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तुर्कमान गेट पर बुलडोजर एक्शन पर ओवैसी का ‘सुपर धमाका’, दिल्ली वक्फ बोर्ड पर लगाया मिलीभगत का संगीन आरोप!

नई दिल्ली (7 जनवरी 2026): दिल्ली के ऐतिहासिक तुर्कमान गेट स्थित फैज-ए-इलाही मस्जिद के समीप अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई ने अब एक बड़ा राजनीतिक मोड़ ले लिया है। बुधवार आधी रात को हुई इस कार्रवाई और उसके बाद भड़की हिंसा पर AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। ओवैसी ने न केवल इस कार्रवाई को अवैध बताया, बल्कि दिल्ली वक्फ बोर्ड पर जानबूझकर चुप्पी साधने और मिलीभगत करने का सनसनीखेज आरोप लगाया है।

ओवैसी का दावा: “वक्फ की जायदाद पर चला बुलडोजर”

हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने दस्तावेजों का हवाला देते हुए केंद्र सरकार और दिल्ली प्रशासन को घेरा। उन्होंने 1970 के गजट की एंट्री नंबर-40 का जिक्र करते हुए कहा कि जिस जमीन पर बुलडोजर चलाया गया है, वह पूरी तरह से वक्फ की संपत्ति है।

ओवैसी ने सवाल उठाया, “जब सरकार के अपने गजट में यह संपत्ति वक्फ की है, तो इसे अवैध बताकर कैसे ढहाया जा सकता है? यह सीधे तौर पर संसद द्वारा बनाए गए कानूनों का उल्लंघन है।”


‘सेव इंडिया फाउंडेशन’ और RSS पर साधा निशाना

ओवैसी ने दिल्ली हाईकोर्ट में दायर याचिका और उसके बाद आए फैसले की प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल खड़े किए।

  • एकतरफा कार्रवाई का आरोप: ओवैसी ने कहा कि आरएसएस (RSS) से जुड़ी संस्था ‘सेव इंडिया फाउंडेशन’ ने कोर्ट का रुख किया। कोर्ट ने सर्वे का आदेश दिया, लेकिन सबसे हैरत की बात यह है कि इस पूरी प्रक्रिया में वक्फ बोर्ड को पक्षकार (Party) बनाया ही नहीं गया।

  • सर्वे टीम पर सवाल: ओवैसी ने पूछा, “सर्वे में एमसीडी, राजस्व विभाग और पुलिस तो शामिल थी, लेकिन वक्फ बोर्ड के प्रतिनिधि क्यों नहीं थे? यह जानबूझकर किया गया षड्यंत्र नजर आता है।”


दिल्ली वक्फ बोर्ड पर बरसे ओवैसी: “आंखें बंद कर ली थीं”

अवैध ढांचे को हटाने की इस कार्रवाई के लिए ओवैसी ने दिल्ली वक्फ बोर्ड को सबसे बड़ा जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने इसे ‘नादानी’ नहीं बल्कि ‘डेलिब्रेट एक्ट’ (जानबूझकर किया गया कृत्य) बताया।

ओवैसी के वक्फ बोर्ड से तीखे सवाल:

  1. रिव्यू पिटीशन क्यों नहीं?: हाईकोर्ट के फैसले के बाद वक्फ बोर्ड के पास तीन महीने का समय था, फिर भी उन्होंने पुनर्विचार याचिका (Review Petition) क्यों दाखिल नहीं की?

  2. मिलीभगत का आरोप: ओवैसी ने कहा कि वक्फ बोर्ड इस पूरे मामले में पूरी तरह ‘मुल्बिस’ (लिप्त) है। उन्होंने जानबूझकर अपनी आंखें बंद कर लीं ताकि यह कार्रवाई हो सके।

  3. सुप्रीम कोर्ट जाने की सलाह: उन्होंने मांग की कि वक्फ बोर्ड और स्थानीय प्रबंधन समिति को तुरंत सुप्रीम कोर्ट जाकर ‘यथास्थिति’ (Status Quo) बहाल करने की मांग करनी चाहिए।


कानून की धज्जियां उड़ाने का आरोप: ‘Places of Worship Act’ का जिक्र

असदुद्दीन ओवैसी ने ‘प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट 1991’ की दुहाई देते हुए कहा कि 1947 में यह स्थान एक मस्जिद था। इस कानून के तहत किसी भी धार्मिक स्थल के स्वरूप को बदला नहीं जा सकता। ओवैसी के अनुसार, इस बुलडोजर एक्शन के जरिए संसद के बनाए गए कानूनों की सरेआम धज्जियां उड़ाई गई हैं।


पृष्ठभूमि: क्यों हुआ था बवाल?

बता दें कि दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर बुधवार रात करीब 2 बजे एमसीडी ने भारी पुलिस बल के साथ मस्जिद से सटे एक दवाघर और बारात घर को ढहा दिया था। इस दौरान इलाके में भारी पथराव हुआ, जिसमें SHO महावीर प्रसाद समेत कई पुलिसकर्मी घायल हुए। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े थे।


बढ़ती सियासी तपिश

ओवैसी के इस बयान के बाद अब दिल्ली की राजनीति में वक्फ बोर्ड और एमसीडी की कार्रवाई को लेकर बहस छिड़ गई है। जहाँ प्रशासन इसे अदालती आदेश का पालन बता रहा है, वहीं ओवैसी ने इसे ‘वक्फ संपत्तियों पर हमला’ करार दिया है। अब देखना होगा कि क्या दिल्ली वक्फ बोर्ड ओवैसी की सलाह पर सुप्रीम कोर्ट का रुख करता है या यह विवाद और गहराता है।

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