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दिल्ली में ‘डॉग सेंसस’ पर संग्राम: AAP का सरकार पर गंभीर आरोप, कहा- ‘सच बोलने पर कार्यकर्ताओं को मिल रही पुलिस की धमकी’

नई दिल्ली | विशेष संवाददाता: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आवारा कुत्तों की गणना (Stray Dog Census) को लेकर छिड़ा विवाद अब एक बड़े राजनीतिक संकट में तब्दील हो गया है। आम आदमी पार्टी (AAP) ने शुक्रवार को दिल्ली सरकार और प्रशासन पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी का दावा है कि सरकार शिक्षकों को कुत्तों की गिनती में लगाने वाले ‘विवादास्पद परिपत्र’ (Circular) को छिपाने के लिए अब ‘आप’ कार्यकर्ताओं को पुलिस कार्रवाई की धमकी दे रही है।


क्या है पूरा मामला? (The Core of the Controversy)

विवाद की जड़ में वह कथित सरकारी आदेश है, जिसमें दिल्ली के सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को शहर के विभिन्न इलाकों में आवारा कुत्तों की गणना करने का निर्देश दिया गया था।

आम आदमी पार्टी का दावा:

पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का आरोप है कि शिक्षा विभाग या संबंधित प्रशासनिक इकाई द्वारा एक आधिकारिक सर्कुलर जारी किया गया था। इस आदेश के तहत शिक्षकों को शैक्षणिक कार्यों से हटाकर सड़कों पर कुत्तों की गिनती करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। ‘आप’ ने इसे शिक्षकों का अपमान और शिक्षा व्यवस्था के साथ खिलवाड़ करार दिया है।

सरकार का रुख:

दूसरी ओर, दिल्ली सरकार और संबंधित विभाग ने ऐसे किसी भी आधिकारिक आदेश या परिपत्र के अस्तित्व से साफ इनकार किया है। सरकार का कहना है कि ऐसा कोई निर्देश जारी ही नहीं किया गया और जो दस्तावेज सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे हैं, वे फर्जी हो सकते हैं।


‘आप’ का आरोप: “धमका रहा है प्रशासन”

शुक्रवार को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ‘आप’ प्रवक्ताओं ने आरोप लगाया कि जब पार्टी कार्यकर्ताओं और शिक्षक संगठनों ने इस मुद्दे को उठाया, तो सरकार ने अपनी गलती सुधारने के बजाय दमनकारी नीति अपना ली।

“हमारे कार्यकर्ताओं को फोन कर पुलिस कार्रवाई की धमकी दी जा रही है। प्रशासन चाहता है कि हम उस सर्कुलर पर चुप्पी साध लें, जो शिक्षकों की गरिमा को ठेस पहुंचाता है। अगर सरकार ने आदेश जारी नहीं किया, तो वह इतनी डरी हुई क्यों है?”

— AAP आधिकारिक बयान

पार्टी ने आरोप लगाया कि शिक्षकों को डराया जा रहा है ताकि वे इस ‘अमानवीय ड्यूटी’ के खिलाफ आवाज न उठाएं।


शिक्षकों की तैनाती पर क्यों मचा है बवाल?

भारत में ‘राइट टू एजुकेशन’ (RTE) एक्ट के तहत शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाने पर सख्त पाबंदियां हैं। शिक्षकों को केवल जनगणना, चुनाव ड्यूटी और आपदा राहत जैसे कार्यों में ही लगाया जा सकता है।

विवाद के मुख्य बिंदु:

  1. शिक्षकों की गरिमा: शिक्षक संगठनों का तर्क है कि कुत्तों की गणना करना उनके पेशे के सम्मान के खिलाफ है।

  2. सुरक्षा का मुद्दा: आवारा कुत्तों की गिनती के दौरान शिक्षकों पर हमले का खतरा बना रहता है।

  3. शिक्षा पर प्रभाव: बोर्ड परीक्षाओं और शैक्षणिक सत्र के बीच शिक्षकों को ऐसे कार्यों में लगाना छात्रों के भविष्य से समझौता है।


दिल्ली में आवारा कुत्तों की समस्या (Stray Dog Menace in Delhi)

दिल्ली में पिछले कुछ वर्षों में आवारा कुत्तों के काटने (Dog Bite Cases) की घटनाओं में भारी वृद्धि देखी गई है। नगर निगम (MCD) और सरकार पर कुत्तों के बंध्याकरण (Sterilization) और गणना को लेकर लगातार दबाव बना हुआ है।

क्षेत्र कुत्तों की अनुमानित संख्या शिकायतें (प्रति माह)
दक्षिण दिल्ली 1.5 लाख+ 800+
उत्तर दिल्ली 1.2 लाख+ 650+
पूर्वी दिल्ली 90 हजार+ 500+

विशेषज्ञों का मानना है कि सटीक गणना के बिना ‘एनिमल बर्थ कंट्रोल’ (ABC) प्रोग्राम सफल नहीं हो सकता, लेकिन इसके लिए शिक्षकों का उपयोग करना कानूनी और नैतिक रूप से गलत है।


राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर

इस मुद्दे ने दिल्ली की राजनीति में एक नया मोड़ ले लिया है। विपक्ष (भाजपा) ने भी इस मुद्दे पर चुटकी लेते हुए कहा है कि दिल्ली सरकार के भीतर समन्वय की भारी कमी है। वहीं, ‘आप’ इसे केंद्र बनाम राज्य की शक्तियों के टकराव और उपराज्यपाल (LG) कार्यालय के हस्तक्षेप से जोड़कर भी देख रही है।

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