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ईरान में ‘रक्तपात’: प्रशासन का बड़ा कबूलनामा, हिंसक प्रदर्शनों में अब तक 2000 से ज्यादा की मौत; 1979 की क्रांति के बाद सबसे बड़ा संकट

The Hill India News
Last updated: January 13, 2026 12:50 pm
The Hill India News
Published: January 13, 2026
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तेहरान/दुबई: हफ़्तों से सुलग रहे ईरान ने आखिरकार दुनिया के सामने वह सच स्वीकार कर लिया है, जिसे अब तक दबाने की कोशिश की जा रही थी। ईरान प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पहली बार आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि देशव्यापी हिंसक प्रदर्शनों में अब तक 2,000 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। मरने वालों के इस भयावह आंकड़े ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है, क्योंकि यह 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद से ईरानी शासन के सामने खड़ी अब तक की सबसे बड़ी आंतरिक चुनौती बन गई है।

Contents
पहली बार प्रशासन ने तोड़ी चुप्पीआर्थिक तंगी से शुरू हुआ आंदोलन, अब सीधे ‘सत्ता’ पर निशानाअमेरिका और इजरायल पर मढ़ा दोषइंटरनेट पर पाबंदी: सच को कैद करने की कोशिशरात के सन्नाटे में ‘गृहयुद्ध’ जैसे हालातअंतरराष्ट्रीय जगत में चिंता

पहली बार प्रशासन ने तोड़ी चुप्पी

रॉयटर्स की एक विशेष रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी अधिकारी ने स्वीकार किया कि बीते दो हफ्तों से जारी देशव्यापी हिंसा में मरने वालों की संख्या दो हजार के पार पहुंच गई है। हालांकि, ईरान ने इस रिपोर्ट में यह साफ नहीं किया है कि हताहत होने वालों में कितने आम प्रदर्शनकारी हैं और कितने सुरक्षा बलों के जवान। इससे पहले ईरान की ओर से मौतों का आंकड़ा बेहद कम बताया जा रहा था, लेकिन जमीनी हकीकत और अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच अब सरकार को यह सच स्वीकार करना पड़ा है।


आर्थिक तंगी से शुरू हुआ आंदोलन, अब सीधे ‘सत्ता’ पर निशाना

ईरान में इस भीषण विद्रोह की शुरुआत करीब दो हफ्ते पहले बदहाल आर्थिक स्थिति, आसमान छूती महंगाई और बुनियादी सुविधाओं के अभाव के खिलाफ हुई थी। लेकिन देखते ही देखते आम लोगों का गुस्सा ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्ला अली खामेनेई और वर्तमान कट्टरपंथी शासन के खिलाफ एक बड़े विद्रोह में बदल गया।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि शासन उनकी आवाज दबाने के लिए ताकत का इस्तेमाल कर रहा है। सोशल मीडिया पर आ रहे इक्का-दुक्का वीडियो में सुरक्षा बलों को प्रदर्शनकारियों पर सीधी फायरिंग करते और आंसू गैस के गोले दागते देखा जा सकता है। यह आंदोलन अब केवल शहरों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि ग्रामीण इलाकों में भी इसकी आग पहुँच चुकी है।

अमेरिका और इजरायल पर मढ़ा दोष

ईरान की खामेनेई सरकार ने हमेशा की तरह इस अशांति के लिए बाहरी ताकतों को जिम्मेदार ठहराया है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने विदेशी राजनयिकों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक में दावा किया कि उनके पास ऐसे पुख्ता सबूत हैं, जो साबित करते हैं कि इस अशांति के पीछे अमेरिका और इजरायल का हाथ है। सरकार का तर्क है कि आम नागरिकों के विरोध प्रदर्शन को आतंकवादी तत्वों और विदेशी एजेंटों ने ‘हाईजैक’ कर लिया है।

ईरानी अधिकारी ने इन मौतों के लिए भी “आतंकवादी तत्वों” को ही जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है कि हथियारों से लैस उपद्रवियों ने सुरक्षाकर्मियों और जनता पर हमले कर अराजकता फैलाने की साजिश रची है।


इंटरनेट पर पाबंदी: सच को कैद करने की कोशिश

जैसे-जैसे हिंसा बढ़ी, ईरानी शासन ने सूचनाओं के प्रवाह को रोकने के लिए डिजिटल नाकेबंदी कर दी है। देश के लगभग सभी 31 प्रांतों में इंटरनेट सेवाओं पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है और मोबाइल फोन नेटवर्क को भी सीमित कर दिया गया है।

मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि इंटरनेट बैन का मुख्य उद्देश्य सुरक्षा बलों द्वारा किए जा रहे अत्याचारों की फुटेज को बाहर जाने से रोकना है। निगरानी संगठनों के मुताबिक, यह विरोध प्रदर्शन अब ईरान के:

  • 31 प्रांतों के सभी प्रमुख हिस्सों तक फैल चुका है।

  • लगभग 185 शहरों में लोग सड़कों पर हैं।

  • तकरीबन 585 जगहों पर हिंसक झड़पें दर्ज की गई हैं।

ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी (HRANA) का दावा है कि अब तक 10,000 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें छात्र, पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हैं।


रात के सन्नाटे में ‘गृहयुद्ध’ जैसे हालात

यद्यपि दिन के समय शहरों में सन्नाटा पसरा नजर आता है, लेकिन रात होते ही ईरान की गलियां रणक्षेत्र में तब्दील हो जाती हैं। इंटरनेट सेंसरशिप के बावजूद कुछ खौफनाक वीडियो लीक हुए हैं, जिनमें रात के अंधेरे में सुरक्षा बलों की ओर से स्वचालित हथियारों से गोलियां चलने की आवाजें आ रही हैं। प्रदर्शनकारी टायर जलाकर सड़कों को ब्लॉक कर रहे हैं और सरकारी इमारतों को निशाना बना रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय जगत में चिंता

ईरान में 2,000 मौतों के खुलासे के बाद मानवाधिकार संगठनों ने संयुक्त राष्ट्र से हस्तक्षेप की मांग की है। यूरोपीय देशों और अमेरिका ने ईरान से संयम बरतने और लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान करने की अपील की है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह प्रदर्शन और खिंचा, तो ईरान एक गहरे मानवीय संकट की ओर बढ़ सकता है, जो पूरे मध्य पूर्व की स्थिरता के लिए खतरा पैदा करेगा।

ईरान इस समय अपने इतिहास के सबसे नाजुक मोड़ पर खड़ा है। जहाँ एक तरफ सरकार इसे ‘विदेशी साजिश’ बताकर कुचलने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी तरफ आम ईरानी नागरिक अपने भविष्य के लिए आर-पार की लड़ाई लड़ रहे हैं। 2,000 मौतों का यह सरकारी आंकड़ा केवल एक नंबर नहीं, बल्कि ईरान के भीतर सुलग रहे असंतोष की वो दास्तां है जिसने पूरे इस्लामी शासन की नींव हिला दी है।

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