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बंगाल में संवैधानिक संकट! ED का ममता बनर्जी पर गंभीर आरोप— ‘छापेमारी के दौरान सबूत लेकर भाग गईं CM’, मामला पहुंचा हाई कोर्ट

Bengal Political Crisis 2026: पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस वक्त हड़कंप मच गया जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सीधे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर जांच में बाधा डालने और सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने का सनसनीखेज आरोप लगाया है।

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में प्रवर्तन निदेशालय (ED) और राज्य सरकार के बीच टकराव अब अपने चरम पर पहुंच गया है। कोयला तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के दौरान एक ऐसी घटना घटी जिसने देश के संवैधानिक ढांचे पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच एजेंसी का दावा है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनावी सलाहकार संस्था I-PAC के दफ्तर पर छापेमारी के दौरान मौके पर पहुंचकर ‘फिजिकल’ और ‘इलेक्ट्रॉनिक’ सबूतों को जबरन अपने कब्जे में ले लिया।


ED का दावा: मुख्यमंत्री ने जांच प्रक्रिया में डाली बाधा

ED के अनुसार, गुरुवार सुबह करीब 7:30 बजे एजेंसी की टीम I-PAC के प्रमुख प्रतीक जैन के आवास और साल्ट लेक स्थित कार्यालय पर छापेमारी कर रही थी। यह कार्रवाई अनूप माझी के नेतृत्व वाले कोयला तस्करी सिंडिकेट की जांच का हिस्सा थी।

एजेंसी का आरोप है कि तलाशी अभियान के बीच में ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी वहां पहुंच गईं। ED ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि मुख्यमंत्री जैसे संवैधानिक पद पर होने के बावजूद उन्होंने जांच में हस्तक्षेप किया और मौके से:

  • एक महत्वपूर्ण लैपटॉप

  • आईफोन (मोबाइल फोन)

  • और कई गोपनीय दस्तावेज अपने साथ लेकर बाहर निकल गईं। ED ने इसे कानून की प्रक्रिया का सीधा उल्लंघन करार दिया है।


हाई कोर्ट पहुंची ED, कल होगी अहम सुनवाई

मुख्यमंत्री के इस हस्तक्षेप के बाद ED ने तत्काल कलकत्ता हाई कोर्ट का रुख किया है। अपनी याचिका में एजेंसी ने दलील दी है कि मुख्यमंत्री उन लोगों का बचाव कर रही हैं जो कोयला तस्करी और काले धन को सफेद करने के गंभीर अपराधों में शामिल हैं। एजेंसी ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई किसी राजनीतिक द्वेष के कारण नहीं, बल्कि मनी लॉन्ड्रिंग विरोधी कानून के तहत एक नियमित प्रक्रिया थी। कोर्ट कल इस मामले पर सुनवाई कर सकता है।


ममता बनर्जी का पलटवार: ‘चुनावी रणनीति चुराने की कोशिश’

इधर, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए केंद्र सरकार और गृह मंत्री अमित शाह पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इस कार्रवाई को ‘राजनीतिक प्रतिशोध’ करार दिया।

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि:

  1. रणनीति पर कब्जा: ED ने तलाशी के बहाने उनकी पार्टी की चुनावी रणनीति, कैंडिडेट लिस्ट और गोपनीय ‘डेटा शीट’ को जब्त करने की कोशिश की है।

  2. लोकतंत्र की हत्या: ममता ने सवाल उठाया कि क्या किसी राजनीतिक दल के हार्ड डिस्क और बैंक डिटेल्स को छीनना आईटी सेक्टर का अपमान और अपराध नहीं है?

  3. SIR के जरिए धांधली: उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव से ठीक पहले SIR के जरिए वोटर्स के नाम डिलीट किए जा रहे हैं।

“अगर मैं भी बीजेपी के पार्टी ऑफिस में रेड मारूं तो क्या होगा? क्या यही ईडी की ड्यूटी है कि वह हमारी पार्टी के प्लान और रणनीति को चुराए? यह लोकतंत्र की हत्या है।”ममता बनर्जी, मुख्यमंत्री, पश्चिम बंगाल


कोयला तस्करी सिंडिकेट और फर्जी नौकरी घोटाला

ED ने स्पष्ट किया है कि यह छापेमारी ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ECL) के इलाकों से होने वाली कोयला चोरी और अवैध खुदाई से जुड़ी है। जांच एजेंसी के मुताबिक, इस तस्करी का पैसा हवाला नेटवर्क के जरिए फैक्ट्रियों में सप्लाई किया जाता था। इसके साथ ही, आज ईडी की टीम राज्य में फर्जी सरकारी नौकरी घोटाले के सिलसिले में भी 15 अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी कर रही है।


बंगाल की सियासत में ‘हाई-वोल्टेज’ ड्रामा

चुनावों से ठीक पहले हुई इस घटना ने बंगाल की सियासी जंग को और अधिक हिंसक और व्यक्तिगत बना दिया है। एक तरफ जहाँ भाजपा और केंद्र सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की बात कर रहे हैं, वहीं ममता बनर्जी इसे बंगाल की अस्मिता और लोकतांत्रिक लड़ाई के खिलाफ भाजपा की साजिश बता रही हैं।

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