी’ का जलवा

भारतीय वायुसेना की मार्चिंग टुकड़ी ने जब कदमताल की, तो नजारा अद्भुत था। इस दल की अगुवाई स्क्वाड्रन लीडर जगदीश कुमार के साथ स्क्वॉड्रन लीडर निकिता चौधरी ने की। उनके साथ फ्लाइट लेफ्टिनेंट प्रखर चंद्रकार और फ्लाइट लेफ्टिनेंट दिनेश भी दल का नेतृत्व कर रहे थे।

निकिता चौधरी की उपस्थिति यह दर्शाती है कि भारतीय वायुसेना अब केवल पुरुषों का गढ़ नहीं रह गई है। इस बार तो एयरफोर्स बैंड में भी महिला संगीतकारों को शामिल कर सेना ने ‘समावेशिता’ की नई मिसाल पेश की है।


झांकियों में भी दिखा ‘सशक्त भारत’ और ‘सशक्त नारी’ का संगम

परेड के दौरान विभिन्न राज्यों और मंत्रालयों की झांकियों में भी महिलाओं की भूमिका को प्रमुखता से दिखाया गया। अंतरिक्ष मिशनों से लेकर रक्षा नवाचार (Defence Innovation) तक, हर क्षेत्र में महिलाओं के योगदान को इस बार के 77वें गणतंत्र दिवस नारी शक्ति थीम के साथ जोड़ा गया।

परेड की कुछ अन्य महिला-केंद्रित विशेषताएं:

  • ऑल-वुमन मार्चिंग कंटिंजेंट: अर्धसैनिक बलों और पुलिस की संयुक्त महिला टुकड़ियों ने अपनी अनुशासन और शक्ति का परिचय दिया।

  • डेयरडेविल्स में भागीदारी: मोटरसाइकिल पर हैरतअंगेज करतब दिखाने वाली महिला जांबाजों ने दर्शकों की सांसें थाम दीं।

  • स्वदेशी हथियार और महिलाएं: स्वदेशी रूप से विकसित ‘पिनाका’ और ‘आकाश’ मिसाइल प्रणालियों के संचालन में भी महिला अधिकारियों की सक्रिय भूमिका को प्रदर्शित किया गया।


यह तो बस शुरुआत है

आज कर्तव्य पथ पर अक्षिता धनखड़, सिमरन बाला और निकिता चौधरी जैसे चेहरों को देखकर करोड़ों भारतीय बेटियों की आंखों में नए सपने पल रहे हैं। यह परेड इस बात का सबूत है कि भारतीय सेना में महिलाएं अब केवल सहायक भूमिकाओं में नहीं, बल्कि ‘कॉम्बैट’ और ‘लीडरशिप’ भूमिकाओं में फ्रंट फुट पर खेल रही हैं।

77वां गणतंत्र दिवस भारत के लिए एक ऐसा भविष्य लेकर आया है, जहां ‘वीरता’ का कोई लिंग नहीं होता। यह नया भारत है, जहां बेटियां सीमा की रक्षा भी कर रही हैं और तिरंगे की शान भी बढ़ा रही हैं।

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