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उत्तराखंड की स्वास्थ्य सेवाओं को मिली संजीवनी: दून और रुद्रपुर मेडिकल कॉलेज में 12 विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती, सरकार ने दी मंजूरी

The Hill India News
Last updated: January 12, 2026 2:58 pm
The Hill India News
Published: January 12, 2026
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देहरादून: उत्तराखंड में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी को दूर करने और चिकित्सा शिक्षा के स्तर को विश्वस्तरीय बनाने की दिशा में धामी सरकार ने एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राज्य सरकार ने राजधानी के राजकीय दून मेडिकल कॉलेज और ऊधम सिंह नगर स्थित पंडित रामसुमेर शुक्ल राजकीय मेडिकल कॉलेज, रुद्रपुर के विभिन्न विभागों में एक दर्जन विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति को औपचारिक मंजूरी दे दी है। इस निर्णय से न केवल राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार होगा, बल्कि मेडिकल के छात्र-छात्राओं को भी अब अनुभवी संकाय सदस्यों (Faculty) से बेहतर प्रशिक्षण प्राप्त हो सकेगा।

Contents
रिक्त पदों को भरने के लिए ‘वॉक-इन-इंटरव्यू’ का सहारादून मेडिकल कॉलेज: प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसरों की टीम तैयाररुद्रपुर मेडिकल कॉलेज: चार विभागों को मिले नए चेहरेसंविदा नियुक्ति के नियम और कार्यकालचिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत का वक्तव्यछात्रों और मरीजों के लिए दोहरी सौगातभविष्य की राह: रिक्तियों पर प्रहार

रिक्त पदों को भरने के लिए ‘वॉक-इन-इंटरव्यू’ का सहारा

उत्तराखंड के पर्वतीय और मैदानी क्षेत्रों के मेडिकल कॉलेजों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की लंबे समय से कमी बनी हुई थी। इस समस्या के समाधान के लिए चिकित्सा शिक्षा विभाग ने एक पारदर्शी और त्वरित चयन प्रक्रिया अपनाई। इसके लिए हेमवती नंदन बहुगुणा उत्तराखंड चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय के कुलपति की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय साक्षात्कार समिति (Interview Committee) का गठन किया गया था।

समिति द्वारा आयोजित ‘वॉक-इन-इंटरव्यू’ के माध्यम से योग्य उम्मीदवारों का चयन किया गया, जिसमें से 12 चिकित्सकों की नियुक्ति पर शासन ने मुहर लगा दी है। इन नियुक्तियों में सबसे महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि रेडियो डायग्नोसिस और माइक्रोबायोलॉजी जैसे संवेदनशील विभागों को अब स्थायी विशेषज्ञ मिल गए हैं।

दून मेडिकल कॉलेज: प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसरों की टीम तैयार

राजकीय दून मेडिकल कॉलेज, जो प्रदेश का एक प्रमुख चिकित्सा संस्थान है, को 8 नए विशेषज्ञ डॉक्टर मिले हैं।

  • रेडियो डायग्नोसिस: विभाग की कमान अनुभवी डॉ. ब्रजेंद्र नाथ त्रिपाठी को प्रोफेसर के रूप में सौंपी गई है।

  • असिस्टेंट प्रोफेसर: माइक्रोबायोलॉजी में डॉ. मनीष कुमार, ब्लड बैंक में डॉ. सनोबर शमीम और आर्थोपीडिक्स (हड्डी रोग) में डॉ. मयंक सिंघल की तैनाती की गई है।

  • महिला एवं बाल स्वास्थ्य: एंटीनेटल चाइल्ड केयर में डॉ. सारा गुलेरिया और मैटरनिटी चाइल्ड हेल्थ केयर में डॉ. रूचि कर्नाटक को असिस्टेंट प्रोफेसर नियुक्त किया गया है।

  • एनेस्थिसिया: सर्जरी के लिए महत्वपूर्ण इस विभाग में डॉ. पूजा सांगोले और डॉ. इशिता बहुखंडी को जिम्मेदारी दी गई है।

