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डिजिटल उत्तराखंड: अब तहसीलों के चक्करों से मिलेगी मुक्ति, CM धामी ने राजस्व विभाग के 6 हाई-टेक पोर्टल्स का किया आगाज़

The Hill India News
Last updated: January 10, 2026 1:38 pm
The Hill India News
Published: January 10, 2026
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देहरादून | उत्तराखंड में प्रशासनिक पारदर्शिता और ‘ईज ऑफ लिविंग’ (Ease of Living) की दिशा में शनिवार को एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून स्थित मुख्यमंत्री आवास से राजस्व परिषद द्वारा विकसित राजस्व विभाग के 6 अत्याधुनिक वेब पोर्टल्स का विधिवत शुभारंभ किया। विज्ञान और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) के समन्वय से तैयार इन पोर्टल्स के माध्यम से अब प्रदेश के नागरिकों को अपनी भूमि से संबंधित दस्तावेजों के लिए सरकारी दफ्तरों की चौखट नहीं लांघनी होगी।

Contents
तकनीक से सशक्त होगा ‘विकसित उत्तराखंड’ये हैं वो 6 डिजिटल स्तंभ, जो बदलेंगे राजस्व की सूरत1. ई-भूलेख (अपडेटेड वर्जन): घर बैठे पाएं सत्यापित खतौनी2. भू-नक्शा पोर्टल: मानचित्र देखना हुआ निःशुल्क3. भूलेख अंश पोर्टल: तैयार होगी ‘फार्मर रजिस्ट्री’4. भू-अनुमति पोर्टल: निवेश और उद्योगों के लिए वरदान5. एग्री लोन पोर्टल: आसान होगा कृषि ऋण6. ई-वसूली पोर्टल (E-RCS): राजस्व वसूली में पारदर्शितासुशासन और पारदर्शिता की नई मिसालवर्चुअल माध्यम से जुड़े सभी जिले‘स्मार्ट गवर्नेंस’ की ओर बढ़ते कदम

तकनीक से सशक्त होगा ‘विकसित उत्तराखंड’

पोर्टल्स का लोकार्पण करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘डिजिटल इंडिया’ के विजन को धरातल पर उतारने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आईटी और एआई (AI) के इस दौर में आमजन को तकनीकी रूप से सशक्त बनाना समय की मांग है।

मुख्यमंत्री ने कहा, “हमारी सरकार सरलीकरण, समाधान और निस्तारण के मूल मंत्र पर काम कर रही है। इन पोर्टल्स के आने से न केवल भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा, बल्कि जनता के बहुमूल्य समय और संसाधनों की भी बचत होगी। अब किसान और भूमि स्वामी घर बैठे मोबाइल के एक क्लिक पर सत्यापित दस्तावेज प्राप्त कर सकेंगे।”


ये हैं वो 6 डिजिटल स्तंभ, जो बदलेंगे राजस्व की सूरत

मुख्यमंत्री द्वारा शुरू किए गए 6 पोर्टल्स में ई-भूलेख (अपडेटेड वर्जन), भू-नक्शा, भूलेख अंश, भू-अनुमति, एग्री लोन और ई-वसूली (ई-आरसीएस) शामिल हैं। आइए जानते हैं ये कैसे काम करेंगे:

1. ई-भूलेख (अपडेटेड वर्जन): घर बैठे पाएं सत्यापित खतौनी

यह इस पहल का सबसे क्रांतिकारी हिस्सा है। अब तक खतौनी की प्रमाणित प्रति के लिए ग्रामीणों को लंबी दूरी तय कर तहसील जाना पड़ता था। अब ई-भूलेख पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन शुल्क जमा कर घर बैठे ही सत्यापित खतौनी डाउनलोड की जा सकेगी। यह प्रति कानूनी रूप से मान्य होगी।

2. भू-नक्शा पोर्टल: मानचित्र देखना हुआ निःशुल्क

इस पोर्टल के तहत भूमि मानचित्र (Cadastral Map) को पब्लिक डोमेन में डाल दिया गया है। अब कोई भी नागरिक अपनी जमीन का नक्शा सार्वजनिक डोमेन में बिना किसी शुल्क के देख सकता है। इससे भूमि विवादों में कमी आएगी और पारदर्शिता बढ़ेगी।

