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हैवानियत की इंतहा: बस्ती में कुत्ते के काटने से बौखलाया शख्स, लाठी से पीट-पीटकर 12 पिल्लों और उनकी मां को मार डाला

बस्ती। उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने न केवल मानवता को शर्मसार किया है, बल्कि पशु प्रेमियों और समाज के संवेदनशील वर्ग को झकझोर कर रख दिया है। जिले के रुधौली थाना क्षेत्र में एक सनकी व्यक्ति ने बेजुबान जानवरों पर अपनी दरिंदगी का ऐसा तांडव मचाया कि देखने वालों की रूह कांप गई। केवल एक कुत्ते के काटने का बदला लेने के लिए आरोपी ने एक-एक कर 12 मासूम पिल्लों और उनकी मां को लाठी-डंडों से पीट-पीटकर मौत के घाट उतार दिया।

इस पशु क्रूरता (Animal Cruelty) की खबर फैलते ही इलाके में भारी तनाव और आक्रोश का माहौल है। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी को सलाखों के पीछे भेज दिया है।

क्या है पूरा मामला? प्रतिशोध की सनक में बना ‘हैवान’

घटना बस्ती जिले के रुधौली थाना क्षेत्र स्थित मुंगरहा चौराहे की है। जानकारी के अनुसार, मैनी गांव का निवासी कलीमुल्लाह मुंगरहा चौराहे से गुजर रहा था। इसी दौरान एक आवारा कुतिया ने उसे काट लिया। कुत्ते के काटने से कलीमुल्लाह इस कदर आपा खो बैठा कि उसने मौके पर ही प्रतिशोध लेने की ठान ली।

चश्मदीदों के मुताबिक, आरोपी कलीमुल्लाह ने एक भारी लाठी उठाई और सबसे पहले उस कुतिया पर हमला किया जिसने उसे काटा था। हैवानियत यहीं नहीं रुकी; कुतिया के पास ही उसके 12 छोटे-छोटे बच्चे (पिल्ले) खेल रहे थे। सनकी शख्स ने उन मासूम बेजुबानों को भी नहीं बख्शा। उसने बेरहमी से एक-एक कर सभी 12 पिल्लों को पीट-पीटकर मार डाला। मुंगरहा चौराहे पर खून से लथपथ पिल्लों के शव बिखरे देख स्थानीय लोगों के रोंगटे खड़े हो गए।

पुलिस की त्वरित कार्रवाई: आरोपी कलीमुल्लाह गिरफ्तार

जैसे ही इस वीभत्स कांड की सूचना रुधौली पुलिस को मिली, महकमे में हड़कंप मच गया। पुलिस टीम तुरंत मौके पर पहुंची और घटनास्थल का मुआयना किया। पुलिस ने सबसे पहले सभी मृत कुत्तों के शवों को कब्जे में लेकर सम्मानजनक तरीके से गड्ढा खुदवाकर उन्हें दफन कराया।

क्षेत्राधिकारी (CO) कुलदीप ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि आरोपी कलीमुल्लाह को गिरफ्तार कर लिया गया है। उन्होंने कहा, यह एक बेहद गंभीर और मानसिक विक्षिप्तता को दर्शाने वाली घटना है। आरोपी ने स्वीकार किया है कि कुत्ते के काटने के कारण उसने गुस्से में आकर इस वारदात को अंजाम दिया। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कड़ी धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है।”

पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 170, 126 और 35 के तहत कार्रवाई की है। उसे न्यायालय के समक्ष पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया है।

एनिमल राइट्स एक्टिविस्ट्स में भारी आक्रोश

बस्ती की इस घटना ने सोशल मीडिया पर भी उबाल ला दिया है। देशभर के डॉग लवर्स (Dog Lovers) और एनिमल राइट्स एक्टिविस्ट्स इस हैवानियत के खिलाफ मुखर हो गए हैं। ‘पीपुल फॉर एनिमल्स’ (PFA) जैसे संगठनों के सदस्यों ने इस मामले में आरोपी को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने की मांग की है।

एक्टिविस्ट्स का तर्क है कि यदि किसी जानवर ने काटा था, तो उसका उपचार कराना चाहिए था और नगर निकाय को सूचित करना चाहिए था, न कि इस तरह का कत्लेआम मचाना चाहिए। कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि ऐसे व्यक्ति समाज के लिए खतरा हैं और उन पर मनोवैज्ञानिक परीक्षण के साथ-साथ कठोर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में कोई ऐसी पशु क्रूरता करने की हिम्मत न करे।

कानून और पशु अधिकार: क्या कहता है नियम?

भारत में जानवरों के प्रति क्रूरता को रोकने के लिए ‘पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960’ (Prevention of Cruelty to Animals Act) लागू है। इसके अलावा, हाल ही में लागू हुई भारतीय न्याय संहिता (BNS) में भी बेजुबानों को नुकसान पहुंचाने पर सख्त जेल और जुर्माने का प्रावधान है।

सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न आदेशों के अनुसार, आवारा कुत्तों को मारना या उन्हें प्रताड़ित करना गैर-कानूनी है। बस्ती की यह घटना दिखाती है कि जमीनी स्तर पर अभी भी इन कानूनों के प्रति जागरूकता की भारी कमी है।

समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी

यह घटना केवल एक आपराधिक कृत्य नहीं है, बल्कि यह हमारे समाज की गिरती संवेदनाओं का आईना भी है। मुंगरहा चौराहे पर जब यह कत्लेआम हो रहा था, तब वहां मौजूद लोगों की चुप्पी पर भी सवाल उठ रहे हैं। मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि जो व्यक्ति बेजुबानों के प्रति इतना हिंसक हो सकता है, वह समाज के अन्य कमजोर वर्गों के लिए भी उतना ही खतरनाक साबित हो सकता है।


बस्ती पुलिस ने भले ही आरोपी को जेल भेज दिया हो, लेकिन उन 12 मासूम जानों की भरपाई संभव नहीं है। पशु क्रूरता के इस मामले ने एक बार फिर बहस छेड़ दी है कि क्या हमारे कानून बेजुबानों को सुरक्षा देने के लिए पर्याप्त हैं? मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘जीरो टॉलरेंस’ वाले प्रदेश में बेजुबानों के साथ ऐसी दरिंदगी निश्चित रूप से सरकार और प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती है।

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