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महाराष्ट्र का ‘रण’: 29 महानगरपालिकाओं के भाग्य का फैसला आज; क्या BMC से खत्म होगा ठाकरे युग का वर्चस्व?

मुंबई: महाराष्ट्र की सियासत के लिए आज का दिन ‘सुपर फ्राइडे’ साबित होने वाला है। राज्य की सत्ता का सेमीफाइनल माने जाने वाले 29 महानगरपालिकाओं के चुनावी दंगल के नतीजे आज घोषित किए जाएंगे। सुबह 10 बजे से शुरू होने वाली मतगणना न केवल स्थानीय निकायों के भविष्य को तय करेगी, बल्कि यह भी स्पष्ट कर देगी कि राज्य की जनता का असली समर्थन किसके साथ है—मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली महायुति या उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली महाविकास अघाड़ी (MVA)

मिनी विधानसभा: सत्ता का लिटमस टेस्ट

महाराष्ट्र में इन नगर निकाय चुनावों को ‘मिनी विधानसभा’ कहा जा रहा है। इसका कारण यह है कि इनमें मुंबई, पुणे, नागपुर, नासिक, ठाणे और छत्रपति संभाजीनगर जैसे राज्य के सबसे प्रभावशाली शहरी केंद्र शामिल हैं। गुरुवार को हुए मतदान के बाद, जिसमें लगभग 46-50% वोटिंग दर्ज की गई, अब सबकी नजरें उन ईवीएम (EVM) पर टिकी हैं जो राजनीतिक दिग्गजों के भविष्य का फैसला करेंगी।

BMC: एशिया के सबसे अमीर नगर निगम पर सबकी नजर

पूरे देश की निगाहें बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) पर टिकी हैं। 1865 में स्थापित बीएमसी भारत का ही नहीं, बल्कि एशिया का सबसे अमीर नगर निकाय है। इसकी वित्तीय ताकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसका वार्षिक बजट 74,000 करोड़ रुपये से अधिक है, जो गोवा, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश जैसे कई छोटे राज्यों के कुल बजट से भी ज्यादा है।

बीएमसी पर पिछले 27 वर्षों से शिवसेना (अविभाजित) का एकछत्र राज रहा है। लेकिन पार्टी में हुई ऐतिहासिक फूट के बाद यह पहला मौका है जब मतदाताओं ने सीधे तौर पर उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व के बीच चुनाव किया है।

एग्जिट पोल्स के संकेत: क्या ढह जाएगा ठाकरे का किला?

मतदान संपन्न होने के बाद आए Axis My India, JVC, सकाल और प्रजा पोल्स के एग्जिट पोल्स ने राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है। लगभग सभी प्रमुख एग्जिट पोल्स एक ही दिशा में इशारा कर रहे हैं—27 साल बाद बीएमसी से ठाकरे परिवार का दबदबा खत्म हो सकता है।

  • भाजपा प्लस (महायुति): एग्जिट पोल्स के अनुसार, भाजपा और शिंदे गुट का गठबंधन स्पष्ट बहुमत के साथ सत्ता में आ सकता है।

  • उद्धव ठाकरे (MVA): उद्धव गुट के लिए यह परिणाम अस्तित्व की लड़ाई है। यदि वे बीएमसी हारते हैं, तो यह उनके राजनीतिक करियर का सबसे बड़ा झटका होगा।

उद्धव ठाकरे के लिए ‘करो या मरो’ की स्थिति

साल 2022 में एकनाथ शिंदे के विद्रोह के बाद उद्धव ठाकरे ने न केवल सत्ता गंवाई, बल्कि पार्टी का नाम और ‘धनुष-बाण’ का चिह्न भी खो दिया। इसके बाद 2024 के चुनावों में मिले झटकों ने उनकी राह और मुश्किल कर दी। अब बीएमसी ही उनका आखिरी मजबूत गढ़ बचा है।

अपनी विरासत को बचाने के लिए उद्धव ठाकरे ने इस बार एक बड़ा दांव खेला और अपने चचेरे भाई राज ठाकरे (MNS) के साथ हाथ मिलाया। हालांकि, एग्जिट पोल्स के आंकड़े बताते हैं कि ‘मराठी मानुस’ का वोट बैंक इस बार बंटा हुआ नजर आ रहा है।

चुनावी गणित: 2017 बनाम 2026

साल 2017 के बीएमसी चुनावों में मुकाबला बेहद रोमांचक था। तब शिवसेना और भाजपा अलग-अलग लड़े थे, लेकिन कांटे की टक्कर रही थी:

  • शिवसेना: 84 सीटें

  • भाजपा: 82 सीटें

  • कांग्रेस: 31 सीटें

  • NCP: 9 सीटें

तब भाजपा ने राज्य सरकार को बचाने के लिए शिवसेना को मेयर पद दे दिया था। लेकिन आज स्थितियां बदल चुकी हैं। मुंबई की 227 सीटों के लिए इस बार 1,729 उम्मीदवार मैदान में हैं। 1.03 करोड़ मतदाताओं में से 55.16 लाख पुरुष और 48.26 लाख महिलाएं आज यह तय करेंगी कि मुंबई की चाबी किसके पास होगी।

शहरी मतदाताओं के मुद्दे: विकास बनाम भावनात्मक विरासत

पुणे, नागपुर और नासिक जैसे शहरों में मतदाताओं ने बुनियादी ढांचे, मेट्रो परियोजनाएं, जलभराव और गड्ढों जैसी समस्याओं को ध्यान में रखकर वोट दिया है। महायुति सरकार ‘डबल इंजन’ के विकास का दावा कर रही है, वहीं विपक्ष ने भ्रष्टाचार और स्थानीय मुद्दों पर घेराबंदी की है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भाजपा नागपुर और पुणे में अपनी बढ़त बरकरार रखती है और बीएमसी में सेंध लगाने में सफल होती है, तो यह आगामी विधानसभा और राष्ट्रीय राजनीति में उनके दबदबे को और मजबूत करेगा।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम

मतगणना को देखते हुए पूरे महाराष्ट्र में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। विशेष रूप से मुंबई और ठाणे में संवेदनशील केंद्रों पर भारी पुलिस बल तैनात है। राज्य निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि परिणामों की पल-पल की जानकारी आधिकारिक वेबसाइट पर साझा की जाएगी।

आज के नतीजे केवल नगरसेवकों की जीत-हार तय नहीं करेंगे, बल्कि यह महाराष्ट्र की भावी राजनीति की दिशा निर्धारित करेंगे। क्या एकनाथ शिंदे खुद को असली ‘शिवसेना’ साबित कर पाएंगे? क्या भाजपा मुंबई पर अपना भगवा लहराएगी? या उद्धव ठाकरे तमाम बाधाओं के बावजूद अपने सबसे मजबूत किले को बचाने में सफल होंगे? इन सभी सवालों के जवाब आज दोपहर तक स्पष्ट हो जाएंगे।

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