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देहरादून में ‘शस्त्र प्रदर्शन’ पर प्रशासन का वज्रपात: 827 लाइसेंस एक झटके में निरस्त, सेखी बघारने वालों में मचा हड़कंप

The Hill India News
Last updated: January 13, 2026 1:46 pm
The Hill India News
Published: January 13, 2026
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देहरादून (ब्यूरो): उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में अपनी शान और रसूख के लिए मानकों से अधिक हथियार रखने वालों और नियमों की अनदेखी करने वाले शस्त्र धारकों पर जिला प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। सोमवार (13 जनवरी 2026) को जिलाधिकारी के अनुमोदन के बाद जनपद के 827 शस्त्र लाइसेंसों को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया गया है। प्रशासन के इस कड़े फैसले से उन लोगों में खलबली मच गई है जो नोटिस मिलने के बावजूद शस्त्र नियमों का पालन करने में कोताही बरत रहे थे।

Contents
दो से अधिक शस्त्र रखना अब अपराध: 54 धारकों पर गिरी गाजपोर्टल पर लापरवाही पड़ी भारी: 773 लाइसेंस यूआईएन के अभाव में विलोपितसेखी बघारने वालों पर कड़ा प्रहारअब आगे क्या? नवीन प्रक्रिया से गुजरना होगाडिजिटल पारदिर्शता की ओर कदम

दो से अधिक शस्त्र रखना अब अपराध: 54 धारकों पर गिरी गाज

जिला प्रशासन की इस कार्रवाई के केंद्र में भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा जारी आयुध (संशोधन) नियम-2019 है। इस संशोधन के माध्यम से आयुध अधिनियम, 1959 की धारा-03 में बदलाव कर एक व्यक्ति द्वारा रखे जाने वाले शस्त्रों की अधिकतम संख्या 3 से घटाकर 2 कर दी गई थी।

प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार, देहरादून में ऐसे कई लाइसेंस धारक थे जिनके पास निर्धारित सीमा से अधिक यानी तीन या उससे अधिक शस्त्र थे। प्रशासन ने इन सभी को 26 अप्रैल 2025 को नोटिस जारी कर अतिरिक्त शस्त्र जमा करने का अवसर दिया था। इसके बावजूद 54 लाइसेंस धारकों ने न तो अतिरिक्त शस्त्र जमा किए और न ही कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण दिया। एनडीएएल-एएलआईएस (NDAL-ALIS) पोर्टल पर इनकी स्थिति यथावत पाए जाने पर जिलाधिकारी ने इन सभी के अतिरिक्त शस्त्र और संबंधित लाइसेंस निरस्त करने के निर्देश दे दिए।

नोट: इस कार्रवाई से शूटिंग खेल प्रतियोगिता (स्पोर्ट्स कोटे) के तहत स्वीकृत लाइसेंस धारकों को फिलहाल बाहर रखा गया है।


पोर्टल पर लापरवाही पड़ी भारी: 773 लाइसेंस यूआईएन के अभाव में विलोपित

कार्रवाई का दूसरा और सबसे बड़ा हिस्सा उन शस्त्र धारकों से जुड़ा है जिन्होंने सरकारी पोर्टल पर अपना पंजीकरण पूर्ण नहीं किया था। उत्तराखण्ड शासन के गृह अनुभाग द्वारा जारी विभिन्न शासनादेशों के तहत यह अनिवार्य किया गया था कि 30 जून 2020 के पश्चात सभी शस्त्र लाइसेंसों का एनडीएएल-एएलआईएस पोर्टल पर यूनिक आईडेंटिफिकेशन नंबर (UIN) जनरेट होना आवश्यक है।

जिला प्रशासन देहरादून के मुताबिक, बार-बार प्रेस विज्ञप्तियों और सूचनाओं के माध्यम से इन शस्त्र धारकों को कार्यालय आकर अभिलेख अपडेट करने का अनुरोध किया गया था। लेकिन, जनपद के 773 शस्त्र लाइसेंस धारकों ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया। नियमों की इसी अवहेलना को देखते हुए प्रशासन ने इन सभी 773 बिना यूआईएन वाले लाइसेंसों को निरस्त करते हुए पोर्टल से विलोपित (Delete) कर दिया है।


सेखी बघारने वालों पर कड़ा प्रहार

अक्सर देखा जाता है कि सामाजिक रसूख और वर्चस्व कायम करने के लिए लोग एक से अधिक लाइसेंस बनवाने और आधुनिक हथियार साथ रखने की होड़ में रहते हैं। जिला प्रशासन की इस कार्रवाई को इसी ‘शो-ऑफ’ कल्चर पर लगाम लगाने के तौर पर देखा जा रहा है।

प्रशासन की सख्त चेतावनी:

  • अब जिनके लाइसेंस निरस्त हुए हैं, उनके पास रखे शस्त्र अवैध माने जाएंगे।

  • निरस्त लाइसेंस वाले शस्त्रों को संबंधित थानों या अधिकृत गन हाउस में तुरंत जमा करना होगा।

  • नियमों का उल्लंघन करने पर शस्त्र अधिनियम की अन्य कठोर धाराओं के तहत कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।


अब आगे क्या? नवीन प्रक्रिया से गुजरना होगा

जिन 773 धारकों के लाइसेंस यूआईएन न होने के कारण निरस्त हुए हैं, उनके लिए अब रास्ता थोड़ा कठिन हो गया है। शासन के निर्देशों के अनुसार, अब ये पुराने लाइसेंस बहाल नहीं होंगे। ऐसे शस्त्र धारकों को अब आयुध नियम 2016 के अंतर्गत बिल्कुल नए सिरे से ऑनलाइन आवेदन करना होगा। जिला प्रशासन एक बार फिर उनकी पात्रता, आपराधिक इतिहास और शस्त्र की आवश्यकता की जांच करेगा, जिसके बाद ही नवीन लाइसेंस जारी करने पर विचार किया जाएगा।

डिजिटल पारदिर्शता की ओर कदम

जिला प्रशासन की इस डिजिटल सफाई (Digital Cleanup) से अब जनपद में केवल वही शस्त्र लाइसेंस अस्तित्व में रहेंगे जो पूर्णतः वैध और पोर्टल पर ट्रैक किए जा सकते हैं। इससे अवैध हथियारों की तस्करी और एक ही नाम पर कई लाइसेंसों के दुरुपयोग पर प्रभावी अंकुश लगेगा।

देहरादून जिला प्रशासन का यह निर्णय प्रदेश के अन्य जनपदों के लिए भी एक नजीर साबित होगा। जिलाधिकारी के इस अनुमोदन ने स्पष्ट कर दिया है कि गृह मंत्रालय और शासन के नियमों के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। हथियारों को सुरक्षा के बजाय शान का प्रतीक समझने वालों के लिए यह एक कड़ा संदेश है कि कानून सर्वोपरि है।

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