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महाराष्ट्र में सत्ता का महामुकाबला: 29 नगर निकायों के लिए मतदान शुरू, पुणे में EVM पर सियासी घमासान, BMC पर टिकीं निगाहें

मुंबई/पुणे: महाराष्ट्र की राजनीति के लिए आज का दिन ‘अग्निपरीक्षा’ से कम नहीं है। राज्य के 29 नगर निगमों (Municipal Corporations) के लिए सुबह 7:30 बजे से मतदान की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसे ‘मिनी विधानसभा’ चुनाव भी कहा जा रहा है, क्योंकि इन चुनावों के परिणाम राज्य की भविष्य की राजनीति की दिशा तय करेंगे। हालांकि, मतदान के शुरुआती घंटों में ही पुणे से ईवीएम (EVM) में गड़बड़ी की शिकायतों ने सियासी पारा गरमा दिया है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) ने मशीनों की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठाए हैं।


पुणे: “तीन के बाद चौथे की लाइट नहीं जली”, अंकुश काकडे का EVM पर बड़ा आरोप

पुणे नगर निगम के लिए हो रहे मतदान के बीच एनसीपी (शरद चंद्र पवार) के वरिष्ठ नेता अंकुश काकडे ने चुनाव प्रक्रिया पर सवालिया निशान लगा दिया है। काकडे ने आरोप लगाया कि पुणे के एक मतदान केंद्र पर ईवीएम मशीन सही तरीके से काम नहीं कर रही है।

अंकुश काकडे के आरोपों के मुख्य बिंदु:

  1. लाइट न जलना: काकडे का दावा है कि तीन लोगों के सफलतापूर्वक मतदान करने के बाद जब चौथे व्यक्ति ने बटन दबाया, तो मशीन की लाइट नहीं जली। उन्होंने संदेह जताया कि क्या चौथा वोट रिकॉर्ड हुआ भी है या नहीं।

  2. समय का अंतर: उन्होंने मशीनों के ‘इंटरनल टाइम’ को लेकर भी विसंगति का आरोप लगाया है।

  3. प्रशासन को शिकायत: काकडे ने इस संबंध में चुनाव अधिकारियों से संपर्क कर तत्काल जांच की मांग की है।

इस Pune EVM Controversy ने विपक्षी खेमे में हलचल मचा दी है, जहाँ पहले से ही ईवीएम की निष्पक्षता को लेकर बहस छिड़ी हुई है।


29 नगर निकायों का गणित: 3.48 करोड़ मतदाता करेंगे फैसला

महाराष्ट्र में लगभग 6 साल के लंबे अंतराल के बाद स्थानीय निकायों के चुनाव हो रहे हैं। 2020 से 2023 के बीच कई निगमों का कार्यकाल समाप्त हो गया था, लेकिन कानूनी अड़चनों के कारण चुनाव लंबित थे।

चुनाव के मुख्य आंकड़े:

  • कुल नगर निगम: 29 (मुंबई, पुणे, नागपुर, नासिक, ठाणे सहित)।

  • कुल वार्ड: 893 वार्डों की 2,869 सीटें।

  • मैदान में उम्मीदवार: 15,931 प्रत्याशी।

  • मतदाता संख्या: लगभग 3.48 करोड़ लोग मतदान करेंगे।

  • वोटिंग का समय: सुबह 7:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक।


BMC: 74,000 करोड़ के बजट वाली महापालिका का महासंग्राम

पूरे महाराष्ट्र की नजरें Bृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) पर टिकी हैं, जिसे देश की सबसे अमीर महापालिका माना जाता है। 227 सीटों के लिए हो रहे इस चुनाव में 1,700 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।

बीएमसी चुनाव का महत्व:

  • अकूत बजट: बीएमसी का वार्षिक बजट लगभग ₹74,427 करोड़ है, जो कई छोटे राज्यों के बजट से भी अधिक है।

  • ठाकरे बंधुओं का साथ: इस चुनाव की सबसे बड़ी हाईलाइट उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे का एक साथ आना है। ‘मराठी मानुस’ के मुद्दे पर दोनों भाई एक मंच पर दिख रहे हैं, जो भाजपा के नेतृत्व वाली MahaYuti (शिंदे सेना, बीजेपी, और अजित पवार गुट) के लिए बड़ी चुनौती है।

  • महायुति की प्रतिष्ठा: मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और देवेंद्र फडणवीस के लिए मुंबई पर कब्जा करना उनकी राजनीतिक ताकत का लिटमस टेस्ट होगा।


इन प्रमुख शहरों में भी कड़ी टक्कर

मुंबई और पुणे के अलावा राज्य के अन्य बड़े शहरों में भी Maharashtra Municipal Corporation Elections 2026 का उत्साह चरम पर है।

  1. नागपुर और नासिक: यहाँ बीजेपी और एमवीए के बीच सीधा मुकाबला है।

  2. ठाणे और कल्याण-डोंबिवली: मुख्यमंत्री शिंदे के गढ़ में उद्धव गुट सेंधमारी की कोशिश कर रहा है।

  3. छत्रपति संभाजीनगर और कोल्हापुर: यहाँ धार्मिक और क्षेत्रीय अस्मिता के मुद्दों पर मतदान हो रहा है। इसके अलावा नवी मुंबई, वसई-विरार, सोलापुर, अमरावती, और अकोला जैसे निगमों में भी त्रिकोणीय मुकाबले की स्थिति है।


सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम और तकनीकी चुनौतियां

राज्य चुनाव आयोग ने निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने के लिए 3.5 लाख से अधिक चुनाव कर्मियों और 50,000 से अधिक पुलिसकर्मियों की तैनाती की है। संवेदनशील केंद्रों पर वेबकास्टिंग और ड्रोन से निगरानी रखी जा रही है।

हालांकि, तकनीकी खराबी की शिकायतों ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। चुनाव आयोग के अधिकारियों का कहना है कि मशीनों में गड़बड़ी की जहाँ भी शिकायत मिल रही है, वहां ‘रिजर्व’ मशीनों को तत्काल भेजा जा रहा है। BMC Election Voting के दौरान लंबी कतारें देखी जा रही हैं, जो भारी मतदान का संकेत हैं।


क्या बदलेगा महाराष्ट्र का सियासी नक्शा?

इन नगर निकाय चुनावों को 2029 के विधानसभा चुनाव का ‘सेमीफाइनल’ माना जा रहा है। यदि एमवीए (MVA) मुंबई और पुणे जैसे शहरों में अच्छा प्रदर्शन करती है, तो यह महायुति सरकार के लिए खतरे की घंटी होगी। वहीं, यदि बीजेपी अपनी पकड़ बनाए रखती है, तो यह ‘डबल इंजन’ सरकार की नीतियों पर जनता की मुहर मानी जाएगी।

कल, यानी 16 जनवरी को जब इन 2,869 सीटों के नतीजे आएंगे, तब स्पष्ट होगा कि महाराष्ट्र की जनता ने ‘विकास’ को चुना है या ‘भावनात्मक मुद्दों’ को। फिलहाल, सबकी नजरें पुणे के ईवीएम विवाद और मुंबई के मतदान प्रतिशत पर टिकी हैं।

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