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77वां गणतंत्र दिवस: राष्ट्रपति ने दी ‘वीरता पुरस्कार’ को मंजूरी; मेजर अर्शदीप और नायब सूबेदार दोलेश्वर को ‘कीर्ति चक्र’, देखें पूरी लिस्ट

The Hill India News
Last updated: January 26, 2026 3:22 am
The Hill India News
Published: January 26, 2026
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Photo: IANS
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नई दिल्ली | देश आज अपना 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। इस गौरवशाली अवसर की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति और सशस्त्र बलों की सर्वोच्च कमांडर द्रौपदी मुर्मू ने भारतीय सेना के उन रणबांकुरों को सम्मानित करने की मंजूरी दी है, जिन्होंने अपनी जान की परवाह न करते हुए मां भारती की रक्षा की। सेना के अधिकारियों, जूनियर कमीशंड अधिकारियों (JCOs) और जवानों को उनके अदम्य साहस और विशिष्ट सेवाओं के लिए वीरता पुरस्कारों (Gallantry Awards) से नवाजा गया है।

Contents
कीर्ति चक्र: दुर्गम जंगलों और कठिन घाटियों के नायकशौर्य चक्र: 10 वीरों की गाथा, एक बलिदान को सलामशौर्य चक्र विजेताओं की मुख्य उपलब्धियां:विशिष्ट सेवा और अन्य पदकों का विवरणनागरिक सुरक्षा और आपदा प्रबंधन में योगदानराष्ट्र का गौरव हैं ये योद्धा

इन पुरस्कारों की सूची में 2 कीर्ति चक्र और 10 शौर्य चक्र शामिल हैं, जो शांति काल के दूसरे और तीसरे सबसे बड़े वीरता सम्मान हैं। यह सम्मान उन योद्धाओं की अटूट प्रतिबद्धता का प्रतीक है जिन्होंने सीमा पर घुसपैठ रोकने से लेकर आंतरिक सुरक्षा के कठिन अभियानों तक में दुश्मनों के दांत खट्टे किए हैं।

कीर्ति चक्र: दुर्गम जंगलों और कठिन घाटियों के नायक

इस वर्ष दो जांबाजों को कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया है, जिन्होंने मौत के करीब पहुंचकर जीत हासिल की:

  1. मेजर अर्शदीप सिंह (1 असम राइफल्स): 14 मई 2025 को भारत-म्यांमार सीमा पर एक विशेष गश्ती दल का नेतृत्व करते समय उन पर घात लगाकर हमला हुआ। घने जंगलों के बीच मेजर अर्शदीप ने न केवल अपनी टुकड़ी को सुरक्षित निकाला, बल्कि ऊंचाई पर छिपे उग्रवादियों को उनके ठिकाने पर जाकर ढेर कर दिया।

  2. नायब सूबेदार दोलेश्वर सुब्बा (पैरा स्पेशल फोर्सेस): 11 अप्रैल 2025 को किश्तवाड़ के घने जंगलों में एक खतरनाक मुठभेड़ के दौरान उन्होंने अदम्य साहस का परिचय दिया। उन्होंने भारी गोलीबारी के बीच रेंगते हुए एक विदेशी आतंकवादी को बिल्कुल करीब से मार गिराया।


शौर्य चक्र: 10 वीरों की गाथा, एक बलिदान को सलाम

इस वर्ष 10 शौर्य चक्र प्रदान किए गए हैं, जिनमें से एक सम्मान मरणोपरांत दिया गया है। लांस दफादार बलदेव चंद ने सर्वोच्च बलिदान देकर यह सम्मान प्राप्त किया।

शौर्य चक्र विजेताओं की मुख्य उपलब्धियां:

  • लेफ्टिनेंट कर्नल घटगे आदित्य श्रीकुमार (पैरा SF): म्यांमार सीमा पर एक सर्जिकल स्ट्राइक जैसे ऑपरेशन को अंजाम दिया, जिसमें 9 आतंकवादी मारे गए।

  • मेजर शिवकांत यादव (पैरा SF) व मेजर विवेक (42 RR): इन अधिकारियों ने शोपियां और पुलवामा में ‘ए+ श्रेणी’ के खूंखार आतंकवादियों को मौत के घाट उतारा।

  • मेजर लैशांगथेम दीपक सिंह: इन्होंने एक जटिल रेस्क्यू ऑपरेशन में अपनी जान जोखिम में डालकर एक निर्दोष नागरिक को उग्रवादियों के चंगुल से छुड़ाया।

  • लांस दफादार बलदेव चंद (मरणोपरांत): किश्तवाड़ में आमने-सामने की लड़ाई में गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद अंतिम सांस तक लड़ते रहे और देश के लिए शहीद हो गए।


विशिष्ट सेवा और अन्य पदकों का विवरण

वीरता पुरस्कारों के साथ-साथ विशिष्ट सेवा के लिए भी पदकों की घोषणा की गई है। इस बार सेना की विभिन्न इकाइयों को उनकी निरंतर उत्कृष्ट सेवा के लिए निम्नलिखित पदक दिए गए हैं:

पदक का प्रकार संख्या
परम विशिष्ट सेवा मेडल (PVSM) 19
उत्तम युद्ध सेवा मेडल (UYSM) 04
अति विशिष्ट सेवा मेडल (AVSM) 35
सेना मेडल (वीरता) 45 (1 बार + 44 नए)
विशिष्ट सेवा मेडल (VSM) 85

इसके अलावा, 81 मेंशन-इन-डिस्पैच भी दिए गए हैं, जो ‘ऑपरेशन रक्षक’, ‘ऑपरेशन स्नो लेपर्ड’ और ‘ऑपरेशन मेघदूत’ जैसे कठिन मिशनों में सैनिकों के विशेष योगदान को दर्शाते हैं।

नागरिक सुरक्षा और आपदा प्रबंधन में योगदान

सेना ने न केवल सरहद पर बल्कि देश के भीतर आपदा के समय भी अपनी उपयोगिता सिद्ध की है। राइफलमैन धुर्बा ज्योति दत्ता (33 असम राइफल्स) इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं। 19 सितंबर 2025 को बाढ़ राहत कार्य से लौटते समय उन पर हमला हुआ। घायल होने के बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और सूझबूझ से वाहन चलाकर अपने 8 साथियों की जान बचाई।

राष्ट्र का गौरव हैं ये योद्धा

77वां गणतंत्र दिवस वीरता पुरस्कार केवल पदक नहीं हैं, बल्कि यह 140 करोड़ भारतीयों की ओर से सेना के प्रति सम्मान और कृतज्ञता का इजहार है। मेजर अर्शदीप से लेकर शहीद बलदेव चंद तक, हर नाम एक ऐसी कहानी है जो आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा देती रहेगी। भारतीय सेना की यह मुस्तैदी ही है कि आज देश सुरक्षित है।

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