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उत्तराखंड: ‘आपदा प्रबंधन सामूहिक जिम्मेदारी’, CM धामी ने किया ‘शीतलहर पूर्व तैयारी’ कार्यशाला का आगाज, जारी हुई नई SOP

देहरादून: उत्तराखंड में कड़ाके की ठंड और संभावित हिमस्खलन (Avalanche) की चुनौतियों से निपटने के लिए धामी सरकार ने ‘मिशन मोड’ में काम शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को देहरादून के हाथीबड़कला स्थित सर्वे ऑफ इंडिया ऑडिटोरियम में ‘शीतलहर पूर्व तैयारी’ विषय पर आयोजित एक दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला का भव्य शुभारंभ किया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि आपदा प्रबंधन केवल एक विभाग का काम नहीं है, बल्कि यह प्रशासन, स्थानीय निकायों और जनता की सामूहिक जिम्मेदारी है। कार्यक्रम के दौरान सीएम ने आपदा प्रबंधन विभाग के नववर्ष कैलेंडर 2026 और आपदा प्रबंधन हस्तपुस्तिका का विमोचन भी किया।

SOP का विमोचन और आधुनिक तकनीक पर जोर

मुख्यमंत्री ने कार्यशाला में शीतलहर, बाढ़, मॉक अभ्यास और हवाई यातायात सहायता के लिए नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में उत्तराखंड आपदा जोखिम न्यूनीकरण (DRR) के क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों को अपना रहा है।

सरकार के आधुनिक कदम:

  • ड्रोन सर्विलांस और जीआईएस मैपिंग: संवेदनशील इलाकों की निगरानी के लिए।

  • अर्ली वार्निंग सिस्टम (EWS): ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सेंसर और डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम की स्थापना।

  • रैपिड रिस्पॉन्स टीमें: किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्यवाही के लिए आधुनिक टीमों का गठन।

हिमस्खलन (Avalanche) और पर्यटन सुरक्षा प्राथमिकता

हिमालयी राज्य होने के नाते उत्तराखंड में हिमस्खलन एक बड़ा खतरा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के कई क्षेत्र एवलांच की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील हैं।

“तीर्थाटन, पर्यटन और पर्वतारोहण की गतिविधियों को सुरक्षित बनाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। हमने सीमांत क्षेत्रों में पूर्व चेतावनी प्रणाली को मजबूत किया है ताकि पर्यटकों और स्थानीय निवासियों को समय रहते सुरक्षित किया जा सके।”

स्वास्थ्य सेवाओं और रैन बसेरों के लिए सख्त निर्देश

शीतलहर के दौरान होने वाली बीमारियों जैसे हाइपोथर्मिया, निमोनिया और फ्लू से बचाव के लिए मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य विभाग को अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए हैं।

  1. जिला अस्पताल और मोबाइल टीमें: सभी स्वास्थ्य केंद्रों को सक्रिय रहने और पर्याप्त दवाइयां सुनिश्चित करने को कहा गया है।

  2. रैन बसेरे और अलाव: जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि बेघर लोगों के लिए रैन बसेरों में कंबल और शहरों में अलाव की पर्याप्त व्यवस्था हो।

  3. हीटिंग उपकरण: विशेषकर सीमांत क्षेत्रों के अस्पतालों में हीटिंग उपकरणों की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी।


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विषय मुख्य विवरण
कार्यक्रम का नाम शीतलहर पूर्व तैयारी कार्यशाला (Cold Wave Preparedness)
मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी
विमोचन आपदा प्रबंधन कैलेंडर 2026 एवं नई SOP
नई पहल युवा आपदा मित्र और आपदा सखी
तकनीकी फोकस AI, ड्रोन, सैटेलाइट और सेंसर मॉनिटरिंग

सामुदायिक भागीदारी: युवा आपदा मित्र सम्मानित

मुख्यमंत्री ने ‘समुदाय आधारित आपदा प्रबंधन’ पर जोर देते हुए ‘युवा आपदा मित्र’ और ‘आपदा सखी’ पहल की सराहना की। कार्यक्रम में वर्ष 2025 के दौरान राहत एवं बचाव कार्यों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले लोगों और आपदा मित्रों को सम्मानित किया गया। साथ ही, भारतीय स्टेट बैंक (SBI) द्वारा आपदा प्रबंधन के लिए दिए गए चार वाहनों को सीएम ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

मुख्य सचिव का संबोधन: ‘शीतलहर एक प्रशासनिक दायित्व’

मुख्य सचिव श्री आनन्द बर्द्धन ने कार्यशाला में कहा कि शीतलहर का प्रभाव धीरे-धीरे लेकिन भयावह होता है। इसे केवल मौसमी बदलाव नहीं, बल्कि एक प्रशासनिक और सामाजिक दायित्व के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने विभागों के बीच बेहतर समन्वय (Inter-departmental Coordination) को सफलता की कुंजी बताया।

2026 की चुनौतियों के लिए तैयार उत्तराखंड

इस कार्यशाला के माध्यम से उत्तराखंड सरकार ने यह संदेश दिया है कि वह 2026 की प्राकृतिक चुनौतियों के लिए पूरी तरह तैयार है। तकनीक और जन-भागीदारी के संगम से राज्य सरकार शून्य जनहानि (Zero Casualty) के लक्ष्य की ओर बढ़ रही है।

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