रुद्रपुर मेडिकल कॉलेज: चार विभागों को मिले नए चेहरे

पंडित रामसुमेर शुक्ल राजकीय मेडिकल कॉलेज, रुद्रपुर में भी चार महत्वपूर्ण विभागों में संकाय सदस्यों की कमी को पूरा किया गया है। यहाँ नियुक्त किए गए सभी चिकित्सक असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर तैनात होंगे:

  1. आब्स एंड गायनी: डॉ. प्रेरणा छाबड़ा

  2. ईएनटी (नाक, कान, गला): डॉ. ललित सिंह पोखरिया

  3. माइक्रोबायोलॉजी: डॉ. मयूरी श्रीवास्तव

  4. स्किन (त्वचा रोग): डॉ. चिराग सैनी

संविदा नियुक्ति के नियम और कार्यकाल

इन सभी नियुक्तियों को फिलहाल संविदा (Contractual) के आधार पर मंजूरी दी गई है। आदेश के अनुसार, इन चिकित्सकों का कार्यकाल अगले तीन वर्षों के लिए होगा। हालांकि, यदि इन पदों पर नियमित भर्ती के माध्यम से नियुक्तियां हो जाती हैं, तो यह कार्यकाल उसी समय समाप्त माना जाएगा। सरकार का उद्देश्य यह है कि नियमित भर्ती प्रक्रिया पूर्ण होने तक मरीजों का उपचार और छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो।

चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत का वक्तव्य

इस उपलब्धि पर चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने खुशी जाहिर करते हुए कहा, “हमारी सरकार राज्य के हर मेडिकल कॉलेज को संसाधनों और विशेषज्ञों से लैस करने के लिए प्रतिबद्ध है। इन 12 विशेषज्ञों की नियुक्ति से न केवल चिकित्सा छात्रों को उच्चस्तरीय शिक्षण प्राप्त होगा, बल्कि कॉलेजों में रिसर्च (अनुसंधान) और क्लीनिकल सेवाओं की गुणवत्ता में भी अभूतपूर्व सुधार होगा। हम जल्द ही अन्य कॉलेजों में भी रिक्त पदों को भरने जा रहे हैं।”

छात्रों और मरीजों के लिए दोहरी सौगात

यह फैसला उत्तराखंड के स्वास्थ्य ढांचे के लिए दोहरी जीत जैसा है।

  • बेहतर प्रशिक्षण: मेडिकल कॉलेजों में संकाय सदस्यों की उपस्थिति से एम.बी.बी.एस. और पी.जी. छात्रों को केस स्टडी और प्रैक्टिकल में विशेषज्ञ मार्गदर्शन मिलेगा।

  • सस्ता और सटीक उपचार: सरकारी मेडिकल कॉलेजों में विशेषज्ञ डॉक्टरों के बैठने से गरीब मरीजों को निजी अस्पतालों के महंगे इलाज से राहत मिलेगी। विशेषकर रेडियो डायग्नोसिस और एनेस्थिसिया जैसे विभागों में विशेषज्ञ होने से जटिल सर्जरी अब अधिक सुलभ होंगी।

भविष्य की राह: रिक्तियों पर प्रहार

उत्तराखंड सरकार का लक्ष्य राज्य के दुर्गम क्षेत्रों तक विशेषज्ञ सेवाएं पहुंचाना है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, आने वाले महीनों में अल्मोड़ा, श्रीनगर और हरिद्वार मेडिकल कॉलेजों के लिए भी इसी तरह की भर्ती प्रक्रिया अपनाई जा सकती है। ‘वॉक-इन-इंटरव्यू’ की नीति से डॉक्टरों को तत्काल ज्वाइनिंग करने का अवसर मिल रहा है, जो राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए ‘गेम चेंजर’ साबित हो रहा है।

राजकीय दून और रुद्रपुर मेडिकल कॉलेज में इन विशेषज्ञों की तैनाती राज्य की स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करने की दिशा में एक ठोस कदम है। यह न केवल वर्तमान चिकित्सा संकट को हल करता है, बल्कि भविष्य के डॉक्टरों को तैयार करने के लिए एक मजबूत शैक्षणिक आधार भी प्रदान करता है।

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