3. भूलेख अंश पोर्टल: तैयार होगी ‘फार्मर रजिस्ट्री’

प्रदेश में संयुक्त खातों और गोलखातों में अक्सर हिस्सेदारी को लेकर विवाद होते हैं। इस पोर्टल के जरिए सह-खातेदारों का अलग-अलग अंश निर्धारित कर एक डिजिटल डेटाबेस तैयार किया जा रहा है। इससे भविष्य में ‘फार्मर रजिस्ट्री’ बनाने का रास्ता साफ होगा, जिसमें खातेदारों की जाति, लिंग और पहचान संख्या का भी रिकॉर्ड होगा।

4. भू-अनुमति पोर्टल: निवेश और उद्योगों के लिए वरदान

उत्तराखंड में उद्योग या कृषि प्रयोजनों के लिए भूमि उपयोग की अनुमति लेना अब पूरी तरह ऑनलाइन हो गया है। विशेषकर हरिद्वार और उधमसिंहनगर में कृषि व बागवानी के लिए भूमि क्रय की अनुमति अब डिजिटली प्रदान की जाएगी, जिससे ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा मिलेगा।

5. एग्री लोन पोर्टल: आसान होगा कृषि ऋण

किसानों के लिए बैंक से अपनी भूमि के सापेक्ष ऋण लेने की प्रक्रिया को अब पारदर्शी बनाया गया है। अब किसान स्वयं पोर्टल के माध्यम से ऋण के लिए आवेदन कर सकेंगे। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ऋण अदायगी के बाद बैंक द्वारा एनओसी (NOC) जारी करते ही भूमि से ‘चार्ज’ स्वतः ही हट जाएगा।

6. ई-वसूली पोर्टल (E-RCS): राजस्व वसूली में पारदर्शिता

बकायेदारों से वसूली की प्रक्रिया को भी डिजिटल किया गया है। अब बैंक या संबंधित विभाग अपने वसूली प्रकरण सीधे ऑनलाइन माध्यम से कलेक्टर को भेज सकेंगे। इसकी प्रत्येक स्तर पर ट्रैकिंग की जा सकेगी, जिससे सरकारी राजस्व की रिकवरी में तेजी आएगी।


सुशासन और पारदर्शिता की नई मिसाल

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि इन नवीन संस्करणों को विकसित उत्तराखंड के लक्ष्यों के अनुरूप उन्नत किया गया है। इन सेवाओं के ऑनलाइन होने से बिचौलियों की भूमिका समाप्त होगी और शासन व जनता के बीच सीधा संवाद स्थापित होगा।

इस अवसर पर मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन और राजस्व सचिव एस.एन पांडेय ने बताया कि इन पोर्टल्स को यूजर-फ्रेंडली बनाया गया है ताकि कम पढ़े-लिखे किसान भी इसका उपयोग आसानी से कर सकें। एनआईसी (NIC) के तकनीकी विशेषज्ञों ने इन पोर्टल्स की सुरक्षा और डेटा मैनेजमेंट पर विशेष ध्यान दिया है।

वर्चुअल माध्यम से जुड़े सभी जिले

कार्यक्रम के दौरान उत्तराखंड के सभी जिला मुख्यालयों से जिलाधिकारी, मंडल आयुक्त और तहसीलों से संबंधित अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े रहे। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि इन डिजिटल सेवाओं का लाभ अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक पहुँचना सुनिश्चित किया जाए।

‘स्मार्ट गवर्नेंस’ की ओर बढ़ते कदम

राजस्व विभाग के ये 6 वेब पोर्टल उत्तराखंड में ‘स्मार्ट गवर्नेंस’ की दिशा में एक बड़ी छलांग हैं। भूमि संबंधी धोखाधड़ी को रोकने और आम नागरिकों को तहसील के चक्करों से मुक्ति दिलाने में यह पहल मील का पत्थर साबित होगी।

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