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Digital Arrest Scam: उद्योगपति ओसवाल से 7 करोड़ की ठगी मामले में ED का बड़ा एक्शन, कानपुर से मास्टरमाइंड अर्पित राठौर गिरफ्तार

The Hill India News
Last updated: January 2, 2026 1:18 pm
The Hill India News
Published: January 2, 2026
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नई दिल्ली/जालंधर | विशेष संवाददाता: देश में तेजी से पैर पसार रहे ‘डिजिटल अरेस्ट’ (Digital Arrest) के काले साम्राज्य पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कड़ा प्रहार किया है। जालंधर ज़ोनल टीम ने करोड़ों रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी सफलता हासिल करते हुए इस सिंडिकेट के एक मुख्य किरदार अर्पित राठौर (Arpit Rathore) को गिरफ्तार कर लिया है।

Contents
CBI अधिकारी बनकर किया ‘डिजिटल अरेस्ट’कैसे काम करता था मनी लॉन्ड्रिंग का यह जाल?मुख्य किरदार और मुखौटा कंपनियां:विदेशी अपराधियों से सीधा कनेक्शन और क्रिप्टो का खेलED की अब तक की कानूनी कार्रवाईडिजिटल अरेस्ट: आम जनता के लिए बढ़ती चुनौतीक्या और भी होंगे बड़े खुलासे?

कानपुर से हुई इस गिरफ्तारी के दौरान ईडी को न केवल अहम सबूत मिले हैं, बल्कि 14 लाख रुपये की बेहिसाब नकदी और कई आपत्तिजनक डिजिटल डिवाइस भी बरामद हुए हैं। यह कार्रवाई लुधियाना के प्रसिद्ध उद्योगपति एस. पी. ओसवाल (S. P. Oswal) के साथ हुई 7 करोड़ रुपये की सनसनीखेज साइबर ठगी से जुड़ी है।


CBI अधिकारी बनकर किया ‘डिजिटल अरेस्ट’

जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि ठगों ने खुद को सीबीआई (CBI) अधिकारी बताकर उद्योगपति एस. पी. ओसवाल को निशाना बनाया था। जालसाजों ने उन्हें वीडियो कॉल के जरिए ‘डिजिटल अरेस्ट’ किया और कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर उनसे 7 करोड़ रुपये हड़प लिए।

ईडी की जांच का दायरा केवल ओसवाल केस तक सीमित नहीं है। एजेंसी ने लुधियाना साइबर क्राइम थाने में दर्ज एफआईआर के अलावा 9 अन्य ऐसे मामलों को भी अपनी जांच में शामिल किया है, जिनमें इसी गिरोह ने करीब 1.73 करोड़ रुपये की अतिरिक्त साइबर ठगी को अंजाम दिया था।


कैसे काम करता था मनी लॉन्ड्रिंग का यह जाल?

ईडी की जालंधर टीम ने इस पूरे नेटवर्क की ‘लेयरिंग’ (Layering) को डिकोड कर लिया है। जांच में सामने आया है कि ठगी की रकम को सफेद करने के लिए म्यूल बैंक अकाउंट्स (Mule Bank Accounts) के एक जटिल जाल का इस्तेमाल किया गया था।

मुख्य किरदार और मुखौटा कंपनियां:

  • रूमी कलिता (गुवाहाटी): सिंडिकेट की एक अन्य महत्वपूर्ण कड़ी, जिसे ईडी ने पहले ही 23 दिसंबर 2025 को गिरफ्तार कर लिया था।

  • अर्पित राठौर (कानपुर): वह मास्टरमाइंड जो फंड ट्रांसफर की पूरी प्रक्रिया को नियंत्रित कर रहा था।

  • शेल कंपनियां: ठगी का पैसा मुख्य रूप से दो कंपनियों— ‘Frozenman Warehousing and Logistics’ और ‘Rigglo Ventures Pvt Ltd’ के बैंक खातों में जमा कराया गया था।

जांच के अनुसार, Frozenman के खातों में 9 डिजिटल अरेस्ट मामलों की राशि और Rigglo Ventures में 2 मामलों की राशि ट्रांसफर की गई थी। इसके बाद इस पैसे को 200 से अधिक विभिन्न बैंक खातों में तितर-बितर कर दिया गया ताकि एजेंसी को भटकाया जा सके।


विदेशी अपराधियों से सीधा कनेक्शन और क्रिप्टो का खेल

ईडी के अधिकारियों के मुताबिक, अर्पित राठौर के तार केवल भारत ही नहीं बल्कि विदेशों में बैठे साइबर अपराधियों से भी जुड़े हुए हैं। अर्पित का मुख्य काम विदेशी ठगों को ‘म्यूल अकाउंट्स’ उपलब्ध कराना और भारत से ठगी गई रकम को सुरक्षित बाहर भेजना था।

क्रिप्टोकरेंसी के जरिए भुगतान: हैरानी की बात यह है कि अर्पित राठौर इस अवैध काम के बदले कमीशन के रूप में भारतीय रुपये के साथ-साथ USDT (एक प्रकार की स्टेबल क्रिप्टोकरेंसी) में भी हिस्सा ले रहा था। उसके पास से जब्त किए गए डिजिटल डिवाइस से विदेशी संपर्कों और क्रिप्टो वॉलेट्स के अहम सुराग मिले हैं।


ED की अब तक की कानूनी कार्रवाई

प्रवर्तन निदेशालय इस मामले में सिलसिलेवार तरीके से शिकंजा कस रहा है:

  1. 22 दिसंबर 2025: इस सिंडिकेट से जुड़े ठिकानों पर देशव्यापी छापेमारी की गई।

  2. 23 दिसंबर 2025: गुवाहाटी से रूमी कलिता की गिरफ्तारी हुई, जो फिलहाल हिरासत में है।

  3. हालिया कार्रवाई: अर्पित राठौर को कानपुर से पकड़ा गया। उसे ट्रांजिट रिमांड के बाद जालंधर की स्पेशल कोर्ट में पेश किया गया, जहाँ से कोर्ट ने उसे 5 जनवरी 2026 तक ईडी की कस्टडी में भेज दिया है।


डिजिटल अरेस्ट: आम जनता के लिए बढ़ती चुनौती

यह मामला एक बार फिर देश में बढ़ते साइबर अपराधों की ओर इशारा करता है। सरकारी डेटा के अनुसार, पिछले एक साल में ‘डिजिटल अरेस्ट’ के मामलों में 200% की बढ़ोतरी देखी गई है। ठग अक्सर पुलिस, सीबीआई या नारकोटिक्स विभाग के नाम पर लोगों को डराते हैं।

विशेषज्ञों की सलाह:

  • कोई भी सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी नहीं करती।

  • संदिग्ध कॉल आने पर तुरंत स्थानीय पुलिस या ‘1930’ साइबर हेल्पलाइन पर रिपोर्ट करें।


क्या और भी होंगे बड़े खुलासे?

प्रवर्तन निदेशालय का मानना है कि अर्पित राठौर और रूमी कलिता की गिरफ्तारी तो केवल शुरुआत है। इस सिंडिकेट के पीछे कई और सफेदपोश चेहरे और विदेशी सिंडिकेट हो सकते हैं। ईडी की टीम अब उन 200 म्यूल अकाउंट्स के मालिकों की पहचान कर रही है, जिनके जरिए करोड़ों रुपये का हेरफेर किया गया। आने वाले हफ्तों में उत्तर प्रदेश, असम और पंजाब के कई अन्य शहरों में छापेमारी की संभावना है।

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